पाकिस्तानी सेना और उसके चीफ असीम मुनीर का गंदा खेल एक बार फिर पूरी दुनिया के सामने तार-तार हो गया है. कंगाली के कगार पर खड़ा पाकिस्तान अब ईरान में भटक रहे गरीब और बेरोजगार अफगान युवाओं को ‘रक्तबीज’ की तरह बटोर रहा है. उन्हें महीने के 300 डॉलर देने और दफ्तर में नौकरी का झांसा दिया जाता है, लेकिन हकीकत में उन्हें इस्लामाबाद और पेशावर के आतंकी कैंपों में ले जाकर AK-47 और रॉकेट लॉन्चर थमा दिए जाते हैं. इसके बाद पाकिस्तानी फौज खुद बाड़ काटकर इन बेकसूरों को आतंकवाद में धकेल रही है, इन लोगों ने सरेंडर कर दिया है और दुनिया के सामने पाकिस्तान के आतंकी नेटवर्क की बखिया उधेड़ कर रख दी.
न्यूज18 के हाथ लगे पाकिस्तान के ‘रक्तबीज’ के 4 कबूलनामे
न्यूज18 के हाथ लगे इन एक्सक्लूसिव इकबालिया वीडियो से साबित हो गया है कि कैसे पाकिस्तान की सरजमीं पर ISIS और ‘शार-ओ-फसाद’ जैसे आतंकी गुटों को तैयार किया जा रहा है. ये पूरा मामला अफगानिस्तान के नूरिस्तान प्रांत के कामदेश जिले का है. डूरंड लाइन पार कर अफगान सीमा में घुसे आतंकियों पर अफगान सुरक्षा और रक्षा बलों ने तगड़ा अटैक किया.
अफगानिस्तान के रक्षा मंत्रालय के मुताबिक, इस बड़े मिलिट्री ऑपरेशन में अफगान बलों ने 41 आतंकियों को ढेर कर दिया, जबकि 62 आतंकियों को जिंदा गिरफ्तार कर लिया. अफगान रक्षा मंत्रालय ने चेतावनी दी है कि देश की सुरक्षा से खिलवाड़ करने वाले किसी भी शख्स को बख्शा नहीं जाएगा. अगर पाकिस्तान ने दोबारा ऐसी आतंकी हरकत की, तो उसे इससे भी ज्यादा भयानक अंजाम भुगतना पड़ेगा.
इकबालिया बयान 1: ‘पाकिस्तानी फौज ने दी थी कलाई घड़ी, हमने नहीं चलाई गोली’
पकड़े गए एक लड़ाके ने खुलासा किया कि उसके ग्रुप की कमान कमांडर अजीज के हाथ में थी, जिसके पास करीब 50 लड़ाके थे. जब अफगान अधिकारियों ने उससे पूछा कि ‘तुम्हें ये कलाई घड़ी किसने दी थी’? तो उसने बिना झिझक जवाब दिया, ‘पाकिस्तानी सेना ने’.
उसने बताया, ‘पाकिस्तानी फौज ने हमसे कहा था कि जाओ और अफगानिस्तान में जाकर मुजाहिदीन से लड़ो. लेकिन हमने लड़ने से साफ मना कर दिया. हमने अफगान बलों पर एक भी गोली नहीं चलाई. कमांडर अजीज हमें अपने साथ खींचना चाहता था, लेकिन हमने कह दिया कि हम जंग नहीं चाहते और सरेंडर करेंगे’.
इकबालिया बयान 2: नसरुल्ला का सच- ‘ईरान से लाया गया, पैसे का वादा निकला झूठा’
दूसरा पकड़ा गया आतंकी नसरुल्ला है, जो मूल रूप से ईरान के कोर प्रांत का रहने वाला है. नसरुल्ला ने कैमरे पर रोते हुए बताया, ‘मुझे पैसे देने का लालच देकर ईरान से पाकिस्तान लाया गया था. लेकिन मुझे एक भी रुपया नहीं मिला. उल्टा ट्रेनिंग देने के बाद हाथ में बंदूक थमाकर पाकिस्तान-अफगानिस्तान सीमा पर धकेल दिया गया. मेरे हाथ में हथियार जरूर था, लेकिन मैंने एक भी फायर नहीं किया. इसके बाद इस्लामिक इमारात के जवानों ने मुझे गिरफ्तार कर लिया’.
इकबालिया बयान 3: सबूर की आपबीती- ‘पेड़ के नीचे 3 घंटे तक सरेंडर की मांगी दुआ’
तीसरे आतंकी सबूर की कहानी भी नसरुल्ला जैसी ही है. वो भी ईरान के कोर प्रांत से था और सरहदों को पार करके इस्लामाबाद पहुंचा था.
सबूर ने बताया: ‘मैं इस्लामाबाद आया, वहां एक दिन रुका और नमाज पढ़ी. तीन दिन बाद मेरे दो दोस्त मुझे हथियार देकर सीमा की तरफ ले गए. मैं 13 लोगों के ग्रुप के साथ सरपोल में था. जब दोनों तरफ से गोलीबारी शुरू हुई, तो मैं लड़ना नहीं चाहता था. अफगान सैनिक करीब तीन घंटे तक लड़ते रहे और मैं तीन घंटे तक एक पेड़ के नीचे छिपा रहा. मैं सिर्फ यही दुआ कर रहा था कि किसी तरह जिंदा सरेंडर कर सकूं. आखिरकार उन्होंने मुझे हिरासत में ले लिया’.
