India Aviation Rule Pakistani Pilot : पाकिस्तानी पायलटों को लेकर क्या है भारत का प्रोटोकॉल? एक लूपहोल लेकिन घुसा तो फंस जाएगा

India Aviation Rule Pakistani Pilot : पाकिस्तानी पायलटों को लेकर क्या है भारत का प्रोटोकॉल? एक लूपहोल लेकिन घुसा तो फंस जाएगा


दुबई से इजराइल जा रही फ्लाईदुबई की फ्लाइट में जो हुआ, उसने पूरी दुनिया को सन्न कर दिया. ओमानी को-पायलट ने 174 बेकसूर यात्रियों की जान खतरे में डाल दी, सिर्फ इसलिए क्योंकि दोनों देशों में दुश्मनी है. इस हादसे के बाद अब भारत में भी सवाल उठ रह हैं कि क्या किसी विदेशी एयरलाइन में काम करने वाला पाकिस्तानी पायलट भारत के लिए फ्लाइट उड़ा सकता है? भारत के एयरस्पेस नियमों में कागजी तौर पर एक छोटा सा लूपहोल जरूर नजर आता है, लेकिन सच्चाई ये है कि अगर कोई भी पाकिस्तानी पायलट इस रास्ते भारत की सीमा में घुसने की कोशिश करेगा, तो इमिग्रेशन और कानूनों के जाल में ऐसा फंसेगा कि उसका बचना नामुमकिन हो जाएगा.

कॉकपिट में वो 30 सेकंड का खौफ: फ्लाईदुबई में क्या हुआ था?

30 सितंबर को फ्लाईदुबई की फ्लाइट FZ1073 ने दुबई से इजराइल के तेल अवीव शहर के लिए उड़ान भरी थी. कॉकपिट में भारतीय मूल के कैप्टन स्मित मछार और ओमान के रहने वाले एक को-पायलट मौजूद थे. उड़ान के दौरान अचानक ओमानी को-पायलट ने कैप्टन पर हमला कर दिया.

इस हमले के बाद प्लेन का संतुलन बिगड़ गया और वह 30 सेकंड में लगभग 14,000 फीट नीचे आ गिरा. खुशकिस्मती से स्मित मछार ने कॉकपिट का दरवाजा खोल दिया था और प्लेन में मौजूद यात्रियों और क्रू मेंबर्स ने हिम्मत दिखाकर को-पायलट को काबू में कर लिया. उसी फ्लाइट में यात्री के रूप में सफर कर रहे फ्लाईदुबई के दो अन्य ऑफ-ड्यूटी पायलटों की मदद से विमान को सुरक्षित रूप से सऊदी अरब में लैंड कराया गया. बाद में सभी 174 यात्रियों को दूसरी फ्लाइट से इजराइल भेजा गया.

इजराइल के सख्त नियम और ओमान से जुड़ा विवाद

इस हादसे के बाद इजराइल में एक बड़ा कानूनी और रेगुलेटरी सवाल खड़ा हो गया है. क्या एक ओमानी नागरिक को यूएई और इजराइल के बीच की फ्लाइट उड़ाने की इजाजत होनी चाहिए थी?

  • कूटनीतिक रिश्तों की शर्त: इजराइल की परिवहन मंत्री मिरी रेगेव ने इस बात की जांच के आदेश दिए हैं कि क्या फ्लाईदुबई ने दोनों देशों के बीच हुए विमानन समझौते का पालन किया था या नहीं.
  • पासपोर्ट का नियम: मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, इजराइल और यूएई के समझौते में एक साफ शर्त है कि इजराइल जाने वाले विमानों के पायलटों के पास उन्हीं देशों का पासपोर्ट होना चाहिए जिनके इजराइल के साथ औपचारिक डिप्लोमैटिक संबंध हैं.
  • ओमान के साथ संबंध नहीं: ओमान के इजराइल के साथ कूटनीतिक रिश्ते नहीं हैं, इसलिए ओमानी पायलट का उस फ्लाइट में होना इजराइली नियमों और सुरक्षा प्रोटोकॉल का सीधा उल्लंघन माना जा रहा है.

क्या पाकिस्तानी पायलट भारत के लिए फ्लाइट उड़ा सकता है?

भारत की स्थिति और नियम इजराइल से काफी अलग हैं. भारत में किसी पायलट के उड़ने का फैसला दो अलग-अलग चीजों पर निर्भर करता है, पहला, एयरस्पेस बैन और दूसरा, इमिग्रेशन या वीजा नियम.

भारत ने पाकिस्तान के खिलाफ एयरस्पेस प्रतिबंध (NOTAM) लगाया हुआ है. स नियम में साफ लिखा है कि पाकिस्तान में रजिस्टर्ड कोई भी प्लेन भारतीय एयरस्पेस का इस्तेमाल नहीं कर सकता. इसके अलावा, पाकिस्तानी एयरलाइंस की अपनी, किराए पर ली गई या उनके द्वारा चलाई जाने वाली कोई भी फ्लाइट भारत के ऊपर से उड़ान नहीं भर सकती.

पाबंदी विमान और कंपनी पर है: भारत ने अपना आसमान पाकिस्तान के विमानों और पाकिस्तान की एयरलाइंस के लिए बंद किया है.

