बाड़मेर. जहां कभी कचरे का ढेर नजर आता था वहां अब हरियाली की चादर बिछी हुई है. बाड़मेर शहर के राजकीय बालिका आदिवासी छात्रावास में शिक्षिका सीमा मीणा की पहल ने कचरा पॉइंट की तस्वीर ही बदल दी है. यहां अब करीब 1000 पौधों से तैयार ‘ऑक्सीजन पार्क’ में नीम, शीशम, गुलमोहर, मोगरा सहित कई फलदार और औषधीय पौधे लहलहा रहे हैं.
5 डिग्री तक कम रहता है तापमान
कभी कचरे की दुर्गंध से परेशान रहने वाले इस स्थान पर अब पौधों की हरियाली और फूलों की खुशबू महक रही है. इससे मई-जून की तेज धूप व गर्मी में भी यहां का तापमान में 5 डिग्री तक गिरावट रहता है. इतना ही नही यह परिसर सुबह-शाम पक्षियों की कलरव से गूंज उठता है. सीमा मीणा के साथ-साथ उनके पति करतार सिंह ने भी इसका जिम्मा उठाया है. नीम, शीशम, गुलमोहर, मोगरा, मौसमी, बादाम और केले सहित फलदार व औषधीय पौधों से सजा यह परिसर अब विद्यार्थियों के लिए प्रकृति के करीब रहने का खूबसूरत ठिकाना बन गया है.
1 हजार से अधिक पौधों से तैयार किया ऑक्सीजन पार्क
छात्रावास अधीक्षक सीमा मीणा ने लोकल18 को बताया कि पहले यहां शहर के लोग कचरा डालते थे लेकिन सरकारी सहयोग का इंतजार किए बिना ही उन्होंने अपने खुद के खर्च से इसकी सफाई करवाकर यहां पौधे लगाए गए है. वे बताती हैं कि नियमित सिंचाई, खाद-पानी व देखभाल की वजह से यहां अब हरियाली छाई हुई है. उनके मुताबिक यहां 50 विद्यार्थियों का नामांकन है जोकि इनकी देखभाल में मदद करती है.
रेगिस्तान में पौधे को जिंदा रखना बड़ी चुनौती
सीमा मीणा के मुताबिक रेगिस्तानी इलाके में पौधे लगाना जितना महत्वपूर्ण है और उन्हें जिंदा रखना उससे बड़ी चुनौती है. तेज गर्मी और पानी की कमी के बीच पौधों की नियमित देखभाल जरूरी होती है. किताबों और हॉस्टल की चारदीवारी के बीच रहने वाले बच्चों को अब अपने आसपास पेड़-पौधों की दुनिया देखने को मिलती है. इससे विद्यार्थियों को स्वच्छता, पौधारोपण और पर्यावरण संरक्षण का संदेश मुखर हो रहा है.