जमींदार पहले पढ़ें, फिर दूसरों को पढ़ाएं, क्या थी अंग्रेजों की यह शिक्षा नीति? जानिए डाउनवर्ड फिल्ट्रेशन का सच

जमींदार पहले पढ़ें, फिर दूसरों को पढ़ाएं, क्या थी अंग्रेजों की यह शिक्षा नीति? जानिए डाउनवर्ड फिल्ट्रेशन का सच


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Zamindar education System In British Era: आज जहां शिक्षा मुफ्त है. वहीं पुराने समय में जमींदारों को शिक्षा प्राप्त करने के लिए ‘डाउनवार्ड फिल्ट्रेशन सिस्टम’ का पालन करना पड़ता था. इस व्यवस्था के तहत जमींदार पहले खुद अंग्रेजी सीखते थे. फिर दूसरों को पढ़ाते थे. हालांकि यह प्रणाली ज्यादा सफल नहीं रही. जानें इस सिस्टम को.

British-era landlords studied via downward filtration system: आज शिक्षा के अधिकार अधिनियम के तहत लोगों को मुफ्त में शिक्षा दी जाती है. चाहे कोई अमीर वर्ग का व्यक्ति हो, कोई गरीब वर्ग का व्यक्ति हो या किसी भी जाति धर्म या मजहब का व्यक्ति हो. वह अपने और अपने बच्चों की मुक्त शिक्षा प्राप्त कर सकता है. लेकिन एक समय ऐसा भी था जब देश में अंग्रेजों का शासन हुआ करता था. उस दौरान शिक्षा इतनी आसानी से नहीं मिलती थी. उस दौर में बड़े पैमाने पर जमींदार भी हुआ करते थे. लेकिन क्या आप जानते हैं कि वह जमींदार शिक्षा कैसे प्राप्त करते थे. उन्हें पढ़ने-लिखने का अवसर कैसे दिया जाता था. किस तरीके से उसे जमाने के लोग पढ़ते थे.

जमींदारों की पढ़ाई को लेकर था यह नियम
जमींदार परिवार से ताल्लुक रखने वाले अनिल कुमार बताते हैं कि उस जमाने में जमींदारों की पढ़ाई को लेकर एक नियम बनाया गया था. अंग्रेजों के द्वारा यह नियम लाया गया था. जिसे डाउनवार्ड फिल्ट्रेशन सिस्टम कहा जाता था. अनिल कुमार बताते हैं कि इस सिस्टम के तहत यह नियम बनाया गया था कि जमींदारों को पहले अंग्रेजी विषय की शिक्षा दी जाएगी, उन्हें पढ़ाया जाएगा. फिर वह जमींदार वापस आकर अन्य लोगों को पढ़ाएंगे. इसे लेकर जमींदारों का एक दल भी जाकर गवर्नर से मिला था. हालांकि यह ज्यादा दिन तक नहीं चल सका. क्योंकि कई ऐसे जमींदार भी थे जो शिक्षा को उतना महत्व नहीं देते थे. पर उनमें से कई ऐसे भी थे जो पढ़ना-लिखना चाहते थे, और वह इसी सिस्टम के तहत पढ़ा करते थे.

शिक्षा को लेकर नहीं थी कोई जागरूकता
अनिल कुमार बताते हैं कि जो जमींदार परिवार के लोग हुआ करते थे. उस वक्त उनमें भी शिक्षा को लेकर इतनी जागरुकता देखने को नहीं मिलती थी. ज्यादातर जमींदार खेती-बाड़ी और अन्य कामों पर ही ध्यान देते थे. इसके अलावा जो लोग जमींदार नहीं थे. उन जमींदारों के अधीन हुआ करते थे, उन्हें भी शिक्षा के लिए काफी प्रयास करना पड़ता था. जमींदार परिवार के लोग ही उन्हें पढ़ाते थे. अगर ऐसा नहीं होता था तो उन्हें शिक्षा भी नहीं मिलती थी. अनिल कुमार बताते हैं कि आज के समय से उसे दौर में पढ़ाई काफी अलग हुआ करती थी. जमींदार ज्यादातर शिकार इत्यादि पर ध्यान देते थे. अगर किसी को पढ़ना होता था तो वह केवल डाउनवार्ड फिल्ट्रेशन सिस्टम के जरिए ही पढ़ा करते थे.



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