फ्लाइट्स में तैनात होंगे स्काई मार्शल? एविएशन सिक्योरिटी का रिव्यू करेगा भारत
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फ्लाईदुबई की फ्लाइट में ओमानी को-पायलट द्वारा भारतीय पायलट सुमित मच्छार पर मिड-एयर हमले के बाद हड़कंप मच गया है. भारत सरकार ने इस गंभीर मामले को सिक्योरिटी एंगल से जांचना शुरू कर दिया है. नागर विमानन मंत्रालय पूरे एविएशन सिक्योरिटी सिस्टम का हाई लेवल रिव्यू करने की तैयारी में है. इसमें पायलटों का साइकोमेट्रिक टेस्ट और संवेदनशील रूट्स पर स्काई मार्शल्स की तैनाती जैसे कदम शामिल हो सकते हैं.
फ्लाईदुबई कॉकपिट अटैक के बाद भारत अलर्ट. (File Photo : Reuters)
नई दिल्ली: फ्लाईदुबई की फ्लाइट में भारतीय पायलट सुमित मच्छार पर हुए जानलेवा हमले ने पूरी दुनिया के एविएशन सेक्टर को हिला दिया है. तेल अवीव जा रही इस फ्लाइट में ओमानी को-पायलट ने हवा में ही पायलट-इन-कमांड पर हमला कर दिया था. इस विमान में 170 से अधिक पैसेंजर्स सवार थे. को-पायलट ने कथित तौर पर प्लेन को क्रैश कराने की कोशिश की जिससे पायलट गंभीर रूप से घायल हो गए. अब भारत सरकार इस मामले को गंभीर सिक्योरिटी थ्रेट मानकर जांच कर रही है. सिविल एविएशन सेक्रेटरी समीर सिन्हा ने कहा, ‘भारत इस मामले की पड़ताल कर रहा है और इसे सिक्योरिटी के नजरिए से देखा जा रहा है.’ उन्होंने आगे बताया कि अगर कोई एडवाइजरी जारी करने की जरूरत होगी तो उच्च स्तर पर सूचित किया जाएगा. इस घटना के बाद अब देश भर के सुरक्षा प्रोटोकॉल को नए सिरे से परखने की तैयारी शुरू हो चुकी है.
भारतीय उड़ानों में तैनात होंगे स्काई मार्शल?
इस घटना के बाद आधिकारिक सूत्रों का कहना है कि भारत में एविएशन सिक्योरिटी का गहन रिव्यू किया जाएगा. मौजूदा स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर की समीक्षा में संवेदनशील रूट्स पर स्काई मार्शल्स की तैनाती का विकल्प अहम माना जा रहा है. फ्लाइट के अंदर किसी भी तरह के हाइजैक या अप्रत्याशित खतरे से निपटने के लिए नेशनल सिक्योरिटी गार्ड यानी एनएसजी के पास स्पेशल ट्रेनिंग होती है. इसके अलावा एयरपोर्ट और एविएशन सिक्योरिटी का जिम्मा संभालने वाली सीआईएसएफ की तैयारियों को भी दोबारा परखा जाएगा.
क्या पायलटों के दिमाग की जांच का सिस्टम बदलेगा?
इस मामले ने एयरलाइंस के साइकोमेट्रिक असेसमेंट पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं. रिव्यू के दौरान यह देखा जाएगा कि क्या मौजूदा मेंटल हेल्थ टेस्ट कॉकपिट के खतरे भांपने के लिए काफी हैं. ब्यूरो ऑफ सिविल एविएशन सिक्योरिटी और डीजीसीए अपने-अपने दायरे में नए सुरक्षा नियम तय करने की तैयारी में हैं. अधिकारियों का फोकस इस बात पर है कि उड़ान के दौरान पायलटों के बर्ताव में आने वाले बदलावों को पहले ही कैसे पकड़ा जाए.
कॉकपिट के भीतर के खतरों से कैसे निपटेगा भारत?
अब तक एविएशन सिक्योरिटी का पूरा फोकस पैसेंजर्स और बाहरी खतरों पर ज्यादा रहता था. इस घटना ने साबित कर दिया है कि कॉकपिट के अंदर मौजूद क्रू मेंबर भी कभी-कभी बड़ा खतरा बन सकते हैं. भारत सरकार अब ऐसे नियम बनाने पर विचार कर रही है जिससे कॉकपिट में अकेला पायलट किसी अप्रिय घटना को अंजाम न दे सके. सुरक्षा एजेंसियां इस बात की समीक्षा कर रही हैं कि किसी भी आपात स्थिति में विमान का कंट्रोल तुरंत कैसे सुरक्षित किया जाए.
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