कॉकपिट में हर समय दो लोगों का होना क्यों जरूरी? आखिर क्यों बदल गए फ्लाइट उड़ाने के नियम

कॉकपिट में हर समय दो लोगों का होना क्यों जरूरी? आखिर क्यों बदल गए फ्लाइट उड़ाने के नियम


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कॉकपिट में हर समय दो लोगों का होना क्यों जरूरी? क्यों बदले फ्लाइट उड़ान के रूल

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इजरायल यात्रियों वाले फ्लाइट की हाईजैकिंग या क्रैश की कोशिश के बीच कई सवाल खड़े हुए हैं. कॉमर्शियल फ्लाइट्स के दौरान कॉकपिट में कम से कम दो क्रू मेंबर्स का रहना क्यों जरूरी है? एविएशन के इतिहास के कई ऐसे दर्दनाक हादसे रहे हैं, जिन्होंने फ्लाइट संबंधी रेगुलेशन्स को इस सुरक्षा नियम को सख्त बनाने पर मजबूर किया है.

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फोटो (रॉयटर्स)

फ्लाईदुबई की फ्लाइट में हुए हादसे के बाद से कई सारे सवाल उठने लगे हैं. इजरायल जा रहे विमान के कॉकपिट में हाथापाई हुई और ओमान के को-पायलट ने भारतीय जाबांज पायलट स्मित माच्छर पर हमला कर दिया. लेकिन स्मित की बहादुरी से क्रैश या हाईजैक की कोशिश नाकाम हो गई. इसके बाद कई रूल्स पर ध्यान भी जा रहा है. इसी में से एक सवाल है कि कॉमर्शियल फ्लाइट्स के दौरान कॉकपिट में कम से कम दो क्रू मेंबर्स का रहना क्यों जरूरी है? एविएशन के इतिहास के कई ऐसे दर्दनाक हादसे रहे हैं, जिन्होंने फ्लाइट संबंधी रेगुलेशन्स को इस सुरक्षा नियम को सख्त बनाने पर मजबूर किया है.

सुरक्षा को लेकर दुनिया भर में कड़े नियम लागू हैं. इनमें से एक सबसे महत्वपूर्ण है- टू पर्सन कॉकपिट रूल. इसके तहत उड़ान के दौरान हर समय कॉकपिट के अंदर कम से कम दो क्रू सदस्यों का मौजूद होना जरूरी होता है. अगर मुख्य पायलट या को-पायलट में से कोई एक इंसान किसी भी वजह से जैसे वॉशरूम जाने के लिए कॉकपिट से बाहर निकलता है, तो उसकी जगह एक केबिन क्रू को अस्थायी रूप से कॉकपिट के अंदर भेजा जाता है. इनमें एयर होस्टेस या फ्लाइट अटेंडेंट हो सकते हैं.

इस नियम की जरूरत क्यों पड़ी?
आधुनिक विमानों में सुरक्षा और बैकअप के सिस्टम को सबसे प्राथमिक माना जाता है. इस रूल के लागू होने के पीछे तीन अहम फैक्टर हैं.

  • पायलट को अचानक दिक्कत: अगर उड़ान के दौरान अकेला पायलट अचानक बेहोश हो जाए या उसकी तबीयत बिगड़ जाए, तो बाहर से कॉकपिट का दरवाजा नहीं खोला जा सकता. ऐसे में दूसरा सदस्य अंदर मौजूद रहकर दरवाजा खोल सकता है या आपातकालीन स्थिति में रेडियो संदेश भेज सकता है.
  • आत्मघाती कदम पर रोक: अकेले पायलट की तरफ से जानबूझकर विमान को दुर्घटनाग्रस्त करने या गलत नीयत से लॉक करने जैसी घटनाओं को रोकने के लिए दूसरा व्यक्ति निगरानी के तौर पर काम करता है.
  • कॉकपिट डोर लॉकिंग सिस्टम: 9/11 के आतंकवादी हमलों के बाद, विमानों के कॉकपिट दरवाजों को बुलेटप्रूफ और अंदर से पूरी तरह से लॉक होने वाला बनाया गया, जिससे कि कोई आतंकवादी अंदर ना आ सके. हालांकि इस सिस्टम ने एक नया जोखिम पैदा कर दिया. अगर अंदर मौजूद अकेला पायलट दरवाजा लॉक कर दे, तो बाहर मौजूद पायलट भी अंदर नहीं आ सकता है.

