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BJP Leader Rituraj Sinha: बिहार में बेटियों के साथ लगातार सामने आ रही घटनाओं ने अब सरकार के सामने एक ऐसा सवाल खड़ा कर दिया है, जिसे सिर्फ राजनीति के चश्मे से नहीं देखा जा सकता. बांका, जमुई, बेगूसराय और पटना में बेटियों के साथ हुई घटनाओं का जिक्र करते हुए बिहार के बड़े बीजेपी नेता ने कहा कि इन घटनाओं ने देशभर में बिहार का नाम शर्मसार किया है. खास बात यह रही कि सवाल विपक्ष की ओर से नहीं, बल्कि सत्ताधारी बीजेपी के नेता ऋतुराज सिन्हा की तरफ से उठाया गया है. भाजपा नेता ने कानून-व्यवस्था के साथ-साथ परिवार और समाज की जिम्मेदारी पर भी सवाल खड़े किए हैं और दो टूक कहा है-“बिहार का नाम शर्मसार हुआ है”. पूरी खबर विस्तार से आगे पढ़िये.
बिहार में बेटियों के साथ दुराचार पर बीजेपी के ऋतुराज सिन्हा ने उठाए सवाल
पटना. बिहार में बेटियों और बच्चियों के साथ पिछले कुछ दिनों में सामने आई दुराचार की घटनाओं ने अब सत्ता पक्ष के भीतर से भी कानून-व्यवस्था को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं. बीजेपी नेता ऋतुराज सिन्हा ने जमुई, बांका, बेगूसराय, पटना, नालंदा और मुजफ्फरपुर की घटनाओं का जिक्र करते हुए कहा कि इन मामलों ने देशभर में बिहार को चर्चा में ला दिया है और राज्य को शर्मसार किया है. खास बात यह है कि ऋतुराज सिन्हा ने यह सवाल विपक्ष के मंच से नहीं, बल्कि अपनी ही सरकार को लेकर उठाया है. ऋतुराज सिन्हा ने कहा कि इन घटनाओं को लेकर पुलिस और प्रशासन की क्या कमी रह गई, इस पर चर्चा होनी चाहिए. उन्होंने साफ कहा कि सरकार का काम कानून-व्यवस्था यानी लॉ एंड ऑर्डर को बनाए रखना है. उनके मुताबिक, बेटियों के साथ होने वाली ऐसी घटनाओं को लेकर सरकार और प्रशासन को अपनी जिम्मेदारी पर विचार करना होगा. ऋतुराज सिन्हा ने कहा कि इन घटनाओं की चर्चा सिर्फ राजनीतिक गलियारों में नहीं हो रही है.उन्होंने कहा, “मेरे घर में, हमारे घर की महिलाएं इसकी चर्चा कर रही हैं. कहीं न कहीं आपके घर में भी इसकी चर्चा हो रही होगी.”
सरकार के साथ परिवार और समाज से भी सवाल
ऋतुराज सिन्हा ने हालांकि इस पूरे मुद्दे को केवल सरकार और पुलिस की जिम्मेदारी तक सीमित नहीं रखा. उन्होंने कहा कि चर्चा इस बात पर भी होनी चाहिए कि आखिर परिवार और समाज में ऐसा क्या बदलाव आ रहा है कि घर के लड़के ही अपने घर और आसपास की बेटियों के लिए सिरदर्द बनते जा रहे हैं. उन्होंने अपनी पीढ़ी की परवरिश का उदाहरण देते हुए कहा कि उन्हें बचपन में घर के बड़ों से यह सिखाया गया था कि घर का लड़का या पुरुष होने का मतलब यह है कि उसके साथ रहने वाली महिलाएं और बच्चे खुद को सुरक्षित महसूस करें.
‘औरत के साथ बदतमीजी करना सबसे हीन काम’
ऋतुराज सिन्हा ने कहा कि उन्हें घर के बड़ों से यह सीख मिली थी कि किसी महिला के साथ बदतमीजी करना, किसी की बहू-बेटी का रास्ता रोकना या किसी महिला पर हाथ उठाना बेहद हीन काम है. उन्होंने कहा कि पुरुष होने का मतलब ताकत दिखाना नहीं, बल्कि अपने आसपास मौजूद महिलाओं और बच्चों को सुरक्षा का एहसास कराना था. उनके मुताबिक, समाज में इस सोच को फिर से मजबूत करने की जरूरत है.
‘हमारे घर में कोई भक्षक पैदा न हो’
बीजेपी नेता ने कहा कि अगर बिहार की छवि और बिहार के पुरुषों की छवि बचानी है तो सभी को मिलकर सोचना होगा. खास तौर पर पुरुषों के साथ-साथ माताओं और परिवार की बुजुर्ग महिलाओं की भी इसमें भूमिका है. उन्होंने कहा कि परिवारों को यह सोचना होगा कि बच्चों की परवरिश में ऐसा क्या बदलाव किया जाए कि कोई ऐसा बेटा या बच्चा तैयार न हो, जो आगे चलकर किसी महिला के लिए भक्षक बन जाए. उन्होंने कहा कि घर में लड़कों को यह समझाना होगा कि कौन सा व्यवहार उचित है और कौन सा व्यवहार परिवार, समाज, जिले और पूरे बिहार के लिए शर्मिंदगी का कारण बन सकता है.
‘यह विषय राजनीतिक नहीं, सामाजिक भी है’
ऋतुराज सिन्हा ने इस पूरे मुद्दे को राजनीतिक बहस से आगे सामाजिक विषय बताया. उन्होंने कहा कि अगर यह विषय राजनीतिक है भी तो उतना ही सामाजिक भी है. उन्होंने कहा कि जिस तरह कोई व्यक्ति अपने परिवार की छवि को लेकर जिम्मेदारी महसूस करता है, उसी तरह बिहार की छवि को बचाना भी सभी की जिम्मेदारी है. उन्होंने लोगों से इस मुद्दे पर सोचने और अपनी राय रखने की अपील करते हुए कहा कि बिहार की छवि केवल सरकार या पुलिस की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि समाज और परिवार की भी जिम्मेदारी है.