इकबालिया बयान 4: जावेद का एक्सक्लूसिव खुलासा, $300 का चकमा, ‘जाहिद’ कैंप और मुनीर के ट्रकों का सच
सबसे चौंकाने वाला और बयान जावेद नाम के आतंकी ने दिया है. जावेद, अब्दुल हकीम का बेटा और मोहम्मद उमर का पोता है. वो फरिया प्रांत के कैसार जिले के खाजीकांति गांव का रहने वाला है. जावेद के बयान ने पाकिस्तानी सेना की ट्रेनिंग से लेकर बॉर्डर पार कराने तक की पूरी पोल खोल दी.
- 300 डॉलर का लालच: जावेद ईरान में था, तब मूसा नाम के शख्स ने फोन किया. उसने कहा कि डॉ जिया के ‘जभ-ए-आजादी’ ऑफिस में काम करने के 300 डॉलर मिलेंगे.
- चाबहार से इस्लामाबाद: जावेद, उसके पिता अब्दुल हमिद समेत 4 लोगों को ईरानी कार में चाबहार ले जाया गया. चाबहार बॉर्डर पर नदी किनारे मुजीब नाम का पाकिस्तानी मिला. मुजीब उन्हें पाकिस्तान ले गया, जहां लगभग 100 लोग जमा थे. वहां से उन्हें इस्लामाबाद के ‘जाहिद कैंप’ लाया गया, जहां वे डेढ़ महीने रहे.
- पेशावर और ‘अब्दुल्लाह’ ट्रेनिंग कैंप: इसके बाद 40-45 लोगों के बैच को पेशावर के कैंप भेजा गया. फिर उन्हें ‘अब्दुल्लाह’ कैंप में 15 दिन रखा गया. वहां 7 दिन कलाश्निकोव, रॉकेट लॉन्चर, गोलियां और पीके चलाने की भारी ट्रेनिंग दी गई.
- पाकिस्तानी ट्रेनर: जावेद ने साफ कहा कि ट्रेनिंग देने वाले सभी लोग पाकिस्तानी, पश्तून और उर्दू बोलने वाले थे. उनमें एक भी अफगान ट्रेनर नहीं था.
- ‘नवीद’ कैंप और फौज के ट्रक: ट्रेनिंग के बाद उन्हें जाहिद कैंप के पास ‘नवीद’ कैंप में 15 दिन रखा गया. इसके बाद पाकिस्तानी सेना के बड़े-बड़े ट्रकों में भरकर उन्हें चित्राल लाया गया. चित्राल से पैदल चलकर वे सरखाज पहुंचे.
- बाड़ काटकर सीमा पार कराई: सरखाज में राशन बांटा गया और फिर पाकिस्तानी सेना ने बाड़ में रास्ता खोलकर उन्हें अफगानिस्तान की सीमा में धकेल दिया. पाकिस्तानियों ने उन्हें एयर और ग्राउंड सपोर्ट देने का खोखला वादा भी किया था.
- 11 घंटे चली जंग: सुबह 7 बजे से शाम 6 बजे तक चली खूनी जंग में जावेद के कई साथी मारे गए और बाकी ने सरेंडर कर दिया.
बिछड़े बाप-बेटे की दर्दनाक कहानी और नौजवानों को संदेश
जावेद ने एक बेहद दर्दनाक बात बताई. उसके पिता पूर्व अफगान सैनिक थे, जो सत्ता बदलने के बाद ईरान भाग गए थे. जाहिद कैंप और जंग के मैदान में जावेद ने अचानक अपने पिता को देखा, जो उसी कैंप में ट्रेनिंग ले रहे थे. उसके पिता ने भी सरेंडर कर दिया, लेकिन उसके बाद से वो बिछड़ गए और जावेद को नहीं पता कि उसके पिता कहां हैं.
जावेद ने रोते हुए दुनिया के युवाओं से अपील की ‘पाकिस्तानी आकाओं के झूठे वादों में कभी न फंसें. ये पैसों और नौकरी के नाम पर सिर्फ सफेद झूठ बोलते हैं. ये हमारे नौजवानों को भटकाकर मौत के कुएं में ढकेल रहे हैं. अपने मुल्क में काम और सुरक्षा दोनों है, इन दरिंदों के चक्कर में अपनी जिंदगी बर्बाद मत करो’.
बेनकाब हुआ पाकिस्तान का ‘प्रॉक्सी वॉर’
न्यूज18 की इस एक्सक्लूसिव रिपोर्ट और चारों आतंकियों के कबूलनामे ने ये साबित कर दिया है कि पाकिस्तानी आर्मी चीफ जनरल असीम मुनीर किस तरह किराए के लड़ाकों के दम पर पड़ोसी मुल्कों में तबाही फैलाने का गंदा खेल खेल रहे हैं. ‘जाहिद’, ‘अब्दुल्लाह’ और ‘नवीद’ जैसे सैन्य ठिकानों के नाम पब्लिक होना अंतरराष्ट्रीय स्तर पर इस्लामाबाद के चेहरे पर पड़ा सबसे बड़ा तमाचा है.