आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की दुनिया की दिग्गज कंपनी Anthropic को अपने लोकप्रिय AI मॉडल Claude के लिए जाना जाता है. इस कंपनी ने सैन फ्रांसिस्को स्थित अपने हेडक्वार्टर में एक अनोखी और अहम बैठक आयोजित की. कंपनी ने न्यूयॉर्क स्थित वेदांत सोसाइटी के प्रमुख और रामकृष्ण मिशन के संन्यासी स्वामी सर्वप्रियानंद को खासतौर पर आमंत्रित किया और उन्हें एयर लिफ्ट कराकर अपने हेडक्वार्टर बुलाया. इस बैठक का मकसद यह समझना था कि एआई मॉडल क्लोड को नैतिकता, सही-गलत की समझ और मानवीय मूल्यों की समझ कैसे दी जाए.
स्वामी सर्वप्रियानंद के अनुसार, एंथ्रोपिक की टीम ने सबसे पहले उनसे एक ऑनलाइन इंटरव्यू के लिए कॉन्टैक्ट किया था. उन्होंने मजाकिया लहजे में स्पष्ट किया कि यह किसी नौकरी का इंटरव्यू नहीं था. इसके बाद कंपनी ने उन्हें सैन फ्रांसिस्को हेडक्वार्टर आने का इन्विटेशन दिया गया. दिलचस्प बात यह रही कि स्वामी की पूरी यात्रा से लेकर होटल बुकिंग तक सारे मैनेजमेंट का काम खुद एक एआई सिस्टम की तरफ से सुचारू रूप से ऑपरेट किया गया.
सीक्रेट मीटिंग और एग्रीमेंट
सैन फ्रांसिस्को हेडक्वार्टर पहुंचने के बाद, स्वामी सर्वप्रियानंद और अन्य मेहमानों को एक नॉन-डिक्लोजर एग्रीमेंट (NDA) पर हस्ताक्षर करने के लिए कहा गया. एंथ्रोपिक ने अपने कुछ बेहद एडवांस और रिलीज नहीं किए गए एआई प्रोजेक्ट्स उनके सामने प्रदर्शित किए. एनडीए के तहत बैठक की तकनीकी और गोपनीय डिटेल पब्लिक नहीं किए जा सकते थे. हालांकि, स्वामी जी ने अपनी बातचीत में एंथ्रोपिक के अत्याधुनिक मॉडल्स और प्रोजेक्ट्स जैसे प्रोजेक्ट ग्लासविंग और माइथोस का जिक्र किया गया.
रामकृष्ण मिशन के संन्यासी स्वामी सर्वप्रियानंद
एंथ्रोपिक की AI एथिक्स पर मंथन
इस हाई लेवल बातचीत में केवल स्वामी सर्वप्रियानंद ही अकेले नहीं थे. एंथ्रोपिक ने कई सब्जेक्ट वाले अंतर धार्मिक गोलमेज चर्चा आयोजित की थी. इसमें ईसाई, यहूदी, सिख और इवेन्जेलिकल परंपराओं के धर्मशास्त्री और दार्शनिक शामिल थे. इसके साथ ही मानसिक हेल्थ एक्सपर्ट और सलाहकार शामिल थे. एंथ्रोपिक के सह-संस्थापक और रिसर्चर भी थे, जिनके साथ स्वामी ने कई घंटों तक गहन चर्चा की.
बातचीत के कई मुख्य मुद्दे रहे. इनमें नैतिकता का समावेश यानी मोरल फॉर्मेशन सबसे अहन रहा. एआई को केवल कठोर नियमों से बांधने की बजाय उसमें नैतिक मूल्यों की समझ कैसे विकसित की जाए? इसके साथ ही चेतना और इंटेलिजेंस पर भी चर्चा हुई. क्या बहुत डेवलप हो चुका एआई कभी सचमुच सचेत अवस्था यानी Conscious हो सकता है. या फिर यह केवल चेतना का नकल यानी आर्टिफिशियल प्रजेंटेशन मात्र है?
वेदांत दर्शन और एआई
वैदिक और अद्वैत वेदांत दर्शन के नजरिए से स्वामी सर्वप्रियानंद ने चेतना और बुद्धि के बीच का स्पष्ट अंतर समझाया. उन्होंने बुद्धि और मन की बात रखते हुए कहा कि वेदांत के अनुसार बुद्धि यानी Intellect और मन भौतिक या दृश्य जगत का हिस्सा हैं. इसलिए एआई जैसी मशीनें विचार करने, याद रखने और तर्क करने की क्षमता को विकसित कर सकती हैं.
शुद्ध चेतना पर गौर करें तो मशीनी संरचनाएं कितनी भी जटिल क्यों ना हो जाएं, वे केवल जागरूकता का बिहैवियर ही दिखा सकती हैं. वास्तव में अंदर अनुभव करने वाली शुद्ध चेतना केवल मशीनी कैलकुलेशन से पैदा नहीं हो सकती है.
एंथ्रोपिक का वो टेस्ट
एंथ्रोपिक अपने क्लोड मॉडल को ट्रेन करने के लिए Constitutional AI नामक पैरामीटर का उपयोग कर रहा है. इसके आधार पर कंपनी ने एक प्रैक्टिकल टूल तैयार किया, जो Claude को कोई भी बड़ा फैसला लेने से पहले उसके नैतिक जिम्मेदारी की याद दिलाता है. आंतरिक मूल्यांकन में पाया गया कि इस प्रक्रिया से एआई के गलत या हानिकारक बिहैवियर में बहुत कमी आई है.
1893 में स्वामी विवेकानंद ने अमेरिका जाकर दुनिया को भारतीय आध्यात्मिक दर्शन से परिचित कराया था. लगभग 130 साल बाद, सिलिकॉन वैली के सबसे बड़े एआई लैब ने भारतीय वेदांत दर्शन के विद्वान को यह समझने के लिए बुलाया कि उनकी तरफ से निर्मित डिजिटल दिमाग को मानवीय और नैतिक कैसे बनाया जाए.
यह कदम दर्शाता है कि भविष्य के शक्तिशाली एआई को सुरक्षित बनाने के लिए केवल कोडिंग ही काफी नहीं है, बल्कि सदियों पुराने आध्यात्मिक और दार्शनिक ज्ञान की भी आवश्यकता है.