7500 डिग्री तापमान वाले ब्रह्मांड के सबसे खौफनाक और दहकते तारे के पास मिला महाकाय ग्रह, जुपिटर से 6 गुना भारी

7500 डिग्री तापमान वाले ब्रह्मांड के सबसे खौफनाक और दहकते तारे के पास मिला महाकाय ग्रह, जुपिटर से 6 गुना भारी


नई दिल्ली: साइंटिस्ट्स ने ब्रह्मांड के अब तक के सबसे गर्म तारे के हैबिटेबल जोन में एक नए ग्रह की खोज की है. इसे एचडी 156295 बी नाम दिया गया है. इसका होस्ट स्टार हमारे सूरज से करीब नौ गुना ज्यादा चमकदार और कई हजार डिग्री अधिक गर्म है. इस तारे का तापमान लगभग 7500 डिग्री सेल्सियस मापा गया है. यह रहस्यमय दुनिया हमारी धरती से करीब 140 लाइट-ईयर्स की दूरी पर स्थित है. इस महाकाय ग्रह का वजन हमारे सौरमंडल के सबसे बड़े ग्रह जुपिटर से लगभग छह गुना ज्यादा है. यह ग्रह अपने तारे की परिक्रमा पूरी करने में करीब 2200 दिन का समय लेता है. नासा के टीईएसएस स्पेस टेलीस्कोप के डेटा की मदद से यह खोज की गई है.

दहकते हुए आग के गोले जैसे तारे की क्या खासियत है?

अंतरिक्ष में अब तक 6300 से भी ज्यादा एक्सोप्लैनेट्स खोजे जा चुके हैं. इनमें से अधिकतर ग्रह छोटे और ठंडे तारों के आसपास मिले हैं. लेकिन यह नया तारा बाकी तारों से बिल्कुल अलग और बेहद भयानक है. यह एक ए-टाइप स्टार है, जो नीले और सफेद रंग की तेज रोशनी से चमकता है. इसका आकार और द्रव्यमान हमारे सूरज से लगभग दोगुना बड़ा है.

वैज्ञानिक भाषा में इसे एचडी 156295 नाम दिया गया है. यह तारा इतना चमकदार है कि इसे बिना किसी दूरबीन के भी रात के आसमान में देखा जा सकता है. इसकी सबसे बड़ी खासियत यह है कि यह एक डेल्टा स्कूटी वेरिएबल स्टार है. इसका मतलब यह है कि इस तारे की चमक एक निश्चित अंतराल पर घटती और बढ़ती रहती है. कैसे, यह आप नीचे NASA के वीडियो में देख सकते हैं.

यह तारा ब्रह्मांड में एक सटीक घड़ी की तरह काम करता है. इसी नियमित धड़कन ने वैज्ञानिकों को इसके आसपास छिपे ग्रह को ढूंढने का सुराग दिया.

क्या इतने गर्म तारे के पास जीवन पनप सकता है?

हैबिटेबल जोन उस दायरे को कहते हैं, जहां किसी ग्रह पर पानी तरल रूप में मौजूद रह सकता है. चूंकि यह तारा बहुत ज्यादा आग उगल रहा है, इसलिए इसका हैबिटेबल जोन तारे से काफी दूर खिसक गया है. यह नया ग्रह अपने तारे से लगभग 4 एस्ट्रोनॉमिकल यूनिट की दूरी पर चक्कर काट रहा है. इसका मतलब यह है कि यह दूरी धरती और सूरज के बीच के फासले से चार गुना ज्यादा है.

इतनी ज्यादा दूरी होने की वजह से इस ग्रह को धरती के मुकाबले केवल 60 परसेंट रेडिएशन ही मिलता है. तापमान के लिहाज से यह ग्रह जीवन के लिए अनुकूल इलाके में बैठता है. लेकिन यह एक विशाल गैस का गोला है, जहां जमीन मौजूद नहीं है. ऐसे हालात में इस ग्रह की सतह पर जीवन की संभावना बहुत कम मानी जा रही है. हालांकि वैज्ञानिक इस बात से इनकार नहीं करते कि इसके किसी बर्फीले चंद्रमा पर अजीबोगरीब जीवन पनप सकता है.

