एक ही खेत से 6 तरह की कमाई, गया यूनिवर्सिटी का मॉडल बदल देगा किसानों की किस्मत
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Gaya Integrated Farming: बिहार के किसानों के सामने सबसे बड़ी चुनौती कम जमीन से परिवार की आय बढ़ाना है. अगर किसी किसान के पास दो एकड़ जमीन है, तो वह केवल धान या गेहूं की खेती तक सीमित न रहे. किसान एकीकृत समेकित कृषि प्रणाली को अपनाकर अपनी आमदनी बढ़ा सकते हैं. इसमें खेती, पशुपालन, बागवानी, सब्जी, मछली पालन और जैविक खाद को एक-दूसरे से जोड़ा जाता है. इससे किसान के लिए आय के कई स्रोत तैयार हो सकते हैं.
एकीकृत समेकित कृषि प्रणाली का मूल सिद्धांत है कि खेत की एक गतिविधि से निकलने वाले संसाधन का इस्तेमाल दूसरी गतिविधि में किया जाए. गया जिले में स्थित दक्षिण बिहार केंद्रीय विश्वविद्यालय के कृषि विभाग ने इसका एक मॉडल तैयार किया है. इस मॉडल में दो एकड़ जमीन पर बकरी पालन, मुर्गी पालन, मछली पालन, बतख पालन और गाय पालन किया जा रहा है. इसके साथ फल और सब्जियों की बागवानी भी की जा रही है.
एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. हेमंत कुमार सिंह के अनुसार, एकीकृत कृषि प्रणाली में गाय, बकरी, बतख, मछली और मुर्गी पालन की अहम भूमिका हो सकती है. दो एकड़ जमीन वाले किसान को जमीन और चारे की उपलब्धता के हिसाब से पशुओं की संख्या तय करनी चाहिए. किसान 6 से 8 दुधारू पशुओं के साथ डेयरी की शुरुआत कर सकता है. इस मॉडल की खासियत यह है कि खेत में उपलब्ध संसाधनों का अधिकतम इस्तेमाल होता है. एक गतिविधि से निकलने वाला अपशिष्ट दूसरी गतिविधि के काम आ सकता है.
इस प्रणाली में अलग-अलग गतिविधियां एक-दूसरे पर निर्भर रहती हैं. खेत से निकलने वाला अवशेष पशुओं के चारे के रूप में इस्तेमाल किया जा सकता है. पशुओं से मिलने वाले गोबर का इस्तेमाल जैविक खाद बनाने में किया जा सकता है. तालाब के पानी का इस्तेमाल सिंचाई के लिए किया जा सकता है. वहीं, खेत में उगाया गया चारा पशुओं को खिलाया जा सकता है. इस तरह किसान का खेत एक छोटे कृषि चक्र की तरह काम करता है.
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किसी मौसम में अगर अनाज की कीमत कम हो जाती है, तो किसान के पास आमदनी के दूसरे विकल्प भी रहते हैं. वह सब्जी, दूध, फल, अंडे, मछली और कंपोस्ट से कमाई कर सकता है. इससे किसी एक फसल पर किसान की निर्भरता कम होती है. अगर किसान के पास तालाब है, तो उसमें मछली पालन के साथ बतख पालन भी किया जा सकता है. तालाब के किनारे सब्जियां और फलदार पौधे लगाए जा सकते हैं. इससे एक ही जमीन और उपलब्ध संसाधनों से कई तरह की आमदनी हासिल की जा सकती है.
किसान खेती के साथ छोटे स्तर पर मुर्गी पालन भी कर सकता है. इससे अंडे और मांस के जरिए अतिरिक्त आय मिल सकती है. मुर्गियों के अपशिष्ट का उचित तरीके से कंपोस्ट बनाया जा सकता है. इसका इस्तेमाल खेत में खाद के रूप में किया जा सकता है. इसके अलावा खेत की मेड़ और खाली जगह का भी इस्तेमाल किया जा सकता है. यहां आम, अमरूद, नींबू, पपीता, केला और सहजन जैसे फलदार पौधे लगाए जा सकते हैं. इससे जमीन के अतिरिक्त हिस्से का उपयोग होगा. साथ ही किसान को खेती के अलावा फल और अन्य उत्पादों से भी आमदनी का अवसर मिलेगा.