Business Idea: न फैक्ट्री, न मशीन… बंगू के पत्तों से टोपी बनाकर आत्मनिर्भर बन रहीं महिलाएं, जमशेदपुर से 100KM दूर है ये गांव

Business Idea: न फैक्ट्री, न मशीन… बंगू के पत्तों से टोपी बनाकर आत्मनिर्भर बन रहीं महिलाएं, जमशेदपुर से 100KM दूर है ये गांव


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Business Idea: झारखंड की ग्रामीण महिलाएं आत्मनिर्भर बनने के लिए कुछ न कुछ जरूर करती रहती हैं. ऐसे में जमशेदपुर के मूलीबनी गांव की महिलाएं बंगू पत्ता से हाथ से टोपियां बनाकर आत्मनिर्भर बन रही हैं. ये टोपियां बारिश और धूप से बचाती हैं. इसकी मार्केट में कीमत 10-20 रुपये है. इन टोपियों के माध्यम से महिलाएं अपने परिवार का पालन पोषण भी करती हैं.

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जमशेदपुर: झारखंड की ग्रामीण महिलाएं रोजगार के लिए आसपास मिलने वाले प्राकृतिक संसाधनों का इस्तेमाल कर आत्मनिर्भर बनने की कोशिश कर रही हैं. जमशेदपुर से करीब 100 किलोमीटर दूर मूलीबनी गांव की ग्रामीण महिलाएं बंगू पत्ता से खास तरह की टोपी तैयार करती हैं. यह टोपी बारिश और तेज धूप से बचाने में काफी उपयोगी होती है. सबसे खास बात यह है कि इसे बनाने में किसी मशीन की जरूरत नहीं पड़ती है. बल्कि महिलाएं मिलकर हाथों से इसे तैयार करती हैं.

परिवार चलाने में मदद करता है ये पत्ता

गांव की रहने वाली जमुना बताती हैं कि उनके गांव में रोजगार के ज्यादा साधन उपलब्ध नहीं हैं. ऐसे में आसपास प्रकृति से मिलने वाली चीजों को ही रोजगार का जरिया बनाया गया है. बंगू पत्ता आसानी से उपलब्ध हो जाता है, जिससे महिलाएं टोपी तैयार करती हैं. इससे उन्हें घर के आसपास रहकर ही कुछ आमदनी हो जाती है और परिवार चलाने में भी मदद मिलती है.

ग्रामीण महिलाओं के अनुसार यह टोपी खासकर बरसात और गर्मी के मौसम में काफी काम आती है. पत्तों की बनावट ऐसी होती है कि बारिश का पानी सीधे सिर पर नहीं पड़ता और तेज धूप से भी बचाव होता है. खेतों में काम करने वाले ग्रामीणों के लिए यह टोपी काफी उपयोगी मानी जाती है. वहीं, इस काम से गांव की करीब 10 से 15 महिलाएं जुड़ी हुई हैं. महिलाएं मिलकर पत्तों को इकट्ठा करती हैं, उन्हें सही आकार में तैयार करती हैं और फिर हाथ से टोपी बनाती हैं. तैयार होने के बाद इन टोपियों को ग्रामीण हाट, बाजार और मेलों में बिक्री के लिए ले जाया जाता है.

जानें एक टोपी की कीमत

गांव की महिलाएं बताती हैं कि एक टोपी करीब 10 से 20 रुपये में बिक जाती है. कीमत भले ही कम हो, लेकिन बड़ी संख्या में टोपी तैयार होने पर इससे महिलाओं को अतिरिक्त आमदनी हो जाती है. सबसे खास बात यह है कि इसके लिए उन्हें घर से दूर जाकर नौकरी या मजदूरी करने की जरूरत नहीं पड़ती है.

ग्रामीण महिलाओं का कहना है कि प्रकृति से मिलने वाले संसाधनों का इस्तेमाल कर रोजगार का यह छोटा प्रयास उनके लिए काफी मायने रखता है. इससे एक तरफ पारंपरिक तरीके और स्थानीय कला बची हुई है. वहीं, दूसरी तरफ महिलाओं को अपनी मेहनत से आमदनी का जरिया भी मिल रहा है. गांव की महिलाएं चाहती हैं कि ऐसे प्राकृतिक उत्पादों को बड़े बाजार तक पहुंच मिले, ताकि इस काम से जुड़ी महिलाओं की आमदनी और बढ़ सके.



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