पायलट की नागरिकता का जिक्र नहीं: एयरस्पेस बैन वाले इस लिखित नियम में सीधे तौर पर ये कहीं नहीं लिखा है कि किसी विदेशी प्लेन को सिर्फ इसलिए भारतीय एयरस्पेस में आने से रोक दिया जाएगा क्योंकि उसे उड़ाने वाला पायलट पाकिस्तानी नागरिक है.

एयरलाइन नौकरी का वो लूपहोल

अगर कोई पाकिस्तानी नागरिक यूएई, कतर या यूरोप की किसी एयरलाइन में नौकरी करता है. उसके पास प्लेन उड़ाने के सभी जरूरी इंटरनेशनल लाइसेंस और क्लीयरेंस मौजूद हैं. अगर वो एयरलाइन भारत के लिए फ्लाइट चलाती है और वो प्लेन पाकिस्तान में रजिस्टर्ड नहीं है तो केवल एयरस्पेस बैन का नियम उस प्लेन को भारत के ऊपर से गुजरने या लैंड करने से सीधे तौर पर नहीं रोकता.

लेकिन बात यहीं खत्म नहीं होती! सिर्फ एयरस्पेस बैन से बचना ही काफी नहीं है, असली पेंच इमिग्रेशन और सुरक्षा क्लीयरेंस में फंसता है.

वीजा और इमिग्रेशन में फंस जाएगा

एयरस्पेस नियम भले ही प्लेन को रोकने का सीधा आदेश न दे, लेकिन एक पाकिस्तानी पायलट का भारत की धरती पर उतरना या भारतीय सीमा में फ्लाइट लेकर आना प्रैक्टिकली लगभग असंभव है. इसकी सबसे बड़ी वजह है भारत के सख्त वीजा और इमिग्रेशन कानून.

22 अप्रैल 2025 को हुए पहलगाम आतंकी हमले के बाद भारत सरकार ने पाकिस्तान के खिलाफ कई सख्त कूटनीतिक और डिफेंसिव कदम उठाए थे.

  1. वीजा सेवाओं पर रोक: भारत ने 24 अप्रैल 2025 से पाकिस्तानी नागरिकों के लिए अपनी सभी वीजा सेवाएं निलंबित कर दी थीं.
  2. पुराने वीजा रद्द: 27 अप्रैल 2025 से पहले से जारी किए गए पाकिस्तानी नागरिकों के वीजा भी रद्द कर दिए गए.
  3. सार्क (SAARC) वीजा छूट खत्म: पाकिस्तानी नागरिकों के लिए सार्क वीजा छूट योजना के तहत यात्रा करने पर पूरी तरह रोक लगा दी गई.

जब भी कोई विदेशी एयरलाइन का पायलट भारत में प्लेन लेकर आता है, तो उसे भारत सरकार से ‘क्रू वीजा’, इमिग्रेशन क्लीयरेंस और सुरक्षा जांच से गुजरना पड़ता है. मौजूदा नियमों के तहत, किसी भी पाकिस्तानी नागरिक को भारतीय वीजा या क्रू-एंट्री क्लीयरेंस नहीं मिल सकता.

एयरस्पेस नियम और इमिग्रेशन कानून का फर्क

  • एयरस्पेस बैन (विमान का नियम): ये नियम प्लेन और एयरलाइन की कंपनी को देखता है. अगर प्लेन किसी विदेशी एयरलाइन जैसे फ्लाईदुबई या एमिरेट्स का है, तो एयरस्पेस नियम के तहत उस प्लेन को रोका नहीं जा सकता.
  • इमिग्रेशन कानून (पायलट का नियम): ये नियम इंसान यानी पायलट को देखता है. भले ही प्लेन किसी विदेशी कंपनी का हो, लेकिन अगर पायलट पाकिस्तानी पासपोर्ट होल्डर है, तो उसे भारत का वीजा और क्रू क्लीयरेंस नहीं मिलेगा.

यानी अगर कोई विदेशी एयरलाइन किसी पाकिस्तानी पायलट को भारत जाने वाली फ्लाइट पर ड्यूटी दे भी देती है, तो इमिग्रेशन और सुरक्षा नियमों की वजह से वो पायलट भारत में फ्लाइट नहीं ला पाएगा.

बदल सकते हैं एविएशन के नियम

फ्लाईदुबई की घटना के बाद दुनिया भर की नागरिक उड्डयन एजेंसियां बेहद सतर्क हो गई हैं. इजराइल में जहां अब एयरलाइंस के पायलटों के पासपोर्ट और उनकी नागरिकता की गहन जांच हो रही है, वहीं भारत में सुरक्षा एजेंसियां पहले से ही पाकिस्तानी नागरिकों को लेकर बेहद सख्त रुख अपनाए हुए हैं.

भले ही भारत के एयरस्पेस बैन के कागजी शब्दों में केवल एयरक्राफ्ट और एयरलाइन ऑपरेटर पर पाबंदी की बात लिखी हो, लेकिन जमीनी सच्चाई यही है कि इमिग्रेशन, वीजा और सुरक्षा क्लीयरेंस के कड़े नियमों के कारण कोई भी पाकिस्तानी पायलट भारत आने वाली फ्लाइट को नहीं उड़ा सकता.



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