बागेश्वर: उत्तराखंड के बागेश्वर में स्थित सुंदरढूंगा ग्लेशियर ट्रेक हिमालय की खूबसूरत वादियों, घने जंगलों, नदी-झरनों, बुग्यालों और ऊंची पर्वत चोटियों के बीच बसा है. इसे कुमाऊं के प्रमुख ग्लेशियर ट्रेक में शामिल किया गया है. 15 सितंबर से सुंदरढूंगा ट्रेक को ट्रेकिंग के लिए खोल दिया गया है. तब से लेकर अब तक कई विदेशी और भारतीय पर्यटक यहां ट्रेक भी कर रहे हैं.
ऐसे पहुंचे ट्रेक के शुरुआती बिंदु तक
स्थानीय जानकार व वरिष्ठ पत्रकार रमेश कृषक पांडे बताते हैं कि सुंदरढूंगा ट्रेक पर जाने वाले पर्यटक सबसे पहले काठगोदाम रेलवे स्टेशन पहुंच सकते हैं. इस ट्रेक के लिए कुमाऊं में काठगोदाम निकटतम रेलवे स्टेशन है. यहां से सड़क मार्ग से अल्मोड़ा होते हुए बागेश्वर से जातोली गांव पहुंचा जा सकता है. पहले दिन जातोली गांव में रात्रि विश्राम कर अगले दिन सुबह 6:00 से 7:00 बजे आप ट्रेक शुरू कर सकते हैं.
चार से पांच दिन का सफर और प्रमुख पड़ाव
यह ट्रेक लगभग चार से पांच दिन का है, जो कि अलग-अलग पड़ावों से होकर गुजरता है. सुंदरढूंगा ग्लेशियर ट्रेक की शुरुआत जातोली गांव से होती है. पहले दिन जातोली से घने जंगलों से गुजरते हुए दुधिया धौंग या लेह बग होते हुए कठलिया बेस कैंप पहुंचा जाता है. दूसरे दिन कठलिया से बलुनी टॉप, सुखराम गुफा और सुंदरढूंगा व्यू प्वाइंट या ग्लेशियर के दर्शन किए जाते हैं. तीसरे दिन देवीकुंड और नागकुंड जाकर कठलिया लौटते हैं. चौथे दिन जातोली गांव वापसी हो जाती है. ट्रेक के कुल दिन आपके चलने की क्षमता, लोकल गाइड और आपके द्वारा बुक की गई कंपनी पर निर्भर करते हैं. साथ ही ट्रेक की लगभग दूरी जातोली से सुंदरढूंगा व्यू प्वाइंट तक एकतरफा 17 से 22 किलोमीटर के बीच है.
कठिन डगर में स्थानीय गाइड और मौसम की सतर्कता जरूरी
जातोली के आगे रास्ता कई स्थानों पर कठिन और कम स्पष्ट हो जाता है. कुछ हिस्सों में नदी, पत्थरों और ऊबड़-खाबड़ रास्ते से होकर गुजरना पड़ता है. ऐसे में स्थानीय गाइड की मदद काफी महत्वपूर्ण हो जाती है. स्थानीय गाइड मौसम, रास्ते, ठहरने की जगह और पानी के स्रोतों की जानकारी भी दे सकता है. ट्रेकिंग के दौरान भोजन और रहने की व्यवस्था पहले से तय करना भी जरूरी है. सुंदरढूंगा क्षेत्र में मौसम तेजी से बदल सकता है. बारिश, धुंध, ठंड या रास्ते पर पानी आने की स्थिति में आगे बढ़ने के बजाय सुरक्षित स्थान पर रुकना जरूरी है.
टेंट, मेडिकल जांच और खूबसूरत चोटियों का नजारा
ट्रेक पर निकलने से पहले मौसम की जानकारी लें, और बारिश से बचाव के लिए रेनकोट, गर्म कपड़े, जरूरी दवाइयां, पानी और पर्याप्त भोजन साथ रखें. बागेश्वर जिला प्रशासन भी ऊंचाई वाले ट्रेक पर जाने से पहले मेडिकल जांच कराने की सलाह देता है. साथ ही इस जगह पर रहने की कोई और उचित व्यवस्था नहीं है, इसलिए आपको अपने टेंट साथ लेकर जाने होते हैं.
यदि आपने कोई कंपनी बुक की है, तो कंपनी स्वयं इन टेंट को फिक्स करती है. सुंदरढूंगा का अर्थ ही सुंदर पत्थरों की घाटी बताया जाता है. यहां से मक्तोली, मृगथुनी और पवालीद्वार जैसी ऊंची हिमालयी चोटियों के नजारे दिखाई देते हैं. यही वजह है कि ट्रेकिंग प्रेमियों के बीच यह मार्ग खास आकर्षण रखता है.