पीतल नगरी मुरादाबाद में कास्टिंग से तैयार हो रहा कछुआ, वास्तु शास्त्र में होता है शुभ, देश-विदेश में है भारी डिमांड

पीतल नगरी मुरादाबाद में कास्टिंग से तैयार हो रहा कछुआ, वास्तु शास्त्र में होता है शुभ, देश-विदेश में है भारी डिमांड


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Moradabad news: मुरादाबाद में पीतल के कछुए की मूर्ति की देश-विदेश में भारी डिमांड है. वास्तु शास्त्र में शुभ माने जाने वाले इस कछुए को कास्टिंग से तैयार किया जाता है. इसकी कीमत 2000 रुपये प्रति किलो है. कछुए की पीठ पर नकाशी से अलग-अलग चीजों को उकेरा गया है. जिसकी वजह से इस कछुए की डिमांड देश ही नहीं बल्कि विदेशों से भी देखने को मिल रही है. इस कछुए के विदेश से भी अच्छे ऑर्डर सामने आ रहे हैं और यह कछुआ खूब पसंद किया जा रहा है. कारोबारियों के मुताबिक यह कछुआ वास्तु शास्त्र में भी इस्तेमाल किया जाता है.

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मुरादाबादः यूपी का मुरादाबाद पूरे विश्व में पीतल नगरी के नाम से मशहूर है. यहां पर पीतल का बड़े पैमाने पर कारोबार किया जाता है. तो वहीं पीतल नगरी के इस शहर में पीतल के विभिन्न उत्पाद तैयार किए जाते हैं. इन सभी उत्पादों के साथ-साथ इन दोनों पीतल के कछुए की एक आकर्षण मूर्ति तैयार की जा रही है. कछुए की पीठ पर नकाशी से अलग-अलग चीजों को उकेरा गया है. जिसकी वजह से इस कछुए की डिमांड देश ही नहीं बल्कि विदेशों से भी देखने को मिल रही है. इस कछुए के विदेश से भी अच्छे ऑर्डर सामने आ रहे हैं और यह कछुआ खूब पसंद किया जा रहा है. कारोबारियों के मुताबिक यह कछुआ वास्तु शास्त्र में भी इस्तेमाल किया जाता है.

कास्टिंग से तैयार किया जाता है कछुआ

पीतल कारोबारी राघव खन्ना ने बताया कि पीतल के विभिन्न उत्पाद के साथ-साथ डेकोरेशन के उत्पादन भी तैयार किए जाते हैं. उन्ही में वास्तु के कई उत्पाद भी तैयार किए जाते हैं. उन्ही में एक उत्पाद कछुआ भी तैयार किया जा रहा है. यह कछुआ कास्टिंग से तैयार किया जाता है. इस कछुए की ढलाई होकर कास्टिंग कर इसे तैयार किया जाता है. पीतल के इस कछुए को ज्यादातर वास्तु में ही प्रयोग में लाया जाता है. घर की दिशा के हिसाब से इसे घर में लगाया जाता है. पीतल के इस कछुए की मूर्ति को घर में लगाना बेहद शुभ माना जाता है और इसे घर में लगाने से बहुत लाभ मिलते हैं.जिसकी वजह से इसकी बहुत अच्छी डिमांड रहती है.

6 इंची से 24 इंच तक रहता है साइज

6 इंची से लेकर 24 इंची तक के साइज में यह कछुआ तैयार किया जाता है. इसकी सबसे ज्यादा डिमांड साउथ, केरला से देखने को मिलती है. इसके अलावा विदेशों से भी इसकी अच्छी डिमांड सामने आ रही है. विदेश में जहां भी सनातन धर्म से जुड़े लोग रह रहे हैं. वह इस कछुए की डिमांड कर रहे हैं. उन्होंने कहा कि इस कछुए की कीमत की अगर बात की जाए तो 2000 रुपए किलो के हिसाब से इसकी मूर्ति सेल की जाती है. इस कछुए के ऊपर बारीक नकाशी से अलग-अलग चीजों को किया गया है. जिनका वास्तु में प्रयोग किया जाता है.



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