ऐप खोलो, डॉक्टर बुलाओ, मगर घर पर मरीज की हालत बिगड़ी तो… मेडिकल संगठन की डराने वाली चेतावनी

ऐप खोलो, डॉक्टर बुलाओ, मगर घर पर मरीज की हालत बिगड़ी तो… मेडिकल संगठन की डराने वाली चेतावनी


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ऐप खोलो, डॉक्टर बुलाओ, मगर हालत बिगड़ी तो… मेडिकल संगठन की डराने वाली चेतावनी

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Online Doctor Booking Safety Concern: ऑनलाइन ऐप से घर पर डॉक्टर बुलाने की सुविधा को लेकर FAIMA ने आगाह किया है. संगठन के चीफ एडवाइजर डॉक्टर बिभु आनंद ने कहा कि घर पर मरीज की गंभीरता का सही आकलन हमेशा संभव नहीं होता. उन्होंने बेड पर पड़े और अस्पताल नहीं पहुंच पाने वाले मरीजों के लिए होम विजिट को जरूरी बताया. सामान्य मामलों में क्लिनिक या अस्पताल जाने की सलाह दी.

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डॉक्‍टर के संगठनों ने चेताया. (AI Image)

ऑनलाइन ऐप से डॉक्टर को घर बुलाना अब काफी आसान हो गया है. कुछ प्लेटफॉर्म एक क्लिक पर डॉक्टर की बुकिंग की सुविधा दे रहे हैं. लेकिन इस सुविधा के साथ मरीज की सुरक्षा और डॉक्टर की जिम्मेदारी को लेकर सवाल उठ रहे हैं. फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया मेडिकल एसोसिएशन (FAIMA) ने डॉक्टरों को इस ट्रेंड को लेकर आगाह किया है. FAIMA के चीफ एडवाइजर डॉक्टर बिभु आनंद ने कहा कि डॉक्टर मरीज की गंभीरता का ऑनलाइन सही आकलन नहीं कर सकते. उन्होंने डॉक्टरों से अपील की कि जरूरत होने पर मरीज को क्लिनिक या अस्पताल ले जाना ज्यादा सुरक्षित विकल्प हो सकता है.

‘एक क्लिक पर डॉक्टर घर पहुंचना समाधान नहीं’
डॉक्टर बिभु आनंद के मुताबिक ऑनलाइन बुकिंग के बाद डॉक्टर मरीज के घर पहुंचता है. वहां मरीज की वास्तविक स्थिति का आकलन करना मुश्किल हो सकता है. बाहर से मरीज सामान्य दिख सकता है. अंदर से उसकी हालत गंभीर हो सकती है. ऐसी स्थिति में अचानक मरीज की हालत बिगड़ने पर डॉक्टर के लिए उसे संभालना मुश्किल हो सकता है. FAIMA का कहना है कि इससे डॉक्टर और मरीज दोनों की सुरक्षा प्रभावित हो सकती है.

बेड पर पड़े मरीजों के लिए अलग स्थिति
FAIMA ने साफ किया है कि वह हर तरह की होम विजिट के खिलाफ नहीं है. बेड पर पड़े मरीजों या अस्पताल तक पहुंचने में असमर्थ लोगों को डॉक्टर की जरूरत होती है. ऐसे मामलों में घर जाकर इलाज करना जरूरी हो सकता है. संगठन की चिंता सामान्य मरीजों को लेकर है. ऐसे मरीज जिन्हें आसानी से क्लिनिक या अस्पताल ले जाया जा सकता है. डॉक्टर आनंद ने अस्पताल और क्लिनिक की व्यवस्था को भी अहम बताया. उनके मुताबिक अस्पताल में डॉक्टर के साथ पूरी मेडिकल टीम मौजूद रहती है. जरूरत पड़ने पर जांच और दूसरी सुविधाएं भी तुरंत उपलब्ध होती हैं. घर पर डॉक्टर के पास यह पूरा सेटअप नहीं होता. अचानक गंभीर स्थिति बनने पर यही अंतर बड़ा हो सकता है.

‘ऑनलाइन कंसल्टेशन टू-डायमेंशनल है’
FAIMA ने ऑनलाइन और आमने-सामने इलाज के बीच अंतर बताया है. डॉक्टर आनंद के मुताबिक ऑनलाइन कंसल्टेशन सीमित जानकारी पर आधारित होता है. अस्पताल में मरीज की जांच ज्यादा व्यापक तरीके से हो सकती है. इसलिए उन्होंने इसे टू-डायमेंशनल और अस्पताल विजिट को थ्री-डायमेंशनल अनुभव बताया. उनका कहना है कि मरीज को जरूरत के हिसाब से सही मेडिकल सेटिंग चुननी चाहिए. FAIMA के मुताबिक इस तरह की डॉक्टर बुकिंग सेवाएं देने वाले करीब चार-पांच ऐप काम कर रहे हैं. संगठन ने फिलहाल मेडिकल फ्रेटरनिटी को जागरूक करने की पहल की है. FAIMA का कहना है कि आगे इसके लिए कुछ स्पष्ट मानक तय किए जाने चाहिए. जरूरत पड़ने पर सरकार से भी इस मुद्दे पर बातचीत की जा सकती है.

डॉक्टर की सुरक्षा के साथ मरीज की सेफ्टी भी जरूरी
FAIMA ने अपने ओपन लेटर में डॉक्टर की सुरक्षा, मरीज की सुरक्षा और डॉक्टर-मरीज संबंधों को अहम बताया है. संगठन का कहना है कि मेडिकल प्रोफेशन को ऐसी व्यवस्था की जरूरत है जिसमें सुविधा के साथ सुरक्षा भी बनी रहे. इसका उद्देश्य डॉक्टरों को डराना नहीं बल्कि उन्हें संभावित जोखिमों के बारे में जागरूक करना है.



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