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District and Sessions Judge Keshav Kaushik Gesture: दौसा में जिला एवं सैशन न्यायाधीश केशव कौशिक ने मानवीय संवेदनाओं की मिसाल पेश की. 96 वर्षीय सम्पत्ति देवी शर्मा उम्र और शारीरिक स्थिति के कारण न्यायालय की प्रथम मंजिल तक पहुंचने में असमर्थ थीं. उनकी परेशानी को देखते हुए जिला जज स्वयं कोर्ट से नीचे आए और कार में बैठी वृद्ध महिला से जरूरी औपचारिकताएं पूरी कराईं. इसके बाद उन्होंने अपने हाथों से महिला को अवार्ड राशि का चेक सौंपा. मामले में राजस्थान हाईकोर्ट की जयपुर पीठ ने 6 मई 2026 को अवार्ड पारित किया था. आदेश की पालना में दी न्यू इंडिया इंश्योरेंस कंपनी ने ब्याज सहित 8 लाख 21 हजार 67 रुपये की राशि अधिकरण में जमा कराई थी. इसी राशि को प्रार्थीगण के बचत खातों में जमा कराने की प्रक्रिया चल रही थी.
दौसा में जिला एवं सैशन न्यायाधीश केशव कौशिक ने मानवीय संवेदनाओं की मिसाल पेश की
दौसा. न्यायालयों में आमतौर पर लोग अपनी समस्याओं और मामलों के समाधान के लिए पहुंचते हैं, लेकिन दौसा में जिला एवं सैशन न्यायाधीश ने एक वृद्ध महिला की उम्र और शारीरिक स्थिति को देखते हुए मानवीय संवेदनाओं की मिसाल पेश की. 96 वर्षीय वृद्धा न्यायालय की प्रथम मंजिल पर स्थित कोर्ट में पहुंचने में असमर्थ थीं. ऐसे में जिला एवं सैशन न्यायाधीश तथा जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के अध्यक्ष केशव कौशिक स्वयं न्यायालय से नीचे आए और कार में बैठी वृद्ध महिला से आवश्यक औपचारिकताएं पूरी कराईं. इसके बाद उन्होंने अपने हाथों से वृद्ध महिला को अवार्ड राशि का चेक सौंपा.
96 वर्षीय महिला के लिए नीचे आए जिला जज
प्रार्थीगण में शामिल 96 वर्षीय सम्पत्ति देवी शर्मा पत्नी स्वर्गीय राधेश्याम शर्मा वृद्धावस्था और शारीरिक स्थिति के कारण न्यायालय की प्रथम मंजिल तक आने में असमर्थ थीं. न्यायालय में मौजूद अधिकारियों को उनकी स्थिति की जानकारी होने के बाद जिला एवं सैशन न्यायाधीश केशव कौशिक ने स्वयं नीचे आने का निर्णय लिया. जिला जज प्रथम मंजिल पर स्थित अपने न्यायालय से नीचे आए और न्यायालय परिसर में कार में बैठी वृद्ध महिला के पास पहुंचे. उन्होंने वहीं आवश्यक औपचारिकताएं पूरी करवाईं, ताकि महिला को सीढ़ियां चढ़कर न्यायालय तक आने की परेशानी न उठानी पड़े.
अपने हाथों से सौंपा अवार्ड राशि का चेक
औपचारिकताएं पूरी होने के बाद जिला एवं सैशन न्यायाधीश केशव कौशिक ने 96 वर्षीय सम्पत्ति देवी शर्मा को अवार्ड राशि का चेक अपने हाथों से प्रदान किया. इस दौरान वृद्ध महिला को न्यायालय की प्रथम मंजिल तक आने की आवश्यकता नहीं पड़ी. इस पूरे मामले को न्यायिक करुणा और मानवीय संवेदनाओं की अनुकरणीय मिसाल के तौर पर देखा जा रहा है. न्यायिक प्रक्रिया के तहत जरूरी औपचारिकताओं का पालन करते हुए वृद्ध महिला की सुविधा का भी ध्यान रखा गया.
8.21 लाख रुपये की अवार्ड राशि जमा करवाई गई थी