IAS Story : कौन हैं वैशाली की DM वर्षा सिंह? रात भर खटिया पर बैठकर कराती रहीं बांध की मरम्मत

IAS Story : कौन हैं वैशाली की DM वर्षा सिंह? रात भर खटिया पर बैठकर कराती रहीं बांध की मरम्मत


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IAS Varsha Singh : बिहार की बेटी और 2016 बैच की IAS अधिकारी वर्षा सिंह इन दिनों बाढ़ राहत कार्य को लेकर चर्चा में हैं. वैशाली की DM वर्षा सिंह रातभर खटिया पर बैठकर रिंग बांध की मरम्मत और बचाव कार्य की निगरानी करती रहीं. जानिए कौन हैं IAS वर्षा सिंह और कैसा रहा उनका अब तक का सफर.

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IAS Varsha Singh : आईएएस वर्षा सिंह खगड़िया जिले की हैं.

IAS Varsha Singh : बिहार के वैशाली की डीएम IAS वर्षा सिंह ने लोगों का दिल जीत लिया है. उन्होंने रात भर खटिया पर बैठकर रिंग बांध की मरम्मत कार्य देखा. बाढ़ पीड़ितों की राहत कार्य में इस जिम्मेदारी और समर्पण के साथ जुटी वर्षा सिंह की हर कोई तारीफ कर रहा है.

गंडक नदी का जलस्तर बढ़ते ही लालगंज के यूसुफपुर पंचायत के पीरापुर वार्ड-5 में रिंग बांध में कई जगह रिसाव और कटाव शुरू हो गया था. सूचना मिलते ही डीएम वर्षा सिंह रात को ही मौके पर पहुंचीं और अपनी निगरानी में बचाव कार्य शुरू कराया. वह सुबह चार बजे तक बैठी रहीं.

कौन हैं IAS वर्षा सिंह?

आईएएस वर्षा सिंह 2016 बैच, बिहार कैडर की अधिकारी हैं. उनके पास ग्रेजुएशन डिग्री है. उन्होंने अपने अब तक के प्रशासनिक करियर में सहायक सचिव और संयुक्त सचिव सहित विभिन्न पदों पर काम किया है. वर्तमान में वह वैशाली जिले की जिला मजिस्ट्रेट हैं. उन्होंने यह पद 2 जून 2025 को संभाला था.

ट्रेनिंग के दौरान उनकी पहली तैनाती गोपालगंज में सदर एसडीएम (SDM) के रूप में हुई थी. इसके बाद वह अरवल जिले की डीएम भी रहीं. वैशाली (हाजीपुर) की नई जिलाधिकारी नियुक्त होने से पहले वह नगर विकास एवं आवास विभाग में अपर सचिव के पद पर कार्यरत थीं. इसके साथ ही वे पटना मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन (PMRCL) में एडिशनल मैनेजिंग डायरेक्टर की जिम्मेदारी भी संभाल रही थीं

बिहार की ही हैं वर्षा सिंह

वर्षा सिंह का जन्म 20 नवंबर, 1986 को हुआ था. वे बिहार के खगड़िया जिले के गोगरी प्रखंड के सुदूर गांव बोरना की रहने वाली हैं. उन्होंने महाराष्ट्र के नागपुर से पढ़ाई की है. वह अपनी सादगी और जमीनी स्तर पर जुड़कर काम करने के लिए जानी जाती हैं. इससे पहले एक बार वे खेतों में मजदूरों के साथ खुद कीचड़ में उतरकर धान की रोपनी करते हुए भी देखी गई थीं.

पिता चाहते थे मिले महाराष्ट्र कैडर

वर्षा के पिता की इच्छा थी कि उन्हें महाराष्ट्र कैडर मिले. लेकिन वर्षा सिंह ने बिहार को प्राथमिकता दी और उन्हें बिहार कैडर मिल भी गया. बिहार कैडर मिलने पर वर्षा सिंह काफी खुश हुई थीं. उन्हें लगा था कि जन्मभूमि का कर्ज उतारने का मौका मिलेगा. उन्होंने गांव में लोगों की गरीबी बेबसी को करीब से देखा था.



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