ऊंचाई से गिरने पर शरीर के अंदर क्या बदलाव होता है? जमीन पर गिरने से बॉडी के टुकड़े कैसे हो गए?

ऊंचाई से गिरने पर शरीर के अंदर क्या बदलाव होता है? जमीन पर गिरने से बॉडी के टुकड़े कैसे हो गए?


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ऊंचाई से गिरने पर शरीर में क्या बदलाव होता है? जमीन पर गिरकर टुकड़े कैसे

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नोएडा के सेक्टर 94 की सुपरनोवा बिल्डिंग के 43वें फ्लोर से कूदकर एक शख्स ने जान दे दी. ऊंचाई से गिरने से किसी की मौत कैसे होती है? नीचे गिर रहे इंसान के शरीर में क्या बदलाव होता है? और किस वजह से शरीर कई टुकड़ों में कटकर बंट जाती है?

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सुपरनोवा बिल्डिंग हादसा

नोएडा की एक ऊंची इमारत से गिरकर एक शख्स की मौत हो गई. सेक्टर 94 की सुपरनोवा बिल्डिंग के 43वें फ्लोर से एक युवक ने कथित तौर पर छलांग लगा दी और नीचे जमीन पर गिरकर मौत हो गई. उसकी बॉडी टुकड़ों में बंट गई. हालांकि यह जानना अहम है कि ऊंचाई से गिरने से किसी की मौत कैसे होती है? नीचे गिर रहे इंसान के शरीर में क्या बदलाव होता है? और किस वजह से शरीर कई टुकड़ों में कटकर बंट जाती है जैसा कि नोएडा के युवक के केस में हुआ.

किसी बड़ी इमारत या फिर अधिक ऊंचाई से गिरने पर मौत की मुख्य वजहों में सदमा लगना और गंभीर अंदरूनी चोट शामिल हैं. अधिक हाइट से गिरने पर आमतौर पर अत्यधिक बल से लगने वाले आघात यानी कि Blunt Force Trauma और शरीर की अचानक गति रुकने यानी कि Deceleration Injury की वजह से होती है. जब कोई इंसान नीचे जमीन से टकराता है तो कुछ ही सेकंड के हिस्से में शरीर की गति जीरो हो जाती है. इससे काफी अधिक आंतरिक डैमेज होता है.

कूदने पर मौत कैसे होती है?

जब शरीर जमीन या किसी कठोर सतह से टकराता है, तो मौत के पीछे शरीर की बनावट के साथ ही साइंस के कुछ नियम भी काम करते हैं. मुख्य कारण ये होते हैं:

  1. मस्तिष्क और रीढ़ की हड्डी में गंभीर चोट: अगर सिर के बल या रीढ़ की हड्डी के बल प्रभाव पड़ता है, तो खोपड़ी की हड्डियां टूट जाती हैं और मस्तिष्क अंदरूनी रूप से गंभीर रूप से क्षतिग्रस्त हो जाता है. इससे सांस और हार्ट रेट को कंट्रोल करने वाला सिस्टम तुरंत काम करना बंद कर देता है.
  2. अंदरूनी अंगों का फटना: इंटर्नल ऑर्गन डैमैज के प्रभाव के कारण हार्ट, लंग्स, लिवर और स्प्लीन जैसे महत्वपूर्ण अंग अपनी जगह से हिलते हैं या पूरी तरह फट जाते हैं.
  3. आंतरिक हैमरेज: शरीर की मुख्य आर्टरी या धमनी या बड़े ब्लड वेसल्स के कटने/फटने से शरीर के अंदर ही कुछ ही सेकंड्स में इतना अधिक खून बह जाता है कि व्यक्ति शॉक की स्थिति में चला जाता है और उसकी तुरंत मौत हो जाती है.
  4. मल्टीपल फ्रैक्चर: पसलियां, पसलियों का सीने में चुभना, कूल्हे की हड्डी और हाथ-पैर की प्रमुख हड्डियों का चकनाचूर हो जाती है. अधिकतर मामलों में टकराने के माइक्रोसेकंड के अंदर ही चेतना चली जाती है, इसलिए इंसान को चोट का दर्द महसूस करने का समय तक नहीं मिलता है.

क्या नीचे गिरने पर शरीर टुकड़ों में बंट जाता है?
गिरने से मौत होती है लेकिन बहुत अधिक हाइट और खास कंडीशन में ही ऐसा संभव है कि शरीर के टुकड़े हो जाएं, जैसा कि नोएडा वाले हादसे में हुआ. दरअसल मानव शरीर की स्किन, मांसपेशियां और कनेक्टिव टिश्यू काफी लचीले और मजबूत होते हैं. अमूमन 4 से लेकर 10-12 मंजिल की ऊंचाई से गिरने पर हड्डियों के चकनाचूर होते हैं और आंतरिक अंग फट जाते हैं. इसके बावजूद शरीर बाहरी रूप से एक ढांचे के रूप में ही रहता है.

टुकड़ों में कैसे बंट जाता है शरीर?

  • बहुत अधिक हाइट: इमारत अगर बहुत अधिक ऊंची हो जैसे 30-40 मंजिल या उससे अधिक तो फिर शरीर टर्मिनल वेलोसिटी यानी कि करीब 190 से 200 किलोमीटर प्रति घंटा तक हासिल कर लेता है. इतनी तेज गति से ठोस कंक्रीट पर टकराने से शरीर के कुछ अंग जैसे हाथ, पैर या सिर कटकर अलग हो सकते हैं.
  • रास्ते में रुकावट: गिरते समय अगर व्यक्ति नीचे किसी बाउंड्री वॉल, लोहे की ग्रिल, तार, बिजली के केबल, बालकनी के किनारे या किसी नुकीली धारदार स्ट्रक्चर से टकराता है, तो शरीर कटकर टुकड़ों में बंट सकता है.

नोएडा में क्या हादसा हुआ?
नोएडा की सुपरनोवा बिल्डिंग में मरे युवक की शिनाख्त गुरुग्राम निवासी संभव जैन के तौर पर हुई है. मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक वह कर्ज से परेशान था. शुरुआती जांच में पिता के साथ जो चैट मिली है उसके अनुसार कर्ज से काफी तंग था और कुछ दिनों से घर से गायब भी था. पुलिस के मुताबिक युवक यहां सुपरनोवा की स्पाइरा बिल्डिंग में के एक कमरे में एक दिन के लिए स्टे करने आया था.



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