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Sarguja Sharu Sukti: छत्तीसगढ़ के सरगुजा जिले में आदिवासी समाज के लोग बड़ी संख्या में रहते हैं, जहां जंगल सिर्फ रोजी-रोटी का साधन नहीं बल्कि पारंपरिक खानपान संस्कृति का भी अहम हिस्सा है. यहां के ग्रामीण जंगल से शारू सुकटी तोड़कर लाते हैं, जिसे सुखाकर सुरक्षित रखते हैं और जरूरत के मुताबिक सब्जी बनाकर खाते हैं. शारू सुकटी का स्वाद टमाटर और चावल का पसिया और बढ़ा देता है, जिसे ग्रामीण बड़े चाव के साथ खाते हैं. यह पारंपरिक व्यंजन पीढ़ियों से चला आ रहा है और आसपास के ग्रामीण भी इसे पहचानते हैं.
असकरा के रामनाथ किंडो ने बताया कि शारू जंगल में प्राकृतिक रूप से मिलता है. ग्रामीण इसे जंगल से खोजकर लाते हैं और धूप में अच्छी तरह सुखाते हैं. सूखने के बाद इसे गुड़ा यानी पीसकर सुरक्षित रख लिया जाता है, ताकि बाद में भी इसका इस्तेमाल किया जा सके.
रामनाथ किंडो के अनुसार, शारू सुकटी कोई नई चीज नहीं है. गांव के लोग इसे अपने पुरखों के समय से खाते आ रहे हैं. आसपास के ग्रामीण भी इसे पहचानते हैं और अलग-अलग मौसम में अपनी पसंद के अनुसार इसका इस्तेमाल करते हैं.
शारू सुकटी को आमतौर पर तेल, लहसुन, मिर्च और टमाटर के साथ पकाया जाता है. अगर टमाटर उपलब्ध नहीं हो तो ग्रामीण इसमें पसिया डालते हैं. ग्रामीणों का कहना है कि पसिया सब्जी को गाढ़ापन देने के साथ स्वाद भी बढ़ाता है.
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ग्रामीण महिला सुखमनी ने बताया कि शारू साग को तेल में लहसुन और मिर्च के साथ भूनकर इसमें टमाटर डाला जाता है. इसके बाद थोड़ा पानी और जरूरत के अनुसार पसिया मिलाकर इसे पकाया जाता है. गर्मी के दिनों में भी पहले से सुखाकर रखी गई शारू सुकटी से सब्जी बनाई जा सकती है.
ग्रामीणों के मुताबिक, जब दूसरे शहरों से लोग सरगुजा के गांवों में आते हैं तो शारू सुकटी के बारे में जरूर पूछते हैं. उन्हें इसके बारे में बताया जाता है और कई लोग इसे चखकर पसंद भी करते हैं. जंगल से मिलने वाला यह पारंपरिक साग आज भी ग्रामीण थाली का अहम हिस्सा है.