देश के सबसे बड़े पुल से जल्द फर्राटे भरेंगी गाड़ियां, फाइनल स्टेज में पहुंचा कोसी नदी पर बन रहा ब्रिज, देखें झलक

देश के सबसे बड़े पुल से जल्द फर्राटे भरेंगी गाड़ियां, फाइनल स्टेज में पहुंचा कोसी नदी पर बन रहा ब्रिज, देखें झलक


सुपौलः बिहार की कोसी नदी पर बन रहा एक महासेतु जल्द ही देश के सबसे लंबे नदी पुल का तमगा अपने नाम कर सकता है. असम में ब्रह्मपुत्र नदी पर बने 9.15 किलोमीटर लंबे भूपेन हजारिका सेतु की लंबाई को पीछे छोड़ते हुए सुपौल के बकौर से मधुबनी के भेजा के बीच बन रहा कोसी महासेतु 10.2 किलोमीटर लंबा है.

भारतमाला परियोजना के पांचवें चरण के तहत एनएच-527ए पर बन रहा यह पुल सिर्फ नदी के दो किनारों को जोड़ने वाला रास्ता नहीं है, बल्कि मिथिला, कोसी और सीमांचल के बीच संपर्क का नया रास्ता तैयार करेगा. इस परियोजना को धार्मिक कॉरिडोर के रूप में विकसित किया जा रहा है.

उच्चैठ से उग्रतारा तक बनेगा सीधा रास्ता
इस महासेतु के जरिए मधुबनी के उमगांव स्थित उच्चैठ भगवती स्थान और सहरसा के महिषी स्थित उग्रतारा स्थान को जोड़ने की योजना है. पुल के चालू होने के बाद धार्मिक पर्यटन के साथ-साथ क्षेत्रीय आवागमन को भी बड़ी गति मिलने की उम्मीद है.

इससे मधुबनी की ओर से कोसी और सीमांचल के जिलों तक पहुंच आसान होगी. साथ ही नेपाल, भूटान, बांग्लादेश और उत्तर-पूर्वी राज्यों की ओर जाने वाले मार्गों से संपर्क भी मजबूत होने की उम्मीद है.

1,199 करोड़ से तैयार हो रहा महासेतु
पूरी परियोजना की लागत करीब 1199.58 करोड़ रुपये है. इसमें 1101.99 करोड़ रुपये सिविल निर्माण कार्य पर खर्च किए जा रहे हैं. पुल का अधिकांश निर्माण कार्य पूरा हो चुका है, हालांकि अभी कुछ काम बाकी है. इस परियोजना को पहले अगस्त 2023 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया था. लेकिन कोसी की बाढ़, तकनीकी समस्याओं और कोविड-19 के कारण निर्माण कार्य प्रभावित हुआ और समयसीमा आगे बढ़ती चली गई. अब उम्मीद है कि शेष काम पूरा होने के बाद अगले साल इस महासेतु पर आवागमन शुरू हो सकता है.

सपने में भी नहीं सोचे थे कोसी पर बनेगा इतना लंबा पुल
सहरसा जिला के बराही गांव निवासी मंतोष कुमार झा बताते हैं कि इस पुल के बन जाने से सभी को फायदा होगा. खास तौर से दरभंगा-मधुबनी जाने वाले लोगों को सबसे ज्यादा फायदा होगा. वह बताते हैं कि हम लोगों ने तो कभी सपने में भी नहीं सोचा था कि कोसी नदी के पूर्वी और पश्चिमी तटबंध के बीच इतना लंबा पुल कभी बन पाएगा. वह बचपन के दिनों की याद करते हुए बताते हैं कि उनके रिश्तेदार कोसी तटबंध के पश्चिमी किनारे के गांव में रहते हैं. जब कभी वहां जाना होता था तो नदी पर नाव से पर होना पड़ता था. जल्द ही जब यह पुल बन जाएगा, तो हम लोग इसी पुल होकर अपने रिश्तेदारों के घर जाएंगे.

सिंहेश्वर निवासी सोमनाथ झा बताते हैं कि हमारा पैतृक गांव कोसी तटबंध के अंदर में ही है. हम लोग बचपन से ही पैतृक गांव जाते रहे हैं. लेकिन, नदी पर नाव से ही पार होते रहे हैं. अब कोसी नदी पर 10.2 किलोमीटर लंबा पुल बन रहा है. अब हम लोग अपने गांव आसानी से आ जा सकेंगे. वह बताते हैं कि अभी गांव जाने में लगभग 110 किलोमीटर की दूरी तय करनी पड़ जाती है, लेकिन पुल बन जाने के बाद यह दूरी मात्र 50-55 किलोमीटर ही रह जाएगी.

पुल बनने से कम हो जाएगी दूरी
पुल निर्माण का कार्य देखने आए मधेपुरा जिले के कुमारखंड प्रखंड निवासी अरविंद कुमार बताते हैं कि इस पुल के बन जाने से क्षेत्र के लोगों को काफी फायदा होगा. अभी दरभंगा, मधुबनी जाने के लिए मधेपुरा, पूर्णिया, सुपौल आदि जिले के लोगों को घूमकर जाना पड़ता है, लेकिन इस पुल के बन जाने से दूरी काफी घट जाएगी. वहीं, मर्चा गांव निवासी राजाराम यादव कहते हैं कि पुल बनने से सुविधा तो होगी, लेकिन हमारा गांव इस पुल से सटे नीचे है. इस कारण गांव में कटाव बढ़ गया है. गांव को कटाव से बचाने के लिए भी सरकार को सुरक्षात्मक उपाय करने होंगे.



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