क्या मुस्लिम लीग केरल में कांग्रेस सरकार को अपने इशारों पर नचा रही है? बिना चुनाव लड़े एमके मुनीर को दिलवाया कैबिनेट रैंक

क्या मुस्लिम लीग केरल में कांग्रेस सरकार को अपने इशारों पर नचा रही है? बिना चुनाव लड़े एमके मुनीर को दिलवाया कैबिनेट रैंक


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केरल मुस्लिम लीग के सामने क्यों झुकी कांग्रेस? मुनीर को दिया कैबिनेट रैंक

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MK Muneer Kerala Administrative Reforms Commission Chairman: केरल में कांग्रेस की सरकार है. कांग्रेस सरकार ने बिना चुनाव लड़े इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग (IUML) के नेता डॉ. एम.के. मुनीर को कैबिनेट मंत्री का दर्जा (कैबिनेट रैंक) दिया है. जैसे ही यह नियुक्ति हुई. केरल की राजनीति और कांग्रेस और मुस्लिम लीग के बीच के समीकरणों पर चर्चा शुरू हो गई. बताया जा रहा है कि नियुक्ति से पहले इस पद को लेकर कांग्रेस और IUML के बीच खींचतान की खबरें सामने आई थीं. तो क्या मुस्लिम लीग केरल में कांग्रेस सरकार को अपने इशारों पर नचा रही है? बिना चुनाव लड़े एमके मुनीर को कैसे दिलवाया कैबिनेट रैंक. इन तमाम सवालों के जवाब जानते हैं.

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कांग्रेस चाहती थी अपना नेता, मुस्लिम लीग ने मुनीर का नाम आगे बढ़ाया; आखिर केरल सरकार को क्यों झुकना पड़ा.

Kerala Politics: केरल की वी.डी. सतीशन सरकार में सहयोगी दल इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग यानी IUML का दबदबा एक बार फिर चर्चा में है. पहले सरकार बनाने की वजह से चर्चा हुई थी. इस बार मुस्लिम लीग के सीनियर नेता डॉ. एमके मुनीर की नई नियुक्ति को लेकर चर्चा हो रही है. सरकार ने उन्हें राज्य प्रशासनिक सुधार आयोग का अध्यक्ष बनाया है. इसके साथ उन्हें कैबिनेट रैंक भी दी गई है. लेकिन कैबिनेट रैंक देना बड़ी बात नहीं है, उससे बड़ी बात यह है कि उन्होंने इस बार के विधानसभा चुनाव भी नहीं लड़ा था. जानें पूरी कहानी.

कांग्रेस चाहती थी अपने नेता को पद

मीडिया में छपी खबर के मुताबिक, प्रशासनिक सुधार आयोग के अध्यक्ष पद को लेकर कांग्रेस और IUML के बीच खींचतान चल रही थी. कांग्रेस के भीतर इस पद का इस्तेमाल विधानसभा चुनाव में टिकट से बाहर रह गए अपने सीनियर नेताओं को सरकार में जगह देने के लिए करने की चर्चा थी. एमएम हसन, केसी जोसेफ और पीजे कुरियन जैसे नाम इस पद के लिए चर्चा में थे. केरल कांग्रेस के नेता पीजे जोसेफ ने भी कुछ समय के लिए इस पद पर दावा किया था. लेकिन IUML पहले से इस पद पर अपना दावा जता रही थी. पार्टी का कहना था कि सरकार बनाने के दौरान छठे मंत्री पद की मांग के बदले उसे कैबिनेट रैंक का पद देने पर सहमति बनी थी. IUML ने विधानसभा में अपनी संख्या के आधार पर छठे मंत्री पद की मांग की थी. बाद में समझौते के तहत उसने यह मांग छोड़ने की बात कही थी. बदले में प्रशासनिक सुधार आयोग का पद देने का दावा किया गया था.

आखिर मुनीर के नाम पर लगी मुहर

30 सितंबर को केरल कैबिनेट ने एमके मुनीर को प्रशासनिक सुधार आयोग का अध्यक्ष बनाने का फैसला किया. उन्हें पूरा कैबिनेट रैंक दिया गया है. इसके साथ उन्हें निजी स्टाफ और सरकारी आवास जैसी सुविधाएं भी मिलेंगी. इस फैसले के साथ कई दिनों से चल रही राजनीतिक खींचतान खत्म हो गई. नियुक्ति को UDF के भीतर कांग्रेस और IUML के बीच सत्ता संतुलन से जोड़कर देखा जा रहा है. मुनीर अप्रैल 2026 में हुए विधानसभा चुनाव में उम्मीदवार नहीं थे. इससे पहले वह 2021 से 2026 तक कोडुवल्ली विधानसभा सीट से विधायक रहे थे. IUML ने उन्हें 2026 के चुनाव में टिकट नहीं दिया था. मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, पार्टी ने उनकी खराब होती सेहत को टिकट नहीं देने की वजह बताया था. अब चुनावी राजनीति से बाहर रहने के बावजूद उन्हें सरकार में कैबिनेट रैंक वाला पद मिला है.

