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एयरपोर्ट पर जल्द फुल बॉडी स्कैनर लगाए जाएंगे. देश के 8 एयरपोर्ट पर इन मशीनों को लगाने की तैयारी है, जिनमें 3 जगह मशीनें पहुंच चुकी हैं. सरकार के मुताबिक, स्कैनर में यात्रियों की असली तस्वीर नहीं दिखेगी, बल्कि शरीर का एक सामान्य मॉडल नजर आएगा. ऐसे में सवाल है कि संदिग्ध वस्तुओं की पहचान कैसे होगी और यात्रियों की प्राइवेसी कैसे सुरक्षित रहेगी?
एयरपोर्ट पर लगने वाला है फुल बॉडी स्कैनर. (AI Image)
एयरपोर्ट पर यात्रियों की सुरक्षा जांच का तरीका बदलने की तैयारी है. देश के 8 एयरपोर्ट पर फुल बॉडी स्कैनर लगाए जाएंगे. इनमें से 3 एयरपोर्ट पर मशीनें पहुंच चुकी हैं, जबकि बाकी 5 एयरपोर्ट पर इन्हें जल्द लगाने की योजना है. इन मशीनों से जुड़े डेटा को इकट्ठा किया जा रहा है और उसका विश्लेषण भी हो रहा है. इस तकनीक का मकसद यात्रियों की सुरक्षा जांच को बेहतर बनाना है. हालांकि, इसके साथ यह सवाल भी अहम है कि शरीर की जांच के दौरान यात्रियों की निजी जानकारी कैसे सुरक्षित रखी जाएगी.
फुल बॉडी स्कैनर को लेकर सबसे बड़ी चिंता प्राइवेसी की है. सरकार की ओर से बताया गया है कि ये स्कैनर तस्वीर पर निर्भर नहीं होंगे. इसका मतलब है कि स्क्रीन पर यात्री की असली तस्वीर नहीं दिखाई जाएगी. इसके बजाय शरीर का एक सामान्य मॉडल नजर आएगा. इससे सुरक्षा कर्मचारियों को यात्री की पहचान या शरीर की वास्तविक तस्वीर देखे बिना जांच करने में मदद मिलेगी. इस व्यवस्था का उद्देश्य सुरक्षा जांच और यात्रियों की निजता के बीच संतुलन बनाए रखना है.
शरीर पर संदिग्ध चीज हुई तो स्क्रीन पर मिलेगी जानकारी
इन स्कैनरों का काम शरीर पर मौजूद हर चीज की तस्वीर दिखाना नहीं, बल्कि संदिग्ध या असामान्य वस्तु की पहचान में मदद करना होगा. स्क्रीन पर शरीर के मॉडल के उस हिस्से की जानकारी दिखाई देगी, जहां कोई संदिग्ध वस्तु मिलने की आशंका होगी. इसके बाद सुरक्षा कर्मचारी जरूरत के मुताबिक आगे की जांच कर सकेंगे. यानी मशीन का इस्तेमाल सुरक्षा जांच में मदद के लिए किया जाएगा. हालांकि, किसी वस्तु को संदिग्ध मानने के बाद जांच की प्रक्रिया क्या होगी, इसका संचालन संबंधित सुरक्षा नियमों के तहत किया जाएगा.
कपड़ों और आम इस्तेमाल की वस्तुओं का डेटा होगा शामिल
स्कैनर के एल्गोरिदम को तैयार करने के लिए भारतीयों के आम पहनावे और रोजमर्रा में इस्तेमाल होने वाली वस्तुओं से जुड़ा डेटा भी शामिल किया जा रहा है. इसका उद्देश्य सामान्य वस्तुओं और संदिग्ध वस्तुओं के बीच अंतर पहचानने में मशीन की मदद करना है. उदाहरण के लिए, कपड़ों या सामान्य इस्तेमाल की किसी वस्तु को गलत तरीके से संदिग्ध मानने की आशंका कम करने के लिए सिस्टम को प्रशिक्षित किया जाएगा. इस डेटा का विश्लेषण इसलिए भी अहम है, ताकि तकनीक भारतीय यात्रियों के पहनावे और सामान्य आदतों के अनुरूप काम कर सके.
फ्लाईदुबई की घटना के बाद सुरक्षा व्यवस्था की समीक्षा
नागरिक उड्डयन मंत्रालय के मुताबिक, फ्लाईदुबई से जुड़ी घटना के बाद पैदा हुई स्थिति को देखते हुए भारत सुरक्षा के पहलुओं पर काम कर रहा है. मामले की जांच की जा रही है और जरूरत के मुताबिक सुरक्षा व्यवस्था की समीक्षा भी हो रही है. नागरिक उड्डयन सचिव समीर सिन्हा ने कहा कि यदि किसी एडवाइजरी की जरूरत होती है, तो इसकी जानकारी उच्च अधिकारियों को दी जाएगी. उनके मुताबिक, इस मामले में नीति के स्तर पर भी काम किया जा रहा है. हालांकि, उपलब्ध जानकारी से यह स्पष्ट नहीं होता कि फुल बॉडी स्कैनर लगाने का फैसला सीधे इसी घटना के कारण लिया गया है या यह अलग सुरक्षा योजना का हिस्सा है.