हाथ में बंदूक की जगह किताबें! पूर्व माओवादी गीता नुरोटे ने पास की 10वीं, अब नर्स बनकर करना चाहती हैं सेवा

हाथ में बंदूक की जगह किताबें! पूर्व माओवादी गीता नुरोटे ने पास की 10वीं, अब नर्स बनकर करना चाहती हैं सेवा


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Maoist Geeta Nurote: छत्तीसगढ़ सरकार की पुनर्वास नीति के तहत मुख्यधारा में लौटे 6 माओवादियों ने 10वीं की परीक्षा पास की है, जिनमें बस्तर जिले के 3 माओवादी शामिल हैं. पुनर्वासित माओवादी गीता नुरोटे ने अपना अनुभव साझा किया और भविष्य की योजनाओं के बारे में बताया.

Maoist Geeta Nurote: छत्तीसगढ़ सरकार की पुनर्वास नीति के तहत मुख्यधारा में लौटे माओवादियों को कौशल प्रशिक्षण के साथ पढ़ाई से भी जोड़ा जा रहा है. इसी पहल के तहत बस्तर संभाग के 6 पुनर्वासित माओवादियों ने 10वीं की परीक्षा पास की है, जिनमें बस्तर जिले के 3 माओवादी शामिल हैं. पुनर्वासित माओवादियों को आत्मनिर्भर बनाने के लिए विभिन्न प्रकार के प्रशिक्षण दिए जा रहे हैं. इसके अतिरिक्त, जो लोग अपनी पढ़ाई जारी रखना चाहते हैं, उन्हें प्रोत्साहित किया जा रहा है. इसी क्रम में, 3 पुनर्वासित माओवादियों ने ओपन स्कूल के माध्यम से 10वीं की परीक्षा दी और सफल रहे.

गीता नुरोटे का अनुभव
10वीं की परीक्षा पास करने वाली पुनर्वासित माओवादी गीता नुरोटे ने बताया कि वह पहले माओवादी संगठन में डीवीसी पद पर थीं और डॉक्टर के रूप में काम करती थीं। उन्होंने बताया कि उनका गांव जंगल क्षेत्र में है, जहां माओवादी संगठन के लोग आते-जाते थे और बैठकें करते थे.

संगठन से जुड़ने का कारण
गीता ने बताया कि बैठकों में गरीब लोगों को उनके हक और अधिकार नहीं मिलने, जमीन अधिग्रहण और महिलाओं के साथ होने वाले अत्याचार जैसे मुद्दों पर चर्चा होती थी. उन्होंने कहा कि उन्होंने बचपन से ही ऐसी बातें सुनी थीं और कम उम्र में ही गिरफ्तार भी हुई थीं, इन्हीं कारणों से उन्होंने माओवादी संगठन से जुड़ने का फैसला किया.

पढ़ाई का जुनून
गीता ने बताया कि वह संगठन में इंसास बंदूक रखती थीं. उन्हें पहले से ही पढ़ाई का शौक था और वह पहले भी 10वीं की पढ़ाई कर रही थीं. संगठन में रहते हुए भी उन्होंने पढ़ाई जारी रखी और आत्मसमर्पण करने के बाद भी अपनी पढ़ाई नहीं छोड़ी.

परीक्षा की तैयारी
उन्होंने बताया कि आत्मसमर्पण के बाद उन्होंने अधिकारियों से 10वीं की परीक्षा देने की बात की, जिसके बाद उन्हें परीक्षा देने का अवसर मिला. परीक्षा की तैयारी में आत्मसमर्पण कर चुके चैतू दादा ने उनकी मदद की, जिन्होंने संगठन में रहते हुए शिक्षक के रूप में पढ़ाया था. गीता ने अपनी सुविधा के अनुसार विषय चुने थे, उन्हें हिंदी थोड़ा कठिन लगा जबकि गृह विज्ञान आसान लगा. उन्होंने पहले मराठी माध्यम से पढ़ाई की थी.

भविष्य की योजनाएं
गीता ने कहा कि 10वीं के बाद वह 12वीं और फिर नर्सिंग की पढ़ाई करना चाहती हैं. उनका लक्ष्य आगे लोगों की सेवा करना है.



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