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Bajra Crop Residue Management Tips For Farmers: भरतपुर और आसपास के इलाकों में बाजरा कटाई का काम चल रहा है. किसानों को कटाई के बाद खेत में बचे डंठल, बूला और घास-फूस का उचित प्रबंधन जरूर करना चाहिए. अगली फसल की शानदार पैदावार के लिए खेत की साफ-सफाई करना बेहद जरूरी है. अवशेष पड़े रहने से कृषि यंत्रों के संचालन में दिक्कत आती है और खरपतवार की समस्या काफी बढ़ जाती है. किसानों को इन अवशेषों को जलाने से पूरी तरह बचना चाहिए क्योंकि इससे मिट्टी के लाभकारी जीव नष्ट हो जाते हैं. अवशेषों का पशु चारे के रूप में सही इस्तेमाल करें.
भरतपुर: भरतपुर सहित पूरे राजस्थान के ग्रामीण इलाकों में इन दिनों खरीफ सीजन की प्रमुख फसल बाजरा की कटाई का काम बड़े जोरों पर चल रहा है. किसान दिन रात एक करके अपनी फसल को समेटने में लगे हुए हैं. लेकिन फसल कटने के बाद खेतों में बड़ी मात्रा में फसल अवशेष रह जाते हैं. इनमें मुख्य रूप से बाजरा के कटे हुए कठोर डंठल, कुटा हुआ बूला, जड़ के पास बचा हुआ ठूंठ और खेत में उगी हुई तरह-तरह की घास-फूस शामिल होती है. अक्सर किसान कटाई के बाद खेत को कुछ दिनों के लिए ऐसे ही छोड़ देते हैं. लेकिन कृषि जानकारों का कहना है कि किसानों के लिए यह बेहद जरूरी है कि अगली रबी फसल की बुवाई से पहले इन तमाम अवशेषों का उचित प्रबंधन कर लें और खेत को अच्छी तरह से साफ करें.
बाजरा की कटाई के बाद खेत में बचे डंठल और अन्य अवशेष अगर लंबे समय तक पड़े रहते हैं तो यह अगली फसल की बुवाई के दौरान भारी परेशानी पैदा कर सकते हैं. खेत में अवशेष अधिक होने से सबसे बड़ी दिक्कत जुताई और बुवाई के दौरान आती है. जब किसान ट्रैक्टर और अन्य आधुनिक कृषि यंत्रों का संचालन करते हैं तो ये डंठल मशीनों में फंस जाते हैं. इससे जुताई गहरी और एक समान नहीं हो पाती है. इसके अलावा खेत में मौजूद अनावश्यक घास-फूस अगली फसल के लिए खरपतवार की गंभीर समस्या को बढ़ा सकती है. अगर खेत साफ नहीं होगा तो नई फसल के साथ पुरानी घास भी उग आएगी और वह नई फसल का सारा पोषण सोख लेगी.
चारा और अन्य कृषि उपयोग
किसान कटाई के बाद खेत की अच्छी तरह सफाई करके इन अवशेषों का सही इस्तेमाल कर सकते हैं. उपयोगी बाजरा अवशेषों को पशुओं के पौष्टिक चारे या अन्य कृषि उपयोग में आसानी से लिया जा सकता है. बाजरा का बूला गाय और भैंस के लिए बहुत अच्छा सूखा चारा माना जाता है. जबकि जो अनुपयोगी अवशेष हैं, उन्हें उचित तरीके से खेत से हटाना या उनका कंपोस्ट खाद बनाकर प्रबंधन करना सबसे बेहतर रहता है.
पराली जलाने से बचें किसान
एक बहुत ही महत्वपूर्ण बात यह है कि खेत में बचे अवशेषों को किसानों को बिना सोचे-समझे जलाने से बिल्कुल बचना चाहिए. खेत में आग लगाने से मिट्टी के अंदर मौजूद लाभकारी सूक्ष्म जीव और केंचुए जलकर नष्ट हो जाते हैं. इससे खेत की प्राकृतिक उपजाऊ क्षमता में भारी गिरावट आती है और पर्यावरण पर भी बहुत प्रतिकूल असर पड़ता है. वायु प्रदूषण के कारण गांव के लोगों को सांस लेने में भी दिक्कत का सामना करना पड़ सकता है.
अगली फसल के लिए खेत की तैयारी
कृषि विशेषज्ञों के अनुसार अगली फसल की एक शानदार और मजबूत शुरुआत के लिए खेत की सही तैयारी बेहद महत्वपूर्ण होती है. समय पर खेत से सभी अवशेष हटाने, खेत की पूरी तरह से सफाई करने और उचित व गहरी जुताई के बाद मिट्टी को बुवाई के लिए तैयार करने से अगली फसल के बीजों को एक बहुत ही बेहतर और अनुकूल वातावरण मिल सकता है. इससे नई फसल के बीजों का अंकुरण तेज होता है और फसल की शुरुआती बढ़वार अच्छी रहने में बहुत मदद मिलती है. साथ ही खेत में खरपतवार का दबाव भी काफी हद तक कम हो जाता है.
ऐसे में सभी किसानों को यह सलाह दी जाती है कि वे बाजरा की कटाई पूरी होने के बाद खेत को यूं ही खाली या लावारिस छोड़ने के बजाय समय रहते उसमें पड़े डंठल, बूला और घास-फूस का उचित प्रबंधन करना शुरू कर दें. ऐसा करने से अगली फसल की बुवाई बहुत आसानी से हो सकेगी और रबी सीजन की फसल से किसान भाई बहुत अच्छा मुनाफा कमा पाएंगे.