वॉटर एप्पल की तुड़ाई से पहले किसान जरूर कर लें यह काम, गहरा होगा फलों का रंग, कीट-पतंग भी रहेंगे दूर

वॉटर एप्पल की तुड़ाई से पहले किसान जरूर कर लें यह काम, गहरा होगा फलों का रंग, कीट-पतंग भी रहेंगे दूर


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पश्चिम चंपारण में वॉटर एप्पल की तुड़ाई नवंबर में होगी. किसान रविकांत पांडे के अनुसार, अक्टूबर में सिंचाई पर नियंत्रण रखें और तुड़ाई से 10 दिन पहले पानी बंद कर दें. पौधों में पोटाश और कैल्शियम डालें. कीटों से बचाव के लिए नीम तेल का छिड़काव और फ्रूट बैगिंग करें. इससे फल रसीले, मीठे और गहरे रंग के होंगे.

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पश्चिम चंपारणः ज़िले में इन दिनों वॉटर एप्पल की बागवानी व्यवसायिक स्तर पर हो रही है. बगहा 02 प्रखंड स्थित मंगलपुर निवासी कृषक कल्याण शुक्ला और मझौलिया प्रखंड निवासी कृषक रविकांत पांडे ने इस फल की सफल बागवानी की है. उनका कहना है कि नवंबर महीना इसकी हार्वेस्टिंग का मुख्य समय होता है, इसलिए इसके पहले के दिनों में किसान यदि कुछ बातों का ध्यान रखते हैं, तो फलों का विकास बेहतर, रंग गहरा और स्वाद में अधिक मिठास आ सकती है.

फलों की तुड़ाई से पहले कर लें यह काम
रविकांत बताते हैं कि नवंबर की तुड़ाई से कम से कम एक महीने पहले पौधों में सिंचाई की प्रक्रिया को नियंत्रित करना होगा. दरअसल, फलों की तुड़ाई से पहले की इस अवस्था में पौधों को अधिक पानी की जरूरत नहीं होती है. जरूरत से अधिक पानी फलों के स्वाद को फीका और उनकी बनावट को बिगाड़ सकता है. पानी से लबरेज होने पर फल फटना शुरू कर सकते हैं, जिससे उनमें कीड़ों का प्रकोप हो सकता है.

पोषक तत्वों का प्रबंधन है अनिवार्य
फलों की तुड़ाई से दस दिन पहले सिंचाई को पूरी तरह बंद कर देना चाहिए. इससे उनमें रस और मिठास की स्थिति बनी रहेगी. बकौल रविकांत, अक्टूबर का महीना पौधों और फलों के लिए बेहद अहम होता है, इसलिए इस वक्त पोषक तत्वों का प्रबंधन अनिवार्य है. खासकर पोटाश और कैल्शियम जैसे तत्व फलों के उचित माने जाते हैं, क्योंकि पोटाश उनकी मिठास को बरकरार रखता है और कैल्शियम उन्हें फटने से बचाकर सॉलिड बनाता है.

कीट पतंगों से बचाव
नवंबर में कीट पतंगों का आतंक बहुत बढ़ जाता है, इसलिए फलों की सुरक्षा के लिए पेड़ों पर फ्लाई कैचर या फलों में बैगिंग की व्यवस्था कर लेनी चाहिए. नीम का तेल या अन्य नेचुरल पेस्टीसाइड का स्प्रे भी फलों से कीट पतंगों को दूर रखने में मददगार साबित हो सकते हैं. इसके अतिरिक्त पेड़ों की कैनोपी यदि अधिक घनी हो गई है, तो समय पर उनकी प्रूनिंग कर लेनी चाहिए. इससे फलों को पर्याप्त मात्रा में धूप मिल सकेगी .

पौष्टिक और दुर्लभ फल
रविकांत बताते हैं कि वॉटर एप्पल को सफेद जामुन/जावा एप्पल, वैक्स एप्पल/सफेद जामुन इत्यादि नामों से भी जाना जाता है. ज़िले में इनकी बागवानी गिने चुने किसानों द्वारा ही की जाती है, जिनमें खुद रविकांत और बगहा के कल्याण शुक्ला शामिल हैं. कृषक के साथ न्यूट्रीशनल वैल्यू एक्सपर्ट होने के नाते रविकांत बताते हैं कि सफेद जामुन न केवल अपने स्वाद के लिए जाना जाता है, बल्कि ये हमारे सेहत के लिए भी बेहद फायदेमंद होता है. इसमें एंटीऑक्सीडेंट जैसे गुण पाए जाते हैं, जो अंदरूनी अंगों को जवान रखने के साथ त्वचा की खूबसूरती और पाचन में सहायक होते हैं.



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