दुनिया के कई शहरों के नीचे मौजूद भूजल भंडारों लगातार कम होता जा रहा है. इस घटना ने कई शहरों के ऊपर खतरा पैदा कर दिया है. इन शहरों की जमीन के नीचे जरूरत से ज्यादा पानी निकाले जाने के कारण धरती धंस रही है. जिससे तटीय शहरों पर समुद्र के बढ़ते जलस्तर का खतरा और बढ़ रहा है. भारत के मुंबई-चेन्नई, कोलकाता जैसे शहरों पर भी ये खतरा बढ़ रहा है. हालांकि, विक्टोरिया यूनिवर्सिटी ऑफ वेलिंगटन में हुई एक ताजा शोध के अनुसार भूजल भंडारों को फिर से भरने से जमीन के धंसने की प्रक्रिया को कुछ हद तक रोका जा सकता है. इस रिसर्च में यह भी सामने आया कि भूजल की तेजी से बहाली और जमीन के ऊपर उठने की प्रक्रिया में भूमिगत भ्रंश रेखाएं (फॉल्ट लाइन) महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं.
भूजल दोहन से धंस रहे शहर
भूमि का धीरे-धीरे नीचे धंसना दुनिया के कई बड़े शहरों के लिए चुनौती बन गया है. द कन्वरसेशन की रिपोर्ट बताती है कि इंडोनेशिया की राजधानी जकार्ता के कुछ हिस्से हर साल 10 सेंटीमीटर से अधिक धंस रहे हैं, जिसके कारण सरकार को शहर को स्थानांतरित करने की योजना बनानी पड़ी है. चीन के तटीय शहर तियानजिन में करीब 1.5 करोड़ लोग रहते हैं. यदि वहां जमीन के धंसने की रफ्तार इसी तरह जारी रही तो 2120 तक शहर की 15 प्रतिशत आबादी पानी की चपेट में आ सकती है. सैन डियागो से लेकर ईरान के प्रमुख शहरों तक कई जगह ऐसी ही स्थिति है, जहां भूजल का दोहन उसके प्राकृतिक रूप से दोबारा भरने की क्षमता से अधिक हो रहा है.
न्यूजीलैंड में हाल के अध्ययनों के अनुसार, देश के करीब 80 प्रतिशत शहरी तटवर्ती क्षेत्र धंस रहे हैं और क्राइस्टचर्च और वेलिंगटन सहित कुछ इलाकों में घटता भूजल इसका एक कारण हो सकता है.
भूजल कम होने पर जमीन क्यों धंसती है
कई शहर प्राकृतिक भूजल भंडारों यानी जलभृतों (एक्विफर) के ऊपर बसे हैं. इसे पानी से भरे एक विशाल गुब्बारे की तरह समझा जा सकता है. जब भूजल बाहर निकाला जाता है तो जलभृत में दबाव कम होता है और उसके ऊपर की जमीन नीचे बैठने लगती है. तटीय इलाकों में इसका असर अधिक गंभीर हो सकता है. जमीन के धंसने और समुद्र के बढ़ते जलस्तर के कारण इन शहरों में सापेक्ष समुद्र स्तर तेजी से बढ़ता है और जलवायु परिवर्तन के प्रभाव जल्द दिखाई देने लगते हैं. भूजल के अत्यधिक दोहन और जमीन के धंसने का संबंध पहले से पता है, लेकिन यह साफ नहीं था कि लंबे समय तक भूजल स्तर बढ़ने पर जमीन किस तरह प्रतिक्रिया करती है.
ओसाका बना प्रयोगशाला
शोधकर्ताओं ने जापान के ओसाका शहर को अध्ययन के लिए चुना. 1920 से 1960 के दशक के बीच भारी भूजल दोहन के कारण शहर के नीचे पानी का स्तर 30 मीटर तक गिर गया था और कुछ स्थानों पर जमीन दो मीटर से अधिक धंस गई थी. इसके बाद जापान सरकार ने 1960 के दशक की शुरुआत में भूजल दोहन पर कड़े नियम लागू किए. इसके बाद से वहां भूजल स्तर लगातार बढ़ रहा है. शोधकर्ताओं ने भूजल स्तर की निगरानी के लिए 44 कुओं के आंकड़ों का अध्ययन किया, जिनमें कुछ कुएं जमीन से 500 मीटर तक गहरे थे. उन्होंने जमीन की ऊंचाई में बेहद छोटे बदलावों को मापने के लिए उपग्रह आधारित रडार तकनीक (इन्सार) का भी इस्तेमाल किया.
नतीजे बताते हैं कि करीब 1.5 करोड़ आबादी वाले बड़े ओसाका क्षेत्र में जमीन ऊपर उठ रही है. औसतन यह बढ़ोतरी करीब चार मिलीमीटर सालाना थी, जबकि कुछ स्थानों पर यह 12 मिलीमीटर सालाना तक रही. जिन इलाकों में भूजल स्तर तेजी से बढ़ा, वहां जमीन भी तेजी से ऊपर उठी. हालांकि, जमीन के ऊपर उठने का स्वरूप पूरे शहर में एक जैसा नहीं था. कुछ स्थानों पर तेजी से जमीन ऊपर उठ रही थी, जबकि 100 मीटर से भी कम दूरी पर इसकी गति काफी कम थी.
भूजल के लिए भूमिगत ‘बांध’ का काम करती हैं भ्रंश रेखाएं
शोधकर्ताओं ने पाया कि जमीन के ऊपर उठने वाले ये क्षेत्र ज्ञात टेक्टोनिक फॉल्ट लाइनों के साथ लगभग पूरी तरह मेल खाते हैं. फॉल्ट पृथ्वी की पपड़ी में मौजूद दरारें हैं, जिन्हें आमतौर पर भूकंप से जोड़कर देखा जाता है. लेकिन शोध के अनुसार, ये भूजल के प्रवाह को भी प्रभावित कर सकती हैं. शोधकर्ताओं ने फॉल्ट की तुलना भूमिगत बांध से की है, जो जलभृत में पानी के एक ओर से दूसरी ओर जाने को रोकता है. ओसाका की उमाची फॉल्ट के एक ओर भूजल स्तर दूसरी ओर की तुलना में तीन गुना तेजी से बढ़ा. अन्य फॉल्ट के आसपास भी यही पैटर्न देखा गया. जहां फॉल्ट भूजल के प्रवाह को रोकता है, वहां पानी तेजी से जमा होता है और जमीन भी तेजी से ऊपर उठती है.
शोध के अनुसार, जिन तटीय शहरों में अत्यधिक भूजल दोहन के कारण जमीन धंस रही है, वहां भूजल का दोहन कम करना और जलभृतों को प्राकृतिक रूप से फिर से भरने देना जमीन के धंसने की प्रक्रिया को धीमा कर सकता है और कुछ स्थानों पर उसे उलट भी सकता है. समुद्र का जलस्तर लगातार बढ़ने के बीच तटीय शहरों के नीचे की जमीन को धंसने से रोकना जलवायु परिवर्तन के अनुकूलन की रणनीति का महत्वपूर्ण हिस्सा बन सकता है.