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Lal Bahadur Shastri Jayanti 2026: देश के प्रधानमंत्री के पास अपनी कार खरीदने के लिए भी पूरी रकम नहीं थी.12 हजार रुपये की फिएट कार खरीदने के लिए लाल बहादुर शास्त्री के बैंक खाते में सिर्फ 7 हजार रुपये थे, इसलिए उन्हें बाकी 5 हजार रुपये का बैंक लोन लेना पड़ा.उनकी मृत्यु के बाद उनकी पत्नी ललिता देवी ने पेंशन के पैसों से यह कर्ज चुकाया.यही नहीं बचपन में पिता को खोने से लेकर गर्मी में नंगे पैर स्कूल जाने और महज 16 साल की उम्र में पढ़ाई छोड़कर आजादी की लड़ाई में शामिल होने तक शास्त्री जी का जीवन संघर्ष और सादगी से भरा रहा. 2 अक्टूबर को उनकी 122वीं जयंती है.आइए जानते हैं उनके जीवन से जुड़े किस्से…
Lal Bahadur Shastri Interesting Facts: लाल बहादुर शास्त्री के किस्से.
Lal Bahadur Shastri Jayanti 2026: भारत के दूसरे प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री का नाम आते ही सबसे पहले उनकी सादगी, ईमानदारी और ‘जय जवान-जय किसान’ का नारा याद आता है लेकिन उनकी जिंदगी की कहानी सिर्फ प्रधानमंत्री बनने या 1965 के युद्ध के दौरान देश का नेतृत्व करने तक सीमित नहीं है.एक समय ऐसा भी था जब परिवार की जरूरत पर कार खरीदने के लिए उन्होंने बैंक से 5,000 रुपये का लोन लिया और उनकी मृत्यु के बाद उनकी पत्नी ललिता देवी ने पेंशन के पैसों से यह कर्ज चुकाया. एक ऐसा व्यक्ति जिसने बचपन में पिता को खो दिया.
गरीबी में पढ़ाई की.गर्मी में नंगे पैर स्कूल गया. महज 16 साल की उम्र में पढ़ाई छोड़कर स्वतंत्रता आंदोलन का रास्ता चुना और ब्रिटिश जेलों में करीब सात साल बिताए.आगे चलकर देश का प्रधानमंत्री बना. रेल मंत्री रहते हुए एक बड़े रेल हादसे की नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए इस्तीफा देना भी उनके सार्वजनिक जीवन की बड़ी मिसालों में गिना जाता है. 2 अक्टूबर को देश लाल बहादुर शास्त्री की 122वीं जयंती है.आइए उनकी जिंदगी से जुड़े ऐसे तथ्य जानते हैं जो उनके संघर्ष, सादगी और मजबूत इरादों की कहानी बताते हैं.
डेढ़ साल की उम्र में पिता को खो दिया
लाल बहादुर शास्त्री का जन्म 2 अक्टूबर 1904 को उत्तर प्रदेश के वाराणसी से करीब सात मील दूर स्थित छोटे से रेलवे कस्बे मुगलसराय में हुआ था.उनके पिता स्कूल शिक्षक थे.जब लाल बहादुर महज डेढ़ साल के थे तभी उनके पिता का निधन हो गया.उस समय उनकी मां की उम्र करीब 20 साल थी. पति को खोने के बाद उन्होंने अपने तीनों बच्चों को संभाला और अपने पिता के घर जाकर रहने लगीं. परिवार की आर्थिक स्थिति आसान नहीं थी, लेकिन इसी माहौल में लाल बहादुर का बचपन आगे बढ़ा.
चाचा के घर रहकर पढ़ाई की, गर्मी में नंगे पैर स्कूल जाते थे
बचपन में उन्हें आगे की पढ़ाई के लिए वाराणसी में अपने चाचा के साथ रहना पड़ा. उस समय संसाधन बहुत सीमित थे.कहा जाता है कि गर्मियों में तपती सड़कों पर वह बिना जूतों के कई किलोमीटर पैदल चलकर स्कूल जाते थे.यही संघर्ष उनके जीवन का हिस्सा बना रहा. साधारण परिस्थितियों में पले-बढ़े लाल बहादुर आगे चलकर देश के सर्वोच्च राजनीतिक पद तक पहुंचे, लेकिन उनकी सादगी उनके जीवन के आखिरी समय तक बनी रही.
पढ़ाई छोड़ी और आजादी की लड़ाई में उतर गए
लाल बहादुर शास्त्री के मन में देश की आजादी को लेकर विचार बहुत कम उम्र में आने लगे थे. पीएम इंडिया के आधिकारिक रिकॉर्ड के मुताबिक करीब 11 साल की उम्र में ही वह राष्ट्रीय आंदोलन से प्रभावित हो चुके थे.जब महात्मा गांधी ने असहयोग आंदोलन में शामिल होने का आह्वान किया तब लाल बहादुर की उम्र सिर्फ 16 साल थी.उन्होंने अपनी पढ़ाई छोड़कर आंदोलन में शामिल होने का फैसला कर लिया. परिवार के लिए यह फैसला आसान नहीं था. उनकी मां और दूसरे लोग उन्हें रोकना चाहते थे लेकिन लाल बहादुर अपना मन बना चुके थे. उनके करीबियों को मालूम था कि एक बार वह कोई फैसला कर लें तो पीछे हटना उनकी आदत नहीं थी.