कौन हैं एमके मुनीर?

एमके मुनीर IUML के पुराने और अनुभवी नेताओं में शामिल हैं. वह केरल के पूर्व मुख्यमंत्री और मुस्लिम लीग के बड़े नेता सीएच मोहम्मद कोया के बेटे हैं. वह पेशे से MBBS डॉक्टर हैं. केरल विधानसभा के रिकॉर्ड के मुताबिक, वह कई बार विधायक रहे हैं. उन्होंने 2001 से 2006 तक लोक निर्माण मंत्री और 2011 से 2016 तक पंचायत एवं सामाजिक न्याय मंत्री के तौर पर काम किया. 2017 से 2021 तक वह विधानसभा में विपक्ष के उपनेता भी रहे. मुनीर की पहचान सिर्फ राजनीति तक सीमित नहीं रही है. विधानसभा के आधिकारिक रिकॉर्ड में उन्हें लेखक, वक्ता और गायक के तौर पर भी दर्ज किया गया है. वह इंडिया विजन टेलीविजन के चेयरमैन भी रह चुके हैं. अब प्रशासनिक सुधार आयोग की जिम्मेदारी उनके पास होगी. आयोग राज्य के प्रशासन, नियमों में बदलाव और विकेंद्रीकरण से जुड़े विषयों पर सरकार को सुझाव देता है.

क्या कांग्रेस पर बढ़ा इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग का दबाव?

मुनीर की नियुक्ति के बाद सबसे बड़ा राजनीतिक सवाल यही है कि क्या UDF सरकार में IUML का प्रभाव बढ़ रहा है. IUML के पास सरकार में पहले से महत्वपूर्ण हिस्सेदारी है. मई 2026 में भी कैबिनेट गठन के समय भी मंत्री पद और विभागों के बंटवारे को लेकर कांग्रेस और मुस्लिम लीग के बीच बातचीत और खींचतान की खबरें आई थीं.

केरल में इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग इतनी ताकतवर क्यों है?

केरल में इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग यानी IUML की ताकत का सबसे बड़ा आधार उसका मजबूत जनाधार और पुराना संगठन है. राज्य की करीब 26 फीसदी आबादी मुस्लिम है और उत्तर केरल, खासकर मलप्पुरम और आसपास के इलाकों में IUML का मजबूत प्रभाव है. 2026 के विधानसभा चुनाव में पार्टी ने 27 सीटों पर चुनाव लड़ा और 22 सीटें जीतीं थी. मलप्पुरम में UDF ने सभी विधानसभा सीटों पर जीत दर्ज की. IUML की स्थापना 1948 में हुई थी. इतने लंबे राजनीतिक सफर में पार्टी ने स्थानीय स्तर तक अपना मजबूत संगठन खड़ा किया है. यही वजह है कि उसका प्रभाव सिर्फ चुनाव के समय नहीं दिखता, बल्कि पंचायत से लेकर विधानसभा तक नजर आता है.

कांग्रेस के लिए जरूरी सहयोगी, इसलिए बढ़ती है सौदेबाजी की ताकत

IUML की अहमियत सिर्फ उसकी अपनी सीटों तक सीमित नहीं है. वह कांग्रेस के नेतृत्व वाले UDF की प्रमुख सहयोगी है. मुस्लिम बहुल इलाकों में उसका मजबूत संगठन कांग्रेस गठबंधन के लिए भी अहम माना जाता है. 2026 में 22 सीटें जीतने के बाद विधानसभा में उसकी स्थिति और मजबूत हुई है. इसी वजह से सरकार गठन के समय मंत्री पद और महत्वपूर्ण विभागों को लेकर IUML की भूमिका महत्वपूर्ण रही. प्रशासनिक सुधार आयोग के अध्यक्ष पद पर एमके मुनीर की नियुक्ति भी इसी राजनीतिक खींचतान के बीच हुई. रिपोर्टों के मुताबिक, IUML ने छठे मंत्री पद की मांग छोड़ने के बदले कैबिनेट रैंक वाले पद की मांग की थी. बाद में मुनीर को आयोग का अध्यक्ष बनाकर कैबिनेट रैंक दी गई. यही घटनाक्रम बताता है कि UDF में IUML की राजनीतिक हैसियत सिर्फ संख्या की नहीं, बल्कि संगठन, क्षेत्रीय जनाधार और कांग्रेस के लिए उसकी चुनावी उपयोगिता से भी तय होती है.



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