NCERT Class 9 Social Science Syllabus: 7 महिलाओं ने 80 रुपये उधार लेकर बना दिया पापड़ का ब्रांड, छत से शुरू किया बिजनेस, अब बच्चे पढ़ेंगे इनकी कहानी

NCERT Class 9 Social Science Syllabus: 7 महिलाओं ने 80 रुपये उधार लेकर बना दिया पापड़ का ब्रांड, छत से शुरू किया बिजनेस, अब बच्चे पढ़ेंगे इनकी कहानी


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NCERT Class 9 Social Science Syllabus: एनसीईआरटी ने 9वीं कक्षा की सामाजिक विज्ञान की किताब में स्टार्टअप और उद्यमिता पर नया चैप्टर जोड़ा है. इसमें लिज्जत पापड़ और ओबेराय होटल्स की कहानियों के जरिए स्कूली बच्चों को बिजनेस के गुर सिखाए जाएंगे.

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NCERT Class 9 Social Science Syllabus: स्कूली बच्चों को बिजनेस की बारीकियां पढ़ाई जाएंगी

नई दिल्ली (NCERT Class 9 Social Science). स्कूल की किताबों में गणित, विज्ञान और इतिहास के पन्नों के बीच बिजनेस और कॉरपोरेट जगत की बातें अक्सर दूर की कौड़ी लगती थीं. लेकिन बदलते वक्त के साथ शिक्षा प्रणाली प्रैक्टिकल नॉलेज की तरफ कदम बढ़ा रही है. इसी कड़ी में एनसीईआरटी ने 9वीं के सोशल साइंस सिलेबस में एक चैप्टर जोड़ा है. अब बच्चे बिजनेस एंपायर बनाना सीखेंगे. इस चैप्टर का मकसद कम उम्र में ही बच्चों के अंदर बिजनेस के गुर, रिस्क लेने की क्षमता और स्टार्टअप की बारीकियां रोपना है.

NCERT सोशल साइंस सिलेबस को बिजनेस की मुश्किल थ्योरी या अंग्रेजी की भारी-भरकम शब्दावली से नहीं, बल्कि सच्ची कहानियों और भारतीय स्टार्टअप्स की इंस्पायरिंग यात्रा से सजाया गया है. इसमें 1959 में महज 80 रुपये के उधार और मुंबई की एक छत से शुरू हुए ‘लिज्जत पापड़’ का सफर है तो मोहन सिंह ओबेरॉय के होटल इंडस्ट्री के महारथी बनने की कहानी भी. NCERT का यह कदम छात्रों को सिर्फ नौकरी ढूंढने वाला नहीं, बल्कि नौकरियां देने वाला बनाएगा. जानिए इस नए चैप्टर में क्या पढ़ाया जाएगा.

NCERT के स्टार्टअप चैप्टर की रूपरेखा क्या है?

एनसीईआरटी की नौवीं कक्षा की सामाजिक विज्ञान की नई किताब में उद्यमिता (Entrepreneurship) को बेहद सरल और इंटरैक्टिव तरीके से समझाया गया है. इस चैप्टर को मुख्य रूप से 3 बड़े सवालों के इर्द-गिर्द बुना गया है-

  • उद्यमिता समाज और अर्थव्यवस्था को कैसे प्रभावित करती है.
  • किसी बिजनेस के मुख्य कार्यक्षेत्र (Functional Areas) क्या होते हैं.
  • प्रभावी बिजनेस प्लान कैसे तैयार किया जाता है.

कम उम्र से सीखेंगे बिजनेस स्किल्स

नई किताब के जरिए स्कूली बच्चों को बिजनेस के बेसिक पहलू (जैसे मार्केट एक्टिविटी को समझना, सही मौके की पहचान करना, अपने प्रदर्शन का आकलन करना और किसी भी रिसोर्स को लगाने से पहले उसकी योजना बनाना) सिखाए जाते हैं. खास बात है कि इसमें मॉडर्न दौर के तकनीकी बदलाव भी शामिल किए गए है. बच्चों को बताया जा रहा है कि कैसे आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) मार्केट के एनालिसिस और बिजनेस से जुड़े फैसलों में मददगार साबित हो सकता है.

भारत के स्टार्टअप बूम और प्रेरणादायक कहानियां

एनसीईआरटी की सोशल साइंस बुक में केवल थ्योरी तक सीमित न रहकर भारत के बदलते स्टार्टअप इकोसिस्टम की शानदार तस्वीर पेश की गई है. इसमें बताया गया है कि कैसे एक दशक पहले देश में केवल 350-400 स्टार्टअप हुआ करते थे, जो अब बढ़कर करीब 2.3 लाख तक पहुंच चुके हैं. आज भारत दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा स्टार्टअप इकोसिस्टम बन चुका है. सरकार की इस नीति का मुख्य उद्देश्य रिसर्च, इंडस्ट्री और स्टार्टअप्स को एक मंच पर लाना है.

बेहद खास हैं ये 2 स्टार्टअप स्टोरीज

सोशल साइंस विषय को बेहद रोचक और आसान बनाने के लिए इसमें 2 महान भारतीय उद्यमियों की सक्सेस स्टोरी जोड़ी गई है:

  • मोहन सिंह ओबेरॉय: पंजाब में जन्मे ओबेरॉय ने कभी 50 रुपये महीने की नौकरी से शुरुआत की थी. बाद में उन्होंने अपनी पत्नी के गहने गिरवी रखकर अपना पहला होटल खरीदा और देश की हॉस्पिटैलिटी इंडस्ट्री के दिग्गज बन गए.
  • लिज्जत पापड़ (Lijjat Papad): मुंबई की 7 गृहिणियों ने साल 1959 में महज 80 रुपये उधार लेकर एक छत से इसकी शुरुआत की थी. घर के कामकाज को संभालते हुए पापड़ बेलने और क्वॉलिटी और अनुशासन के दम पर उन्होंने इसे ग्लोबल ब्रांड बना दिया.



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