किन हादसों से बदल गया नियम?

  1. जर्मनविंग्स फ्लाइट 9525: 24 मार्च 2015 को वह घटना हुई जिसके बाद दुनिया भर की एयरलाइंस ने ‘टू-पर्सन कॉकपिट’ नियम को तुरंत अनिवार्य कर दिया. लुफ्थांसा की सहायक कंपनी जर्मनविंग्स का एक विमान स्पेन के बार्सिलोना से जर्मनी के डसेलडोर्फ जा रहा था. मेन पायलट जब कॉकपिट से बाहर वॉशरूम गया तो 27 साल के को-पायलट अंद्रेआस लुबित्ज ने अंदर से दरवाजा लॉक कर लिया. डिप्रेशन से जूझ रहे लुबित्ज ने जानबूझकर विमान को फ्रेंच आल्प्स की पहाड़ियों से टकरा दिया. नतीजा ये हुआ कि विमान में सवार सभी 150 पैसेंजर्स और क्रू मेंबर्स की मौत हो गई. मेन पायलट ने कुल्हाड़ी और इमर्जेंसी कोड से दरवाजा तोड़ने की कोशिश की, लेकिन मजबूत सुरक्षा दरवाजे की वजह से वह अंदर नहीं पहुंच सका.
  2. मोजाम्बिक एयरलाइंस फ्लाइट 470: मोजाम्बिक से अंगोला जा रहा विमान नामीबिया के नेशनल पार्क में दुर्घटनाग्रस्त हो गया. 29 नवंबर 2013 के दिन जब को-पायलट वॉशरूम गया, तब कैप्टन हेर्मिनियो दो सान्तोस फर्नांडीस ने कॉकपिट को अंदर से लॉक कर लिया. उसने ऑटोपायलट सेटिंग्स को बदलकर फ्लाइट को तेजी से नीचे की ओर मोड़ दिया. को-पायलट के बार बार दरवाजा खटखटाने के बावजूद उसने दरवाजा नहीं खोला. इस हादसे में 33 लोगों की जान चली गई.
  3. सिल्क एयर फ्लाइट 185 और इजिप्ट एयर फ्लाइट 990: साल 1997 और 1999 की इन दो हादसों में भी जांच एजेंसियों ने पाया कि कॉकपिट में एक पायलट की मौजूदगी और उसकी तरफ से लिए गए आत्मघाती फैसले ही दुर्घटना का कारण बने थे. इसके बाद पायलट्स के मानसिक हेल्थ टेस्ट और कॉकपिट एक्सेस नियमों को समीक्षा के दायरे में लाया गया.

जर्मनविंग्स वाले हादसे के फौरन बाद यूरोपियन यूनियन एविएशन सेफ्टी एजेंसी (EASA) और अमेरिकी फेडरल एविएशन एडमिनिस्ट्रेशन (FAA) ने सभी कमर्शियल फ्लाइट्स में Rule of Two यानी दो लोगों के नियम का अनुपालन करने की सिफारिश जारी की. भारत के DGCA ने भी भारतीय एविएशन कंपनियों के लिए कॉकपिट में हर समय दो क्रू सदस्यों की मौजूदगी जरूरी कर रखी है.

फ्लाइट इंडस्ट्री ने बीते दशकों में अपनी गलतियों और हादसों से सीख लेकर सुरक्षा के स्टैंडर्ड को लगातार सख्त बनाया है. ‘टू-पर्सन कॉकपिट रूल’ यह सुनिश्चित करता है कि तकनीक कितनी भी एडवांस क्यों ना हो जाए, इंसान की गलतियों या फिर गलत इरादों को रोकने के लिए कॉकपिट में हमेशा एक एक्स्ट्रा शख्स मौजूद रहे.



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