कभी सिटी बसों और तांगों से गुलजार था हरिद्वार-ऋषिकेश मार्ग, जानें कैसे घने जंगल का इकलौता रास्ता बन गया अपर रोड बाजार

कभी सिटी बसों और तांगों से गुलजार था हरिद्वार-ऋषिकेश मार्ग, जानें कैसे घने जंगल का इकलौता रास्ता बन गया अपर रोड बाजार


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Haridwar Rishikesh Old Route: हर की पौड़ी की घंटियों और पर्यटकों की चहल-पहल से सजा हरिद्वार का अपर रोड आज भले ही शहर का सबसे व्यस्त व्यापारिक केंद्र हो, लेकिन इसकी धड़कनों में सदियों पुराना इतिहास दर्ज है. आधुनिक चौड़े हाईवे और चमचमाते बाईपास के दौर से पहले, यह घने जंगलों से घिरा वही ऐतिहासिक ‘हरिद्वार-ऋषिकेश मार्ग’ था, जिससे होकर चारधाम यात्रा के श्रद्धालु पैदल, तांगों और लाल बसों में सवार होकर अपनी आध्यात्मिक मंजिल की ओर बढ़ते थे.

Haridwar Rishikesh Old Route: हरिद्वार का हृदय स्थल कहलाने वाला अपर रोड आज भले ही रंग-बिरंगी दुकानों और पर्यटकों की चहल-पहल से गुलजार एक प्रमुख बाजार हो, लेकिन इसका इतिहास केवल व्यापार तक सीमित नहीं है. यह मार्ग उस दौर का एकमात्र गवाह है जब यह हरिद्वार-ऋषिकेश यानी समतल को पहाड़ से जोड़ने वाला मार्ग हुआ करता था. आज अपर रोड से भीमगोड़ा, खड़खड़ी, दूधाधारी चौक तक का बाजार काफी व्यस्त बाजार है.

घने जंगलों के बीच चारधाम यात्रा का इकलौता रास्ता
यह रास्ता कभी हरिद्वार-ऋषिकेश रोड के नाम से जाना जाता था. आज के दौर में जहां पर हाईवे, आधुनिक सिक्स लेन हाईवे और बाईपास बने हैं, वहां पर पहले घना जंगल था और इस घने जंगल के बीच केवल यही एकमात्र रास्ता था जिससे तीर्थयात्री चारधाम की यात्रा के साथ पहाड़ की ओर जाया करते थे. हरिद्वार-ऋषिकेश के रास्ते की ज्यादा जानकारी करने के लिए हमने खड़खड़ी रास्ते पर व्यापारी राजीव भट्ट से बात की तो उन्होंने लोकल 18 को बताया कि पुराने समय में केवल एक सिंगल रोड हुआ करती थी जिसे हरिद्वार-रुड़की रोड के नाम से जाना जाता था.

लाल सिटी बसें, घोड़े-तांगे और पुरानी यादें
आज भी इस रोड को इसी नाम से जानते हैं. उस जमाने में हरिद्वार से पहाड़ों पर जाने के लिए कोई अन्य सड़क नहीं थी. देश के अलग-अलग राज्यों से आने वाले तीर्थयात्री हर की पौड़ी पर गंगा स्नान के बाद इसी रास्ते से दूधाधारी चौक होते हुए ऋषिकेश और पवित्र धाम की यात्रा करते थे. राजीव भट्ट ने कहा कि इस रास्ते पर पहले सिटी बसें और घोड़े-तांगे चला करते थे. समय बदलने के साथ हाईवे और आधुनिक मार्ग बन गए, जिस कारण यह प्राचीन मार्ग बाजार के रूप में बदल गया.

जीरो जोन बना प्राचीन तीर्थ पथ
भीमगोड़ा प्रदेश व्यापार मंडल के कोषाध्यक्ष व्यापारी अजय अरोड़ा बताते हैं कि हर की पौड़ी से आने वाले इस रोड को हरिद्वार-ऋषिकेश रोड कहते हैं. इस रोड पर लाल रंग की सिटी बस के साथ पूरा ट्रैफिक इसी रास्ते से जाया करता था. यह बहुत ही प्राचीन मार्ग है जो हरिद्वार को ऋषिकेश के साथ और पहाड़ों के साथ जोड़ता था. व्यापारी अजय अरोड़ा ने आगे कहा कि बाहर जाने के लिए इसके अलावा कोई दूसरा रास्ता नहीं था.

हाईवे काफी बाद में बना है. आज यह पूरा रास्ता जीरो जोन बन गया है और यहां पर कोई पार्किंग नहीं है. आज के समय में हरिद्वार-ऋषिकेश का प्राचीन रास्ता एक बड़े बाजार के रूप में तब्दील हो गया है. बुजुर्गों की यादों में यह आज भी वही पवित्र तीर्थ पथ है जो आस्था के मुसाफिरों को उनकी आध्यात्मिक मंजिल तक पहुंचाता था.



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