Parenting Tips: घर में दूसरे बच्चे की किलकारी गूंजना माता-पिता के लिए खुशी का बड़ा पल होता है, लेकिन इस खुशी के साथ घर की दिनचर्या भी बदल जाती है. बड़े बच्चे के लिए अचानक सब कुछ थोड़ा अलग लग सकता है. जो माता-पिता अब तक उसका पूरा ध्यान रखते थे, वे छोटे बच्चे में ज्यादा व्यस्त नजर आते हैं. ऐसे में बड़े बच्चे के मन में अनजाने में यह सवाल आ सकता है कि अब मम्मी-पापा का प्यार पहले जैसा रहेगा या नहीं.
यही वजह है कि दूसरे बच्चे के आने के बाद सिर्फ नवजात की देखभाल ही नहीं, भाई-बहन के रिश्ते पर भी ध्यान देना जरूरी है, अगर शुरुआत से दोनों बच्चों को साथ लेकर चला जाए तो घर का माहौल ज्यादा सहज और प्यार भरा रह सकता है.
दूसरे बच्चे के आने पर बड़े बच्चे को दें खास जगह
जब घर में छोटा बच्चा आता है तो स्वाभाविक रूप से माता-पिता का काफी समय उसकी जरूरतों में चला जाता है. दूध पिलाना, सुलाना, कपड़े बदलना और उसकी नींद का ध्यान रखना रोज की दिनचर्या का हिस्सा बन जाता है. इस दौरान बड़े बच्चे को यह महसूस हो सकता है कि अब उसकी अहमियत कम हो गई है. ऐसे समय में उससे बार-बार यह कहना मददगार हो सकता है कि छोटा भाई या बहन आने के बाद भी वह माता-पिता के लिए उतना ही खास है. उसके साथ रोज कुछ समय सिर्फ उसके लिए रखा जा सकता है. यह समय बहुत लंबा होना जरूरी नहीं है. साथ बैठकर बात करना, कहानी पढ़ना, खेलना या उसके साथ खाना खाना भी उसे जुड़ाव का एहसास दे सकता है.
बड़े बच्चे पर जिम्मेदारी का बोझ न डालें
कई घरों में बड़े बच्चे से कहा जाता है कि अब वह बड़ा भाई या बड़ी बहन है इसलिए उसे छोटे बच्चे का ध्यान रखना चाहिए. प्यार से छोटी-मोटी मदद लेना ठीक है, लेकिन उसे देखभाल की जिम्मेदारी देना सही तरीका नहीं है. मिसाल के तौर पर वह डायपर लाने, कपड़े चुनने या बच्चे के लिए खिलौना देने जैसी छोटी चीजों में शामिल हो सकता है, लेकिन अगर वह मदद नहीं करना चाहता तो उसे मजबूर करने के बजाय उसकी इच्छा का सम्मान करना बेहतर है. इससे छोटे बच्चे के प्रति अपनापन स्वाभाविक रूप से विकसित होने की गुंजाइश रहती है.
दोनों बच्चों की तुलना करने से बचें
भाई-बहन के रिश्ते में तुलना अक्सर अनावश्यक दबाव पैदा कर सकती है. बड़े बच्चे से यह कहना कि छोटा बच्चा कितना शांत है या छोटा बच्चा बड़े की तरह क्यों नहीं करता, दोनों के लिए अच्छा नहीं होता. हर बच्चे का स्वभाव और जरूरतें अलग होती हैं. माता-पिता अगर दोनों बच्चों की अलग-अलग खूबियों को पहचानें तो घर में प्रतिस्पर्धा कम करने में मदद मिल सकती है. बड़े बच्चे की पढ़ाई, खेल या किसी छोटी उपलब्धि की तारीफ उसके छोटे भाई या बहन से तुलना किए बिना की जा सकती है.
साथ खेलने के मौके बनाएं
बच्चों की उम्र में अंतर होने पर भी कुछ ऐसी गतिविधियां चुनी जा सकती हैं जिनमें दोनों शामिल हो सकें. बड़ा बच्चा छोटे को किताब दिखा सकता है, उसके लिए लोरी गा सकता है या माता-पिता की मौजूदगी में उसके साथ कुछ देर खेल सकता है. शुरुआत में दोनों बच्चों की दोस्ती बहुत गहरी न दिखे तो भी चिंता करने की जरूरत नहीं है. भाई-बहन की बॉडिंग समय के साथ बनती है. रोजमर्रा के छोटे-छोटे अनुभव ही आगे चलकर उनके रिश्ते की नींव मजबूत कर सकते हैं.
प्यार बराबर हो, तरीका अलग हो सकता है
दोनों बच्चों को एक जैसा समय या बिल्कुल एक जैसी चीजें देना हमेशा संभव नहीं होता. छोटे बच्चे को उसकी उम्र के हिसाब से ज्यादा देखभाल की जरूरत हो सकती है, जबकि बड़ा बच्चा बातचीत, खेल और भावनात्मक ध्यान चाहता है.