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इंडोनेशिया, थाईलैंड और म्यांमार से भारत में विदेशी सुपारी की अवैध तस्करी और काले धन के बड़े सिंडिकेट पर ईडी ने जोरदार प्रहार किया है. जांच एजेंसी ने असम और पश्चिम बंगाल के 16 ठिकानों पर एक साथ सर्च ऑपरेशन शुरू किया. यह कार्रवाई सिलीगुड़ी के ट्रांसपोर्टर धीरज घोष, बिनॉय बर्मन, संदीप बैद, कारोबारी नवरतन बैद और गुवाहाटी की कई लॉजिस्टिक्स कंपनियों पर केंद्रित रही.
सुपारी तस्करी सिंडिकेट पर ED ने अपना शिकंजा कस लिया है. (फाइल फोटो)
केंद्रीय जांच एजेंसी ईडी यानी प्रवर्तन निदेशालय (ED) के गुवाहाटी जोनल ऑफिस ने विदेशी मूल की सुपारी की कथित तस्करी से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में असम और पश्चिम बंगाल में 16 ठिकानों पर सर्च ऑपरेशन शुरू किया है. ED की कार्रवाई उस कथित सिंडिकेट के खिलाफ है, जो भारत-म्यांमार सीमा के जरिए विदेशी मूल की सुपारी की तस्करी करने के आरोपों में जांच के दायरे में है.
ED के अधिकारियों ने सिलिगुड़ी के ट्रांसपोर्टर धीरज घोष और उनके सहयोगियों बिनॉय बर्मन और संदीप बैद से जुड़े परिसरों की तलाशी ली है.इसके अलावा गुवाहाटी की लॉजिस्टिक्स कंपनियों जय करणी ट्रेडिंग्स प्राइवेट लिमिटेड और पूर्वोत्तर एग्रो प्राइवेट लिमिटेड, कारोबारी नवरतन बैद समेत अन्य लोगों से जुड़े ठिकानों पर भी कार्रवाई की जा रही है.
11 FIR के आधार पर ED की जांच
असम और पश्चिम बंगाल पुलिस की ओर से IPC/BNS और NDPS Act के तहत दर्ज 11 FIRs के आधार पर ED ने मनी लॉन्ड्रिंग की जांच शुरू की थी. जांच के मुताबिक कथित सिंडिकेट इंडोनेशिया, थाईलैंड और म्यांमार से विदेशी सुपारी भारत में लाता था. सुपारी की खेप म्यांमार के रास्ते मिजोरम पहुंचाई जाती थी और इसके बाद पश्चिम बंगाल, बिहार, उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र समेत कई राज्यों में भेजी जाती थी. एजेंसी के अनुसार, कथित तौर पर तस्करी के लिए फर्जी GST इनवॉयस, नकली ई-वे बिल और जाली ट्रांजिट दस्तावेजों का इस्तेमाल किया गया.
3 जुलाई को भी हुई थी ED की छापेमारी
इस मामले में ED ने इससे पहले 3 जुलाई 2026 को 20 ठिकानों पर सर्च ऑपरेशन चलाया था.आगे की जांच में ED को कथित तौर पर सिलिगुड़ी केंद्रित एक संगठित सिंडिकेट के बारे में जानकारी मिली है. आरोप है कि यह सिंडिकेट ट्रांसपोर्टरों से हर महीने प्रोटेक्शन मनी वसूलता था.बताया गया है कि सुपारी से लदे ट्रकों को असम बॉर्डर से पश्चिम बंगाल और बिहार के रास्ते बिना रुकावट आगे ले जाने के लिए विशेष ‘टोकन’ जारी किए जाते थे.
प्रोटेक्शन मनी की रकम से करोड़ों की संपत्ति?
ED की जांच के मुताबिक कथित तौर पर अपराध से हासिल रकम को परिवार के सदस्यों, कर्मचारियों और डमी शेल कंपनियों के नाम पर खोले गए बैंक खातों के जटिल नेटवर्क के जरिए घुमाया और लेयर किया गया. इसके बाद रकम को कथित तौर पर अचल संपत्तियों, महंगी गाड़ियों और अन्य परिसंपत्तियों में लगाया गया, जो प्रमुख आरोपियों की घोषित वैध आय की तुलना में अनुपातहीन बताई जा रही हैं. सूत्रों के मुताबिक, सिंडिकेट द्वारा कथित तौर पर वसूली गई प्रोटेक्शन मनी का एक हिस्सा रास्ते में आने वाले विभिन्न केंद्रीय और राज्य सरकार के विभागों के अधिकारियों तक भी पहुंचाया जाता था.
2024 के नक्सलबाड़ी मामले से भी कनेक्शन
ED की कार्रवाई के दायरे में आए कुछ लोग पहले से ही अलग-अलग आपराधिक मामलों का सामना कर रहे हैं. इनमें 2024 का नक्सलबाड़ी मामला भी शामिल है, जिसमें करीब 42 टन सुपारी जब्त की गई थी. ED की सर्च कार्रवाई और मामले में आगे की मनी ट्रेल की जांच जारी है.