NASA की सैटेलाइट तस्वीरों में दिखी बिहार की बाढ़, अंतरिक्ष से दिखा 9 दिन में गंडक का बदला हुआ रूप, आखिर क्यों बदला पैटर्न?

NASA की सैटेलाइट तस्वीरों में दिखी बिहार की बाढ़, अंतरिक्ष से दिखा 9 दिन में गंडक का बदला हुआ रूप, आखिर क्यों बदला पैटर्न?


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Bihar Flood NASA Report: आम तौर पर राज्य में बाढ़ का सबसे बड़ा असर गंगा के बढ़ने के साथ दिखाई देता है, लेकिन बिहार में इस बार आई बाढ़ ने पुराने पैटर्न को बदल दिया. सितंबर के आखिरी दिनों में गंडक ने हालात को ज्यादा गंभीर बना दिया. जल संसाधन मंत्री विजय चौधरी के मुताबिक नेपाल में हुई जबरदस्त बारिश के कारण गंडक में ऐसा उफान आया कि कई जगह नदी ने अब तक के रिकॉर्ड जलस्तर को पार कर दिया. हालात में अब सुधार के संकेत हैं, लेकिन नेपाल में दोबारा बारिश हुई तो बिहार में खतरा फिर बढ़ सकता है. इस बीच नासा और नेपाल सरकार की तरफ से जो जानकारी साझा की गई है उसने बिहार की चिंता को और बढ़ा दिया है. पूरी खबर विस्तार से पढ़िये.

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NASA की सैटेलाइट तस्वीर ने खोली गंडक की बाढ़ की तस्वीर, नेपाल की बारिश से बिहार तक मचा हाहाकार (प्रतीकात्मक तस्वीर)

बिहार में सितंबर के आखिरी दिनों में आई बाढ़ को अब अंतरिक्ष से भी देखा गया है. अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी NASA ने 2 अक्टूबर को गंडक नदी की बाढ़ पर अपनी विशेष रिपोर्ट प्रकाशित की है. बिहार में इस बार की बाढ़ को लेकर नासा ने चौंकाने वाला खुलासा किया है. NASA की सैटेलाइट तस्वीरों में 20 सितंबर और 29 सितंबर के बीच गंडक नदी के फैलाव में आया बड़ा बदलाव साफ दिखाई देता है. इस बात की जानकारी साझा करते हुए जल संसाधन मंत्री विजय चौधरी ने नासा और नेपाल सरकार की रिपोर्ट के हवाले से बताया कि गंडक नदी ने इतिहास का सबसे ऊंचा जलस्तर छू लिया है. नासा के सैटेलाइट डेटा ने कंफर्म किया है कि नेपाल के देवघाट में जलस्तर 11.94 मीटर तक पहुंच गया, जो आज तक का सबसे बड़ा रिकॉर्ड है.

नासा का सैटेलाइट डेटा, 27 सितंबर को टूटा सारा रिकॉर्ड

रिपोर्ट बताती है कि नेपाल में लगातार हुई भारी बारिश के बाद गंडक ने नेपाल और भारत दोनों जगह रिकॉर्ड जलस्तर छुआ. बिहार में इस बाढ़ ने कई इलाकों में तटबंधों को तोड़ा और खेतों के साथ आबादी वाले क्षेत्रों को भी प्रभावित किया. मंत्री विजय चौधरी ने बताया कि नासा और नेपाल सरकार ने संयुक्त रिलीज जारी की है. इसके मुताबिक 27 सितंबर को देवघाट, नेपाल में गंडक नदी का जलस्तर 11.94 मीटर रिकॉर्ड किया गया. नासा के अर्थ ऑब्जरवेशन सैटेलाइट ने इस डेटा को कैप्चर किया है.

NASA की तस्वीरों में खेत और बस्तियां भी डूबी दिखीं

जानकारी के अनुसार, NASA Earth Observatory ने Terra और Aqua उपग्रहों के MODIS सेंसर से मिली तस्वीरों का इस्तेमाल किया है. इसमें साफ-साफ निष्कर्ष निकाला गया है कि इससे पहले कभी भी देवघाट में पानी इतने ऊंचे लेवल पर नहीं पहुंचा था. 20 सितंबर की तस्वीर में गंडक का सामान्य स्वरूप दिखाई देता है, जबकि 29 सितंबर की तस्वीर में नदी का फैलाव काफी ज्यादा नजर आता है. NASA के मुताबिक इन तस्वीरों में पानी को अलग पहचानने के लिए इन्फ्रारेड और दृश्य प्रकाश के आंकड़ों को मिलाकर तस्वीर तैयार की गई है. बाढ़ का पानी नीले रंग में दिखाई देता है, जबकि वनस्पति चमकीले हरे रंग में नजर आती है.

क्यों बदला बाढ़ का पैटर्न, विजय चौधरी ने समझाया

विजय चौधरी ने कहा कि पिछले दस दिनों से हम (विजय चौधरी) बाढ़ को लेकर जानकारी दे रहे हैं, लेकिन इस बार हालात दूसरे प्रकार से भयावह हुए. हर साल बाढ़ सबसे अंत में गंगा में आती है, लेकिन इस बार पैटर्न उलट गया. इस बार सबसे पहले गंडक ने कहर बरपाया. इसकी सीधी वजह नेपाल में हुई जबरदस्त बारिश है. नेपाल के पहाड़ी इलाकों में हुई मूसलाधार बारिश का सारा पानी गंडक में आ गया, जिससे नदी में ऐतिहासिक उफान आया.

बिहार में असर- तटबंध टूटे, बड़ी आबादी डूबी

नासा के इस रिकॉर्ड का असर बिहार में साफ दिखा और गंडक में आए उफान से बड़ी आबादी प्रभावित हुई. कई जिलों में आज तक के इतिहास में सबसे ऊंचे स्तर पर पानी पहुंचा. यही कारण है कि बिहार में गंडक के डाउनस्ट्रीम में कई जगहों पर उच्चतम लेवल पार हो गया और तटबंध टूट गए. गोपालगंज, सारण, मुजफ्फरपुर और वैशाली में गंडक के कारण हजारों हेक्टेयर फसल डूब गई.

फिलहाल राहत, लेकिन नासा की चेतावनी बरकरार

हालांकि, विजय चौधरी ने कहा कि आज की ताजा सूचना के मुताबिक हालात में सुधार हो रहा है. देवघाट में अब पानी घट रहा है, जिसका असर बिहार में भी दिख रहा है. लेकिन नासा और नेपाल मौसम विभाग ने चेतावनी दी है कि अगर नेपाल में फिर से बारिश हुई तो हालात फिर से खराब हो सकते हैं. इसलिए सरकार ने सभी अभियंताओं को अलर्ट पर रखा है.



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