अमेरिका के हमले के बाद जब ईरान के ताबड़तोड़ जवाबी एक्शन लिया तो ग्लोबल लेवल पर खलबली मच गई. ट्रंप आर्मी के भी हाथ-पांव फूलते नजर आए. अमेरिका ने भी भविष्य में ऐसे खतरों से निपटने के लिए अपनी चाल चल दी है. पेंटागन ने आने वाले खतरनाक युद्धों से निपटने के लिए एक ऐसा मास्टरप्लान तैयार किया है जो पूरी वॉरफेयर की परिभाषा ही बदल देगा. इसका नाम है ‘प्रोजेक्ट मेरिडियन’. सबसे बड़ा सरप्राइज यह है कि ट्रंप प्रशासन ने इसकी कमान सीधे तौर पर दुनिया के सबसे बड़े टेक जीनियस और स्पेसएक्स के बॉस एलन मस्क के साथ-साथ एंड्रिल के फाउंडर पामर लकी को सौंपी है. रक्षा सचिव पीट हेगसेथ ने साफ कर दिया है कि अब अमेरिका भविष्य की जंगों के लिए सिर्फ कागजी योजनाएं नहीं बनाएगा बल्कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, रोबोटिक्स और अत्याधुनिक हथियारों की दुनिया में ऐसा दबदबा बनाएगा जिससे दुश्मन थर-थर कांपें.
आखिर प्रोजेक्ट मेरिडियन है क्या?
प्रोजेक्ट मेरिडियन को भविष्य के युद्ध की रिसर्च पहल समझिए. अमेरिकी रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ ने इसे शुरू करते हुए कहा कि इसका फोकस नई नीति लिखना नहीं है. इसका मकसद उन क्षेत्रों और क्षमताओं की पहचान करना है जिन पर अमेरिका को आगे काम करना होगा. यानी सवाल सिर्फ यह नहीं है कि आज दुश्मन के पास क्या है. सवाल यह भी है कि कल की जंग में क्या काम आएगा.
मस्क की एंट्री क्यों खास है?
इस प्रोजेक्ट में एलन मस्क की मौजूदगी इसे काफी हाई-प्रोफाइल बनाती है. मस्क की कंपनी स्पेसएक्स पहले से अमेरिकी राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े अंतरिक्ष अभियानों में बड़ी भूमिका निभाती है. उनके साथ एंडुरिल के संस्थापक पाल्मर लकी भी होंगे. एंडुरिल सैन्य तकनीक और स्वायत्त प्रणालियों पर काम करती है. न्यूट गिंगरिच अमेरिकी राजनीति के अनुभवी नेता हैं. तीनों अलग-अलग क्षेत्रों का अनुभव लेकर इस पहल में आए हैं.
किन तकनीकों पर रहेगी नजर?
प्रोजेक्ट मेरिडियन का दायरा काफी बड़ा है. इसमें कृत्रिम बुद्धिमत्ता, स्वायत्त तकनीक, निर्देशित ऊर्जा, रोबोटिक्स और जैव तकनीक शामिल हैं. पेंटागन का मानना है कि इन क्षेत्रों में तेज विकास युद्ध का स्वरूप बदल सकता है. इसका मतलब भविष्य की जंग में इंसान अकेला मैदान में नहीं होगा. ड्रोन, रोबोट, स्वायत्त सिस्टम और एआई आधारित तकनीकें बड़ी भूमिका निभा सकती हैं.
भविष्य के युद्धक्षेत्र का नक्शा तैयार होगा
प्रोजेक्ट का एक अहम काम भविष्य के युद्धक्षेत्रों की दिशा समझना है. टीम यह देखेगी कि आने वाले समय में अमेरिका को किन क्षमताओं की कमी हो सकती है. इसके बाद उन कमियों को दूर करने के लिए व्यावहारिक समाधान सुझाए जाएंगे. मकसद तकनीक को सिर्फ विकसित करना नहीं है. उसे टेस्ट करके जरूरत पड़ने पर सैन्य इस्तेमाल तक पहुंचाना भी है.
पेंटागन के बाहर के एक्सपर्ट भी जुड़ेंगे
यह पहल सिर्फ सैन्य अधिकारियों तक सीमित नहीं रहेगी. इसमें तकनीक विशेषज्ञ, कारोबारी, नीति विशेषज्ञ और राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े लोग शामिल होंगे. पेंटागन के मुख्य तकनीकी अधिकारी एमिल माइकल इस प्रक्रिया को आगे बढ़ाने में मदद करेंगे. संयुक्त स्टाफ और सैन्य सेवाओं की भविष्य की रिसर्च को भी इससे जोड़ने की योजना है.
120 दिन में आएगी रिपोर्ट
प्रोजेक्ट मेरिडियन को काम पूरा करने के लिए 120 दिन दिए गए हैं. रिपोर्ट की तय समयसीमा 28 जनवरी 2027 है. इसके नतीजों का सार्वजनिक संस्करण जारी किया जाएगा. इसके साथ एक गोपनीय रिपोर्ट भी तैयार होगी. यानी दुनिया को कुछ जानकारी मिलेगी. लेकिन संवेदनशील सैन्य हिस्से सार्वजनिक नहीं किए जाएंगे.
असली गेम क्या है?
सीधी भाषा में समझें तो अमेरिका भविष्य की जंग के लिए अभी से होमवर्क कर रहा है. एआई से लेकर रोबोटिक्स तक कई तकनीकें तेजी से बदल रही हैं. ऐसे में सैन्य ताकत सिर्फ टैंक और मिसाइलों से तय नहीं होगी. डेटा, स्वायत्त सिस्टम, अंतरिक्ष तकनीक और नई ऊर्जा प्रणालियां भी अहम हो सकती हैं. प्रोजेक्ट मेरिडियन इसी बदलती तस्वीर को समझने की अमेरिकी कोशिश है. इसका असली असर रिपोर्ट आने के बाद ही साफ होगा.