जिस जगह पत्थरों में दर्ज है लौह युग का इतिहास, आज वहीं कचरे का ढेर, अनमोल पुरातात्विक विरासत पर संकट

जिस जगह पत्थरों में दर्ज है लौह युग का इतिहास, आज वहीं कचरे का ढेर, अनमोल पुरातात्विक विरासत पर संकट


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हैदराबाद की लौह युग की विरासत प्लास्टिक और मलबे में गुम हो रही

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Hyderabad Hindi News: हैदराबाद की हजारों साल पुरानी लौह युग की विरासत, हस्मतपेट केर्न्स, आज प्रशासनिक उपेक्षा और स्थानीय लापरवाही के कारण प्लास्टिक और मलबे के नीचे दबकर गुम हो रही है. यह महत्वपूर्ण पुरातात्विक स्थल, जहां प्राचीन कंकाल और औजार मिले थे, अब कचराघर में तब्दील हो चुका है.

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हैदराबाद: तेलंगाना की राजधानी हैदराबाद सिर्फ चारमीनार या गोलकोंडा किले तक ही सीमित नहीं है, बल्कि इसका इतिहास हजारों साल पुराना है. सिकंदराबाद के पास हस्मतपेट में स्थित महापाषाण कालीन स्थल हस्मतपेट केर्न्स इस बात का जीता-जागता सबूत है. करीब 2,500 से 3,000 साल पुराना यह ऐतिहासिक स्थल आज प्रशासनिक उपेक्षा और स्थानीय लोगों की लापरवाही के कारण कचराघर में तब्दील हो चुका है.

इतिहास विशेषज्ञ रमेश विनेयक के अनुसार यह स्थल लौह युग का एक बेहद महत्वपूर्ण कब्रगाह क्षेत्र है. उस दौर में मृतकों के अवशेषों को पत्थरों के बड़े स्लैब से बने डोलमेन में रखा जाता था और उसके चारों ओर बड़े ग्रेनाइट पत्थरों का गोलाकार घेरा तैयार किया जाता था, जिसे केर्न सर्किल कहा जाता है। उस समय के लोग परलोक जीवन में विश्वास रखते थे, इसलिए शवों के साथ मिट्टी के विशेष बर्तन, लोहे के हथियार और औजार भी दफनाए जाते थे.

इतिहास को समझने में काफी मदद मिली
इस पुरातात्विक स्थल की खोज 19वीं सदी में हुई थी. इसके बाद 1930 के दशक में हैदराबाद के निजाम के पुरातत्व विभाग ने यहां खुदाई कराई. 1970 के दशक और फिर 2001 में हुए उत्खनन के दौरान यहां से प्राचीन कंकाल, टेराकोटा के बर्तन और लोहे के औजार बरामद हुए थे, जिससे हैदराबाद के प्रागैतिहासिक इतिहास को समझने में काफी मदद मिली.

बढ़ते शहरीकरण के बीच आसपास के इलाकों में अतिक्रमण का खतरा
इतना समृद्ध इतिहास होने के बावजूद आज इस धरोहर की हालत बेहद दयनीय है. सुरक्षित टीन शेड के नीचे मौजूद इस प्राचीन ढांचे के चारों तरफ प्लास्टिक की थैलियां, घरेलू कचरा, बोतलें और मलबा बिखरा पड़ा है. सुरक्षा घेरा और उचित देखरेख न होने से स्थानीय लोग इसे कूड़ादान समझकर इस्तेमाल कर रहे हैं. तेजी से बढ़ते शहरीकरण के बीच आसपास के इलाकों में अतिक्रमण का खतरा भी गहराने लगा है.

सूचना बोर्ड लगाकर सुरक्षाकर्मी तैनात किए जाएं
धरोहर प्रेमियों का कहना है कि यह स्थल शहर की सबसे पुरानी सभ्यताओं की निशानी है. यदि समय रहते पुरातत्व विभाग और स्थानीय प्रशासन ने इसकी सुध नहीं ली, तो आने वाली पीढ़ियां इस अनमोल विरासत से हमेशा के लिए वंचित हो जाएंगी. लोगों की मांग है कि पूरे परिसर की सफाई कराई जाए, मजबूत बाउंड्री वॉल बने और यहां सूचना बोर्ड लगाकर सुरक्षाकर्मी तैनात किए जाएं.



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