जहां बिजली तक नहीं थी, वीरान पड़ी थी जगह, अशोक ने यहीं खड़ी कर दी अटैची फैक्ट्री, आज लाखों का कारोबार

जहां बिजली तक नहीं थी, वीरान पड़ी थी जगह, अशोक ने यहीं खड़ी कर दी अटैची फैक्ट्री, आज लाखों का कारोबार


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Purvi Champaran Ashok Kumar Success Story: पूर्वी चंपारण के अशोक कुमार ने अटैची फैक्ट्री खोली और इसके लिए ऐसी जगह का चुनाव किया जो वीरान पड़ी रहती थी. यहां दिन में भी अंधेरा रहता था, बिजली की व्यवस्था नहीं थी और लूट-पाट की घटनाएं भी हो जाती थीं. उन्होंने न केवल इस जगह का कलेवर बदला बल्कि खुद भी एक सफल व्यवसायी बने.

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पूर्वी चंपारण/आदित्य गौरव: बिहार एक ऐसा प्रदेश है जहां से एक से बढ़कर एक सफल और जुनूनी लोगों की कहानी निकलकर सामने आती है. पूर्वी चम्पारण जिले के सुगौली के रहने वाले अशोक कुमार की कहानी भी कुछ ऐसी ही है. अशोक बताते हैं कि उन्हें शुरू से ही व्यवसाय करने का मन था. उस समय वो किसी नए तरह का व्यवसाय तलाश रहे थे. जब वो सुगौली के बाजार में दुकानदारों के पास जाते तो देखते कि वहां के दुकानदार दिल्ली से अटैची मंगाया करते हैं.

अधिक माल मंगाने के क्रम में कुछ अटैची टूट जाया करती थी और ट्रांसपोर्ट में भी अधिक खर्च करना पड़ता था. दुकानदारों ने अशोक कुमार को अटैची फैक्ट्री खोलने की सलाह दी. फिर क्या था? अशोक नए बिजनेस आइडिया की तलाश में थे ही, उन्होंने इसे खोलने की तैयारी तुरंत शुरू कर दी.

दिल्ली में समझा काम, वीरान जगह पर डाली फैक्ट्री
वे बताते हैं कि उन्हें शुरुआत में अटैची फैक्ट्री से संबंधित कोई खास जानकारी नहीं थी. इसलिए उन्हें दिल्ली जाना पड़ा. वे कई दिनों तक दिल्ली रहे और अटैची फैक्ट्री से संबंधित तमाम जानकारी इकट्ठा की. अगली चुनौती थी जगह की. अशोक बताते हैं कि उन्हें फैक्ट्री लगाने के लिए सही जगह नहीं मिली.

अंततः उन्होंने एक वीरान जगह में फैक्ट्री लगाने का फैसला किया. ये काम इतना आसान नहीं था क्योंकि इस क्षेत्र में इतने घने पेड़ थे कि दिन में भी हल्का अंधेरा रहता, सड़कें भी टूटी-फूटी थीं और कभी-कभार लूट-पाट की घटना भी हो जाया करती थी. ये जगह ऐसी थी कि यहां बिजली तक की भी व्यवस्था नहीं थी.

सफल व्यापारी के रूप में बनायी पहचान
अशोक बताते हैं कि ये समय उनके लिए काफी संघर्ष से भरा था, लेकिन उन्होंने कभी हार नहीं मानी. उन्होंने बिजली का सारा खर्च खुद ही उठाया और यहां तक कि ट्रांसफार्मर भी खुद के पैसों से लगवाया. आखिरी चुनौती थी लूट-पाट के क्षेत्र में व्यापार करना. इसके लिए अशोक ने प्रशासन से सहयोग मांगा. वे बताते हैं कि वो भाग्यशाली थे कि उन्हें प्रशासन का भरपूर सहयोग मिला. आज अशोक कुमार जिले में सफल व्यापारी के रूप में जाने जाते हैं और हर महीने उनके यहां लाखों का माल तैयार होता है.



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