JNU से पढ़ाई, UPSC में 454वीं रैंक, दिल्ली की अस्मिता लाल कैसे बनीं IAS?

JNU से पढ़ाई, UPSC में 454वीं रैंक, दिल्ली की अस्मिता लाल कैसे बनीं IAS?


UPSC Success Story, IAS Asmita Lal Profile: उत्तर प्रदेश कैडर की 2015 बैच की आईएएस अधिकारी अस्मिता लाल एक बार फिर चर्चा में हैं. बागपत की जिलाधिकारी के तौर पर करीब डेढ़ साल तक काम करने के बाद अब उन्हें उत्तर प्रदेश सरकार में नई जिम्मेदारी दी गई है.22 सितंबर से वह विशेष सचिव, पिछड़ा वर्ग कल्याण विभाग के पद पर तैनात हैं. इसके साथ ही उन्हें निदेशक, पिछड़ा वर्ग कल्याण और उत्तर प्रदेश पिछड़ा वर्ग कल्याण निगम के प्रबंध निदेशक की जिम्मेदारी भी दी गई है.

अस्मिता लाल का प्रशासनिक सफर भी काफी दिलचस्प रहा है. दिल्ली से पढ़ाई शुरू करने वाली अस्मिता ने मुंबई विश्वविद्यालय से मनोविज्ञान में ग्रेजुएशन किया और इसके बाद जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (JNU) से पब्लिक पॉलिसी और मैनेजमेंट में पोस्ट ग्रेजुएशन किया. UPSC की तैयारी के दौरान उन्होंने एक नहीं, बल्कि अलग-अलग प्रयासों में सफलता हासिल की और आखिरकार तीसरे प्रयास में आईएएस बनने का सपना पूरा किया.

दिल्ली की रहने वाली हैं अस्मिता लाल

अस्मिता लाल का जन्म 17 दिसंबर 1989 को हुआ था और वह मूल रूप से नई दिल्ली की रहने वाली हैं. उनके पिता डॉ.रविंद्र कुमार भारतीय रेलवे कार्मिक सेवा यानी IRPS में अधिकारी रहे हैं.उनके पति आलोक यादव भी आईएएस अधिकारी हैं.शिक्षा की बात करें तो अस्मिता लाल ने मुंबई विश्वविद्यालय से मनोविज्ञान में बीए किया है. इसके बाद उन्होंने दिल्ली के जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (JNU) से पब्लिक पॉलिसी एंड मैनेजमेंट में पोस्ट ग्रेजुएट डिग्री हासिल की.

दूसरे प्रयास में UPSC पास, तीसरे प्रयास में बनीं IAS

अस्मिता लाल ने संघ लोक सेवा आयोग यानी UPSC की सिविल सेवा परीक्षा में सफलता हासिल करने के लिए लगातार प्रयास किए.पहले प्रयास में उन्हें सफलता नहीं मिली.इसके बाद उन्होंने दूसरे प्रयास में UPSC परीक्षा पास की और भारतीय रेलवे लेखा सेवा (IRAS) हासिल की लेकिन उनका लक्ष्य आईएएस बनना था इसलिए उन्होंने एक और प्रयास किया.तीसरे प्रयास में उन्होंने UPSC सिविल सेवा परीक्षा 2014 में ऑल इंडिया 454वीं रैंक हासिल की.इसके बाद उन्हें भारतीय प्रशासनिक सेवा के लिए चुना गया और उत्तर प्रदेश कैडर मिला.इस तरह UPSC में तीसरे प्रयास के बाद उनका आईएएस बनने का सपना पूरा हुआ.

2015 बैच की IAS अधिकारी हैं अस्मिता लाल

अस्मिता लाल 2015 बैच की IAS अधिकारी हैं. लाल बहादुर शास्त्री राष्ट्रीय प्रशासन अकादमी (LBSNAA), मसूरी में प्रशिक्षण लेने के बाद उन्होंने उत्तर प्रदेश में प्रशासनिक सेवा की शुरुआत की. वर्ष 2016 में अलीगढ़ में सहायक मजिस्ट्रेट के तौर पर उन्होंने अपनी प्रशासनिक जिम्मेदारी संभाली. इसके बाद उनके करियर में कई महत्वपूर्ण पद आए.वह मुरादाबाद में ज्वाइंट मजिस्ट्रेट रहीं.इसके बाद लखनऊ में शासन में विशेष सचिव के तौर पर भी काम किया.वह गाजियाबाद की मुख्य विकास अधिकारी (CDO) भी रहीं.इसके अलावा उन्होंने कानपुर में उत्तर प्रदेश राज्य औद्योगिक विकास प्राधिकरण (UPSIDA) की ACEO के तौर पर भी जिम्मेदारी संभाली.इसके बाद उन्हें बागपत का जिलाधिकारी बनाया गया.

