Pitru Paksha 2026: मृत्यु तिथि याद नहीं तो कैसे करें पितरों का श्राद्ध? जानें सही तिथि और विधि

Pitru Paksha 2026: मृत्यु तिथि याद नहीं तो कैसे करें पितरों का श्राद्ध? जानें सही तिथि और विधि


होमताजा खबरधर्म

मृत्यु तिथि याद नहीं तो कैसे करें पितरों का श्राद्ध? जानें सही तिथि और विधि

Last Updated:

Pitru Paksha 2026: पितृ पक्ष में अगर किसी पूर्वज की मृत्यु तिथि की जानकारी नहीं है तो धार्मिक मान्यताओं के अनुसार नवमी या अमावस्या तिथि पर श्राद्ध किया जा सकता है. अयोध्या के ज्योतिष पंडित कल्कि राम के अनुसार सर्वपितृ अमावस्या उन पितरों के श्राद्ध के लिए विशेष मानी जाती है, जिनकी मृत्यु तिथि ज्ञात नहीं है. उन्होंने पिंडदान न कर पाने की स्थिति में मंदिर में पूजा और पितरों की शांति के लिए प्रार्थना करने की बात भी बताई है.

अयोध्या: पितृ पक्ष में पितरों के श्राद्ध और तर्पण का विशेष महत्व माना जाता है.धार्मिक मान्यता के अनुसार पितृ पक्ष के दौरान पूर्वजों का श्राद्ध, तर्पण और पिंडदान करने से पितरों की कृपा प्राप्त होती है. हालांकि कई परिवारों में ऐसी स्थिति होती है. जब किसी पूर्वज की मृत्यु की सही तिथि की जानकारी नहीं होती. ऐसे में शास्त्रों में कुछ विशेष तिथियों का महत्व बताया गया है. तो चलिए इस रिपोर्ट में विस्तार से जानते हैं.

नवमी या अमावस्या पर कर सकते हैं श्राद्ध

अयोध्या के ज्योतिष पंडित कल्कि राम बताते हैं कि जिन लोगों को अपने पूर्वजों की मृत्यु तिथि की जानकारी नहीं है वे नवमी तिथि अथवा अमावस्या तिथि पर श्राद्ध कर सकते हैं. विशेष रूप से सर्वपितृ अमावस्या को उन पितरों का श्राद्ध करने का विधान बताया गया है. जिनकी मृत्यु तिथि ज्ञात नहीं है.अमावस्या के दिन श्राद्ध के साथ पिंडदान करने की भी परंपरा है.

पिंडदान न कर पाएं तो मंदिर में करें प्रार्थना

पंडित कल्कि राम के मुताबिक किसी कारण से यदि कोई व्यक्ति पिंडदान नहीं कर पा रहा है, चाहे आर्थिक स्थिति, संसाधनों की कमी या अन्य वजह हो, तो वह किसी नजदीकी मंदिर में जाकर भी अपने पितरों की शांति के लिए प्रार्थना कर सकता है. उन्होंने बताया कि भगवान शिव को जल अर्पित करते समय ‘ॐ नमो भगवते वासुदेवाय’ मंत्र का जाप किया जा सकता है और अपने पूर्वजों की शांति व सद्गति की प्रार्थना करनी चाहिए.

नवमी और अमावस्या पर ऐसे करें श्राद्ध

उन्होंने बताया कि नवमी और अमावस्या तिथि पर सुबह स्नान करने के बाद घर की रसोई को साफ कर शुद्ध भोजन तैयार करना चाहिए. इस दौरान पूरी बनाने की भी परंपरा बताई गई है. इसके बाद गाय के गोबर के कंडे पर कपूर जलाकर अग्नि प्रज्वलित की जा सकती है. पूरी में घी और शक्कर मिलाकर उससे आहुति देने का विधान बताया गया है.

गायत्री मंत्र के साथ दें 12 आहुतियां

पंडित कल्कि राम के अनुसार भगवती गायत्री मंत्र का उच्चारण करते हुए 12 आहुतियां दी जा सकती हैं. इसके साथ ही भगवान विष्णु के द्वादशाक्षर महामंत्र ‘ॐ नमो भगवते वासुदेवाय’ का एक माला जाप करने की भी सलाह दी गई है.

अमावस्या पर होती है पितरों की विदाई

धार्मिक मान्यता के अनुसार पितृ पक्ष के दौरान पितरों का स्मरण कर उनके लिए तर्पण और श्राद्ध किया जाता है. माना जाता है कि अमावस्या के दिन पितरों की विदाई होती है.ऐसे में जिन लोगों को अपने पूर्वजों की मृत्यु तिथि ज्ञात नहीं है, उनके लिए नवमी और अमावस्या तिथि पर श्रद्धापूर्वक श्राद्ध करना महत्वपूर्ण माना जाता है.



Source link