World Economy : सुधरने वाले नहीं हैं दुनिया के हालात, वित्तमंत्री ने बताया- चुनौती से निपटने के लिए क्या करना होगा

World Economy : सुधरने वाले नहीं हैं दुनिया के हालात, वित्तमंत्री ने बताया- चुनौती से निपटने के लिए क्या करना होगा


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World Economy : वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा है कि ग्लोबल इकनॉमी के हालात देखकर यही लगता है कि अब इसके सुधरने का इंतजार करना बेकार है और भारत को अपने लिए ऐसी नीतियां बनानी होंगी जो इन चुनौतियों के बीच भी अर्थव्यवस्था को बेहतर बना सके. इसके लिए दुनिया के अन्य देशों को भी आपस में बातचीत करनी चाहिए और कारोबारी माहौल को बेहतर बनाना चाहिए.

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ग्लोबल इकनॉमी को लेकर वित्तमंत्री ने चिंता जताई है.

नई दिल्ली. भारतीय अर्थव्यवस्था को अब आगे बढ़ने के लिए दुनिया के हालात सुधरने का इंतजार नहीं करना चाहिए. इसके बजाय खुद को बेहतर बनाने के लिए नीति बनाने पर जोर देना ज्यादा बेहतर होगा. यह कहना है वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण का. उन्होंने कहा कि वैश्विक अनिश्चितता अब ‘स्थायी स्थिति’ बन गई है और ऐसी नीतियां बनाने की जरूरत है, जो आर्थिक मजबूती बढ़ाएं. इसके साथ ही उन्होंने दुनिया के अन्य देशों से खुले और भरोसेमंद आर्थिक संबंध बनाए रखने का आह्वान किया.

सीतारमण ने वैश्विक अर्थव्यवस्था में अगले दशक के झटकों से निपटने के लिए भारत की चार प्राथमिकताएं गिनाते हुए कहा कि मजबूत आपूर्ति श्रृंखलाएं तैयार करने में आत्मनिर्भरता पर ध्यान देने और निजी क्षेत्र को अनुसंधान एवं विकास (आरएंडडी) समेत निवेश का नेतृत्व करने का समय आ गया है. कामकाज की बदलती दुनिया के बीच कौशल विकास के लिए प्रशिक्षण और उसे लागू करने में उद्योग को बड़ी भूमिका निभानी चाहिए. तभी मौजूदा चुनौतियों से निपटने के लिए ठोस रणनीति बनाई जा सकेगी.

हालात देखकर बनानी होगी रणनीति
वित्तमंत्री ने कहा कि ग्लोबल इकनॉमी में अनिश्चितता अब लगातार बनी रहने वाली स्थिति है और नीतियां इसी को ध्यान में रखकर बनाई जानी चाहिए. हमें आगे बढ़ते हुए लगातार मजबूती पर ध्यान देना होगा. यह कोई एक बार किया जाने वाला प्रयास नहीं है. आने वाले वर्षों के लिए तैयारी जरूरी है और भारत इनका सामना मजबूती के साथ कर रहा है. खुले, भरोसेमंद और नियम आधारित वैश्विक आर्थिक संबंध आज की जरूरत बन चुके हैं. उन्होंने कहा कि सभी देशों को एक-दूसरे के साथ संवाद और बातचीत के जरिये हुए समझौतों के माध्यम से जुड़ना चाहिए, न कि भू-राजनीतिक मतभेदों को व्यापार और निवेश में बाधा बनने देना चाहिए.

रिसर्च पर बढ़ रहा भारत का खर्च
वित्तमंत्री ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय व्यापार नीति में कारोबार के लिए अधिक निश्चितता होनी चाहिए. देशों की विकास संबंधी प्राथमिकताओं का सम्मान किया जाना चाहिए और बाजारों को विभाजित करने वाले अनावश्यक प्रतिबंधों से बचना चाहिए.
उन्होंने कहा कि भारत का अनुसंधान एवं विकास पर खर्च सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) का 0.83 फीसदी है, जबकि आर्थिक सहयोग और विकास संगठन (ओईसीडी) के देशों में यह 2.7 फीसदी है. वित्तमंत्री ने कहा कि भारत के कुल अनुसंधान एवं विकास खर्च में निजी क्षेत्र का योगदान केवल 36 फीसदी है. आने वाले वर्षों में भारत की मजबूती की परीक्षा इस बात से भी होगी कि वह वैश्विक आर्थिक झटकों का सामना किस तरह करता है और इनका असर परिवारों और कारोबारी गतिविधियों पर कितना कम पड़ता है.



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