बागपत की 349 दिन संभाली कमान

अस्मिता लाल ने जनवरी 2025 में बागपत के जिलाधिकारी के तौर पर जिम्मेदारी संभाली थी. वह बागपत की 31वीं जिला मजिस्ट्रेट बनी थीं.बागपत में अपने कार्यकाल के दौरान वह कई प्रशासनिक और सामाजिक पहलों को लेकर चर्चा में रहीं. उनके कार्यकाल में जिले में स्वास्थ्य, पशु कल्याण और महिलाओं से जुड़े कई प्रयास किए गए.सितंबर 2026 में उनका बागपत के डीएम पद से तबादला कर दिया गया.

नेत्रदान का संकल्प लेने वाली पहली महिला IAS

अस्मिता लाल अपने सामाजिक सरोकारों को लेकर भी चर्चा में रही हैं. उन्होंने सार्वजनिक रूप से मरणोपरांत नेत्रदान करने का संकल्प लिया था.उपलब्ध जानकारी के अनुसार ऐसा संकल्प लेने वाली वह उत्तर प्रदेश की पहली महिला आईएएस अधिकारी हैं. उन्होंने नेत्रदान के फैसले को इस सोच से जोड़ा था कि मृत्यु के बाद उनकी आंखें किसी दूसरे व्यक्ति की जिंदगी में रोशनी ला सकें.

बागपत को प्रदेश में शीर्ष पर पहुंचाया

बागपत की डीएम रहते हुए अस्मिता लाल का नाम जिले में आयुष्मान भारत प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना के बेहतर प्रदर्शन को लेकर भी सामने आया.बागपत में आयुष्मान योजना के तहत 123 करोड़ रुपये से अधिक के क्लेम दर्ज किए गए.इस आंकड़े के साथ बागपत पूरे उत्तर प्रदेश में शीर्ष पर रहा.इस उपलब्धि को जिले में स्वास्थ्य सेवाओं और आयुष्मान योजना के इस्तेमाल से जोड़कर देखा गया.

बेसहारा जानवरों के लिए बनाए शेल्टर

अस्मिता लाल ने बागपत में बेसहारा पशुओं के लिए भी एक अलग तरह की पहल की.उन्होंने पुराने टायरों और प्लास्टिक ड्रमों का इस्तेमाल करके कम लागत वाले शेल्टर बनवाए.इन शेल्टरों को बेसहारा और आवारा जानवरों को सहारा देने के लिए तैयार किया गया था.इसी तरह उन्होंने पक्षियों के लिए ‘बर्ड टॉवर’ और जरूरतमंद लोगों के लिए ‘बर्तन बैंक’ जैसी पहल भी शुरू की.बागपत में काम करने के दौरान उनका लंगूर के लिए अपनी कुर्सी छोड़ने और किसानों के साथ बैठकर भोजन करने का वीडियो भी सोशल मीडिया पर चर्चा में रहा.

महिलाओं के लिए ‘नीरा’ पहल

बागपत में महिलाओं से जुड़े मुद्दों पर भी अस्मिता लाल की पहल सामने आई. उन्होंने ‘नीरा’ नाम से एक पहल शुरू की, जिसके तहत महिलाओं को मासिक धर्म के दौरान इस्तेमाल करने के लिए सूती सैनिटरी पैड उपलब्ध कराए गए.इस पहल का उद्देश्य महिलाओं को मासिक धर्म के दौरान जरूरी स्वच्छता सामग्री उपलब्ध कराना था.

कांवड़ यात्रा के दौरान भी चर्चा में रहीं

बागपत डीएम के तौर पर अस्मिता लाल सावन 2026 की कांवड़ यात्रा के दौरान भी चर्चा में रहीं. इस दौरान श्रद्धालुओं पर पुष्प वर्षा करते हुए उनकी तस्वीरें सोशल मीडिया पर वायरल हुई थीं.इससे पहले भी बागपत में उनकी अलग-अलग सामाजिक और प्रशासनिक पहलों की तस्वीरें और वीडियो सोशल मीडिया पर सामने आते रहे हैं.

पिछड़ा वर्ग कल्याण विभाग में संभालेंगी नई जिम्मेदारी

बागपत के डीएम पद से तबादले के बाद 22 सितंबर 2026 से अस्मिता लाल को उत्तर प्रदेश सरकार में विशेष सचिव, पिछड़ा वर्ग कल्याण बनाया गया है.इसके साथ ही वह निदेशक, पिछड़ा वर्ग कल्याण और प्रबंध निदेशक, पिछड़ा वर्ग कल्याण निगम, उत्तर प्रदेश सरकार की जिम्मेदारी भी संभालेंगी.इस तरह अलीगढ़ में सहायक मजिस्ट्रेट के रूप में प्रशासनिक करियर शुरू करने वाली अस्मिता लाल अब उत्तर प्रदेश सरकार में वरिष्ठ जिम्मेदारी संभाल रही हैं. उनके अब तक के सफर में अलीगढ़, मुरादाबाद, लखनऊ, गाजियाबाद, कानपुर और बागपत जैसे स्थानों पर अलग-अलग प्रशासनिक भूमिकाएं शामिल रही हैं.



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