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PCS Aneg Singh: बचपन में पढ़ाई छूटने के बाद 7 वर्षों के बाद पढ़ाई शुरू हुई तो दो क्लास स्किप करना पड़ा. हालांकि, उसके बाद जीतोड़ मेहनत की, जहां दसवीं में करीब 80 प्रतिशत और बारहवीं में करीब 88 प्रतिशत अंक प्राप्त हुए. ग्रेजुएशन में स्टैटिक ऑनर्स में करीब 88 प्रतिशत अंक प्राप्त हुए थे. हालांकि, स्कूल की पढ़ाई अलग होती है और सिविल सर्विसेस की तैयारी की पढ़ाई अलग होती है. ऐसे में स्कूल में हमें ठीक-ठाक नंबर मिले थे. लेकिन सिविल सर्विसेस की पढ़ाई को लेकर अलग से तैयारी करनी पड़ी थी.
मिर्जापुरः उत्तर प्रदेश के मिर्जापुर जिले में तैनात एसडीएम अनेग सिंह की भी कहानी कुछ ऐसी है. आगरा जिले के रहने वाले अनेग सिंह के माता का निधन बचपन में ही हो गया था. माता के निधन होने के बाद करीब 7 साल बाद उनकी पढ़ाई शुरू हुई. दो साल उन्होंने स्किप किया, जिसके बाद जीतोड़ मेहनत की. जीतोड़ मेहनत का फल यह हुआ कि 2023 में उन्होंने पहले प्रयास में यूपीपीसीएस (UPPCS) की परीक्षा क्वालिफाई की और अब बतौर एसडीएम अपनी सेवाएं दे रहे हैं. एसडीएम बनने के बाद उनके कामों की भी खूब तारीफ की जाती है. यही वजह है कि लगातार जनमानस के बीच में सुर्खियों में बने रहते हैं.
चुनार में बतौर एसडीएम दे रहे हैं सेवा
चुनार एसडीएम अनेग कुमार सिंह ने बताया कि बचपन में पढ़ाई छूटने के बाद 7 वर्षों के बाद पढ़ाई शुरू हुई तो दो क्लास स्किप करना पड़ा. हालांकि, उसके बाद जीतोड़ मेहनत की, जहां दसवीं में करीब 80 प्रतिशत और बारहवीं में करीब 88 प्रतिशत अंक प्राप्त हुए. ग्रेजुएशन में स्टैटिक ऑनर्स में करीब 88 प्रतिशत अंक प्राप्त हुए थे. हालांकि, स्कूल की पढ़ाई अलग होती है और सिविल सर्विसेस की तैयारी की पढ़ाई अलग होती है. ऐसे में स्कूल में हमें ठीक-ठाक नंबर मिले थे. लेकिन सिविल सर्विसेस की पढ़ाई को लेकर अलग से तैयारी करनी पड़ी थी.
पहले प्रयास में मिली सफलता
अनेग सिंह ने बताया कि सिविल सर्विसेस की तैयारी के लिए उन्होंने जनरल स्टडीज़ की पढ़ाई के लिए कोई भी कोचिंग नहीं लिया था. जियोग्राफी की पढ़ाई को लेकर उन्होंने एक कोचिंग लिया हुआ था, बाकी उन्होंने खुद से ही तैयारी की. प्री निकलने के बाद मेन्स के लिए भी उन्होंने कुछ विषयों के लिए कोचिंग लिया था, जिसके बाद इंटरव्यू देकर उन्हें सफलता मिला और पहले ही प्रयाद में अफसर बन गए.
सोशल मीडिया से बनाकर रखें दूरी
तैयारी को लेकर उन्होंने कहा कि अगर जो बच्चे सोशल मीडिया चला रहे हैं. ऐसे में जब एग्जाम नजदीक है तो उन्हें सोशल मीडिया से दूरी बना लेनी चाहिए. क्योंकि, सोशल मीडिया एक ऐसी चीज है, जिसका लत लग जाता है. अगर आप एक बार कोई भी चीज देखना शुरू कर देते हैं तो घंटों-घंटों तक आप देखते रहते हैं. समय कब बीत जाता है, पता नहीं चलता. ऐसे में अगर आप तैयारी कर रहे हैं तो मेरी सलाह है कि सोशल मीडिया से दूरी बनाकर रखें.
खुला रहता है न्याय का दरवाजा
अनेग सिंह ने बताया कि बतौर अधिकारी हमारी ये मंशा रहती है कि समस्याओं को सुलझाने पर काम किया जाए. कई बार गांव में देखते हैं कि छोटे-छोटे जमीन को लेकर भी विवाद होते हैं. भाई का भाई से विवाद होता है, उसमें बस मौके पर जाकर चीजों को समझना रहता है और निस्तारण करना रहता है. अभी हमारी सबसे पहली पोस्टिंग कासगंज में बतौर फील्ड अफसर के तौर पर हुई थी, इसके बाद मिर्जापुर जिले में मड़िहान तहसील में काम किया. मड़िहान के बाद अब चुनार तहसील में हैं, यहां पर भी हम काफी समय से काम कर रहे हैं. हमारी एक मंशा है कि जो भी व्यक्ति आए, उसके लिए न्याय का दरवाजा खुला हो. हमारे पास आ रहा है तो उसे न्याय जरूर मिले.