बलिया: एक गांव से शुरू हुई शिक्षा की यात्रा, प्राथमिक विद्यालय से मिली बुनियाद और अथक संघर्ष. इसी जिद्द ने एक शख्स की जिंदगी की कहानी को ही पूरी तरह से बदल दिया. अनेकों असफलताओं के बावजूद भी इन्होंने हार नहीं मानी थी. पहले तो ये प्राथमिक विद्यालय में शिक्षक बने. लेकिन लक्ष्य जो बड़ा था, इसलिए प्रयास जारी रखा और सफलता ने पुलिस उप निरीक्षक के पद रूप में दस्तक दी. लेकिन उनका सफर यहां भी नहीं रुका. आगे बढ़ने की चाह ने डॉ. विपिन को असिस्टेंट प्रोफेसर बनने का अवसर दिया. आखिरकार, यह पुलिस उप निरीक्षक के पद से इस्तीफा देकर शिक्षण क्षेत्र को चुन लिया. गांव से निकले इस विपिन ने यह साबित कर दिया कि मंजिल उन्हीं को मिलती है, जो कोशिश करना छोड़ते नहीं.
डॉ. विपिन नें यहां से हासिल की शुरुवाती शिक्षा
श्री मुरली मनोहर टाउन स्नातकोत्तर महाविद्यालय बलिया में रक्षा अध्ययन विषय के असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. विपिन कुमार की यह प्रेरणादायक कहानी है. डॉ. विपिन कुमार बरेली के रहने वाले हैं. उनकी प्रारंभिक शिक्षा गांव के ही सरकारी विद्यालय में हुई थी. इसके बाद उन्होंने मीरगंज स्थित राजेंद्र प्रसाद इंटर कॉलेज से हाई स्कूल और इंटरमीडिएट की पढ़ाई पूरी की. राजेंद्र प्रसाद डिग्री कॉलेज, मीरगंज, बरेली से उन्होंने बीए और बीएड की डिग्री प्राप्त की. इसके बाद बरेली कॉलेज से एमए डिफेंस में डिग्री हासिल की. एमएड की डिग्री हिंदू कॉलेज मुरादाबाद से और पीएचडी की डिग्री जननायक चंद्रशेखर विश्वविद्यालय बलिया से प्राप्त की है.
दारोगा के पद पर भी हुआ चयन
डॉ. विपिन कुमार ने विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी भी की है. इसी क्रम में उन्होंने पुलिस की भी तैयारी की और उपनिरीक्षक के पद पर उनका चयन हुआ था. उन्होंने अपनी ट्रेनिंग भी पूरी कर ली थी. लेकिन उसी समय उनका चयन असिस्टेंट प्रोफेसर के पद पर हो गया, तो उन्होंने पुलिस उपनिरीक्षक के पद से त्यागपत्र दे दिया और असिस्टेंट प्रोफेसर के पद पर कार्यभार ग्रहण कर लिया. डॉ. विपिन कुमार बताते हैं कि उन्हें असफलताएं इतनी मिलीं कि उनकी कोई गिनती नहीं है. उन्होंने कई फॉर्म भरे, लेकिन हर जगह सफलता नहीं मिलती है. जिस चीज की आदमी मन से तैयारी करता है, उसमें सफलता जरूर मिलती है. वे प्राथमिक विद्यालय के शिक्षक भी थे, उसके बाद उपनिरीक्षक के पद पर उनका चयन हुआ और अब वे असिस्टेंट प्रोफेसर हैं.
सही दिशा में मेहनत करने से मिलती है सफलता
डॉ. विपिन कुमार मध्यम वर्ग से ताल्लुक रखते हैं. उनके पिताजी का 2022 में हार्ट अटैक से निधन हो गया था. उनके पिताजी भी शिक्षक थे, इसलिए उन्हें बचपन से ही पढ़ाई का एक माहौल मिला, जिसका सकारात्मक प्रभाव पड़ा. डॉ. विपिन कुमार आज के युवाओं के लिए संदेश देते हैं कि किसी भी काम को मन से करें. मन से काम करने पर सफलता जरूर मिलेगी. आज के समय में संसाधनों की भी कमी नहीं है. इंटरनेट और कई ऐसी चीजें उपलब्ध हैं, जिनका सदुपयोग करके और सही दिशा में प्रयास करके सफलता प्राप्त की जा सकती है.
कॉनसेप्ट रखें क्लियर
डॉ. विपिन कुमार की रुचि शिक्षा विषय में थी, लेकिन उनका चयन रक्षा अध्ययन विषय में हुआ, तो उन्होंने इसी में अपना करियर बना लिया. उनका पसंदीदा विषय शिक्षा था, क्योंकि उन्होंने बीएड और एमएड भी किया था और उस विषय में उनका नेट भी था. वे कहते हैं कि एमए करते समय कॉन्सेप्ट क्लियर होने चाहिए. नेट का एग्जाम देने वाले अगर उन प्रश्नों का रिवीजन कर लें, तो किसी भी विषय पर अच्छी पकड़ बन जाती है, जिससे सफलता की संभावनाएं बढ़ जाती हैं. असिस्टेंट प्रोफेसर का टेस्ट अलग होता है. अगर कोई अच्छे से तैयारी करेगा तो सफलता निश्चित मिलेगी. अगर आदमी मेहनत कर पढ़ाई करता है, तो सफलता जरूर मिलती है. आज के समय में प्रतिस्पर्धा तो है ही, बिना प्रतिस्पर्धा के आजकल कुछ भी संभव नहीं है.