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Schools Closed Tomorrow: अक्टूबर की शुरुआत छुट्टियों के साथ हो रही है. 2 अक्टूबर को गांधी जयंती की नेशनल हॉलिडे रहेगी. शुक्रवार के चलते ज्यादातर स्कूल-कॉलेज और ऑफिस वालों को महीने की शुरुआत में ही लॉन्ग वीकेंड का अवसर मिलेगा. वहीं दूसरी तरफ बिहार के 9 जिलों में बाढ़ के प्रकोप से शिक्षण संस्थानों के ताले तक नहीं खुल पा रहे हैं.
Schools Closed Tomorrow: गांधी जयंती के अवसर पर देशभर के स्कूल बंद रहेंगे
नई दिल्ली (Schools Closed Tomorrow). अक्टूबर शुरू होते ही बच्चों के चेहरे पर छुट्टियों की चमक साफ दिखने लगती है. इस बार 2 अक्टूबर यानी महात्मा गांधी जयंती शुक्रवार को पड़ रही है. इसके चलते कई राज्यों में शुक्रवार, शनिवार और रविवार मिलाकर लगातार 3 दिनों का लॉन्ग वीकेंड मिल रहा है. उत्तर प्रदेश, दिल्ली, बिहार और पश्चिम बंगाल से लेकर तमिलनाडु तक, हर राज्य में स्कूल अपने लोकल कैलेंडर और त्योहारों के हिसाब से छुट्टियों की लिस्ट तैयार कर चुके हैं.
गांधी जयंती और लॉन्ग वीकेंड का कॉम्बो
अक्टूबर के पहले हफ्ते में छुट्टियों का दौर बहुत दिलचस्प है. 2 अक्टूबर को शुक्रवार है. इसलिए ज्यादातर राज्यों में स्टूडेंट्स की मौज हो गई है. तमिलनाडु में तिमाही परीक्षाओं के बाद चल रहे ब्रेक के कारण 4 अक्टूबर तक स्कूल बंद रखे गए हैं. वहीं, उत्तर प्रदेश, दिल्ली और झारखंड जैसे राज्यों में शुक्रवार की छुट्टी के बाद शनिवार की स्थिति स्कूल के लोकल कैलेंडर पर निर्भर करती है. फिर रविवार को साप्ताहिक अवकाश तय है. पश्चिम बंगाल में दुर्गा पूजा की आहट के साथ ही छुट्टियों का सिलसिला शुरू हो चुका है.
बिहार में बाढ़ का तांडव: पानी में डूबे स्कूल और टूटे रास्ते
प्रशासन की सख्ती और राहत कार्यों का जायजा
बिगड़ते हालातों को देखते हुए सरकार और प्रशासन भी एकदम मुस्तैद नजर आ रहे हैं. मुख्यमंत्री स्तर से बाढ़ प्रभावित इलाकों का हवाई सर्वेक्षण किया जा रहा है. अधिकारियों को साफ निर्देश दिए गए हैं कि राहत और बचाव कार्य में कोई कोताही नहीं बरती जानी चाहिए. बाढ़ के पानी से घिरे इलाकों में लोगों को सुरक्षित जगहों पर पहुंचाने और खाने-पीने की राहत सामग्री बांटने का काम चल रहा है.
उम्मीद और संघर्ष का हफ्ता
अक्टूबर के पहले हफ्ते की तस्वीर काफी विरोधाभासी है. देश के एक हिस्से में स्टूडेंट्स गांधी जयंती के जश्न और लंबी छुट्टियों के मजे ले रहे हैं. वहीं बिहार के बाढ़ प्रभावित इलाकों में बच्चे और उनके परिवार अपनी बुनियादी जरूरतों के लिए संघर्ष कर रहे हैं. यह हफ्ता सिखाता है कि किस तरह एक ही समय में देश के अलग-अलग हिस्सों में जिंदगी के रंग कितने जुदा हो सकते हैं- एक तरफ उत्सव की शांति है तो दूसरी तरफ कुदरत के कहर से उपजा सन्नाटा.