Pitru Paksha: गयाजी में अनोखी आस्था, जर्मनी-रूस-यूक्रेन की महिलाएं, संस्कृत मंत्रों से पितरों का किया पिंडदान

Pitru Paksha: गयाजी में अनोखी आस्था, जर्मनी-रूस-यूक्रेन की महिलाएं, संस्कृत मंत्रों से पितरों का किया पिंडदान


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गयाजी में अनोखी आस्था, जर्मनी-रूस-यूक्रेन की महिलाएं, पितरों का किया पिंडदान

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GayaJi Pitru Paksha Mela 2026: मोक्षदायिनी भूमि गयाजी में आयोजित पितृपक्ष मेले में सनातन संस्कृति का अलौकिक दृश्य देखने को मिला. यहां जर्मनी, रूस, यूक्रेन और घाना से आईं महिला श्रद्धालुओं ने धाराप्रवाह संस्कृत मंत्रों का पाठ करते हुए पूरे विधि-विधान से अपने पितरों के लिए पिंडदान किया. यह सनातन परंपरा की वैश्विक स्वीकार्यता दर्शाता है, जहां आत्मा की शांति के लिए कोई सीमा नहीं.

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गयाजी: भगवान विष्णु की नगरी और मोक्षदायिनी भूमि गयाजी में चल रहे विश्व प्रसिद्ध पितृपक्ष मेले के दौरान एक अद्भुत और अलौकिक आध्यात्मिक दृश्य देखने को मिला. सनातन परंपरा की महानता और इसकी वैश्विक स्वीकार्यता तब जगजाहिर हुई. जब सात समंदर पार से आईं विदेशी महिलाओं ने गयाजी के पवित्र वेदी स्थलों पर अपने पूर्वजों की आत्मा की शांति और मुक्ति के लिए पूरे विधि-विधान से पिंडदान व तर्पण किया. जर्मनी, रूस, यूक्रेन और घाना जैसे देशों से आई इन महिला श्रद्धालुओं ने पारंपरिक भारतीय परिधान धारण कर, बिना किसी चूक के, पूर्ण नियम-निष्ठा के साथ पूजा-अर्चना की. सबसे खास बात यह रही कि पंडितों के उच्चारण के साथ इन सभी विदेशी महिलाओं ने धाराप्रवाह और स्पष्ट उच्चारण में संस्कृत के कठिन मंत्रों का पाठ किया. पिंडदान की संपूर्ण प्रक्रिया के दौरान इनकी आस्था, अनुशासन और निष्ठा देखते ही बन रही थी.

देश-दुनिया से उमड़ रहा आस्था का जनसैलाब
गयाजी केवल भारत ही नहीं, बल्कि संपूर्ण विश्व के लिए आस्था का प्रमुख केंद्र बना हुआ है. यहां देश के कोने-कोने से लाखों श्रद्धालु तो पहुंच ही रहे हैं, साथ ही अमेरिका, ब्रिटेन, नेपाल, रूस, जर्मनी और अफ्रीका जैसे देशों से भी लोग अपने पूर्वजों को मुक्ति दिलाने खिंचे चले आ रहे हैं. कुछ ही दिनों पहले इस पावन भूमि पर देशभक्ति और आदर की एक भावुक मिसाल भी देखने को मिली थी.

जब जम्मू-कश्मीर में देश की रक्षा करते हुए वीरगति को प्राप्त हुए 25 वर्षीय शहीद जवान के माता-पिता ने गयाजी पहुंचकर अपने बेटे की आत्मा की शांति के लिए पिंडदान किया था. एक तरफ जहां सीमा पर सर्वोच्च बलिदान देने वाले वीर सपूत के लिए तर्पण हुआ. वहीं दूसरी तरफ सात समंदर पार से आई विदेशी महिलाओं की यह साधना यह साबित करती है कि गयाजी की मोक्षभूमि जाति, देश और सीमाओं से परे हर आत्मा को शांति प्रदान करती है.



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