साइंटिस्ट्स ने इस अदृश्य ग्रह को कैसे खोज निकाला?

सौरमंडल के बाहर किसी ग्रह को खोजना बेहद मुश्किल काम होता है. यह काम किसी विशाल हाइड्रोजन बम की रोशनी के आगे एक छोटे जुगनू को देखने जैसा होता है. वैज्ञानिक सीधे तौर पर इन दूर मौजूद ग्रहों की तस्वीर नहीं खींच सकते. इस खोज के लिए रिसर्च टीम ने पल्सेशन टाइमिंग नाम की एक बेहद जटिल तकनीक का इस्तेमाल किया.

उन्होंने नासा के टीईएसएस टेलीस्कोप द्वारा देखे गए लगभग 16500 डेल्टा स्कूटी तारों के डेटा की गहराई से जांच की. जब कोई बड़ा ग्रह अपने तारे के चारों ओर घूमता है, तो उसके गुरुत्वाकर्षण से तारा थोड़ा डगमगाता है. तारे की इस डगमगाहट की वजह से उसकी रोशनी के धरती तक पहुंचने के समय में बहुत बारीक फर्क आ जाता है. वैज्ञानिकों ने तारे की धड़कनों के समय में आ रहे इसी नन्हे बदलाव को रिकॉर्ड कर लिया. इसी बदलाव ने साबित किया कि वहां एक भारी ग्रह मौजूद है.

क्या इस सिस्टम में दूसरे रहस्यमय आकाशीय पिंड भी मौजूद हैं?

साइंटिस्ट्स ने अपने इस बड़े रिसर्च प्रोजेक्ट में सिर्फ एक ग्रह ही नहीं तलाशा. उन्होंने कुल नौ अलग-अलग स्टार सिस्टम्स की पहचान की है. इनमें से एक सिस्टम में यह विशाल ग्रह मिला है, जबकि बाकी आठ सिस्टम्स में ब्राउन ड्वार्फ होने के संकेत मिले हैं.

  • ब्राउन ड्वार्फ अंतरिक्ष की ऐसी अजीब चीजें होती हैं, जो ग्रह से बहुत बड़ी होती हैं लेकिन तारे जितनी ताकतवर नहीं बन पातीं.
  • इनका वजन जुपिटर के मुकाबले 25 से लेकर 59 गुना तक भारी दर्ज किया गया है.
  • ये भारी पिंड अपने तारों की परिक्रमा 1100 से लेकर 2800 दिनों में पूरी करते हैं.
  • अगर कोई इंसान ऐसे पिंडों के करीब चला जाए, तो उसका भारी गुरुत्वाकर्षण उसे तुरंत कुचल देगा.

यह पूरा सिस्टम केवल 700 मिलियन साल पुराना है. इसका मतलब यह है कि यह नया सौरमंडल अभी अपनी शुरुआती उम्र में ही जी रहा है.

वैज्ञानिकों का कहना है कि इस ग्रह के सच होने की संभावना फिलहाल 50 परसेंट के आसपास है. यह एक सिक्के के उछाल जैसा है, जिसमें हां या ना दोनों हो सकते हैं. विज्ञान में अक्सर ऐसी खोजें भविष्य के नए रास्तों के दरवाजे खोल देती हैं. भले ही आगे चलकर यह खोज झूठी साबित हो जाए, लेकिन इससे गर्म तारों के आसपास ग्रहों को ढूंढने का तरीका और बेहतर होगा.

रिसर्चर्स ने अपने पेपर में लिखा, ‘टीईएसएस डेटा से मिली जानकारी मौजूदा तकनीक की अंतिम सीमा पर है’. अब पूरी दुनिया की नजरें यूरोपियन स्पेस एजेंसी के प्लेटो मिशन पर टिकी हुई हैं. यह आधुनिक स्पेस वेधशाला भविष्य में करीब दो लाख तारों की निगरानी करेगी. इसके अत्यधिक सटीक कैमरे इस विशाल ग्रह की मौजूदगी पर मुहर लगा सकते हैं. यह रिसर्च मशहूर विज्ञान पत्रिका ‘द एस्ट्रोफिजिकल जर्नल’ में पब्लिश हुई है.



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