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सरकारों की लापरवाही और लोगों में शिक्षा के प्रति जागरूकता की कमी से कई बच्चों को पढ़ने की उम्र में मजदूरी करना पड़ता है. इससे वह कुछ सीखने और अपनी समझ विकसित करने की उम्र में काम में खप रहे होते हैं. बाल श्रम को लेकर कानून है लेकिन, कानून अपराध के बाद काम करता है. बाल श्रम को अपराध बनाया गया है लेकिन, बच्चों को पढ़ने की उम्र में काम की जरूरत ही ना पड़े इसके लिए समाज को ही आगे आना पड़ेगा. कुछ लोग अपने स्तर पर बच्चों को काम की जगह शिक्षा की तरफ मोड़ने का बेहतरीन प्रयास कर रहे हैं. ऐसा ही प्रयास सीतामढ़ी के एक गांव में देखने को मिला.
सीतामढ़ी: बिहार के सीतामढ़ी जिले के सुरसंड प्रखंड अंतर्गत बघारी पंचायत ने बाल संरक्षण की दिशा में एक ऐतिहासिक मुकाम हासिल किया है. पंचायत के मुखिया-सह-अध्यक्ष, पंचायत स्तरीय बाल कल्याण एवं संरक्षण समिति, पद्मराज भारद्वाज उर्फ ‘पिंटू’ के नेतृत्व में बघारी को प्रखंड की पहली बाल श्रम मुक्त पंचायत घोषित किया गया. मुखिया पिंटू ने पंचायतवासियों, प्रशासनिक अधिकारियों, पुलिस, श्रम विभाग और अदिथी कवच परियोजना के साथ मिलकर एक व्यापक रणनीति बनाई, जिसके तहत हर बच्चे को श्रम से दूर कर शिक्षा की मुख्यधारा से जोड़ा गया. उन्होंने पंचायत स्तर पर एक मजबूत निगरानी तंत्र स्थापित किया, जिससे बच्चों के सुरक्षित बचपन और अधिकारों को धरातल पर सुनिश्चित किया जा सका.
जागरूकता अभियान और कानूनी दायित्वों का बोध
पंचायत को बाल श्रम से मुक्त बनाने और इस स्थिति को निरंतर बनाए रखने के लिए मुखिया पद्मराज भारद्वाज ने बहुआयामी अभियान चलाया. उन्होंने स्पष्ट किया कि बाल श्रम का मुख्य कारण आर्थिक तंगी के साथ-साथ कम लागत में श्रम कराने की प्रवृत्ति है. इसे रोकने के लिए उन्होंने अभिभावकों के साथ-साथ नियोजकों को भी कानूनी जिम्मेदारियों के प्रति सजग किया. उनके मार्गदर्शन में घर-घर जागरूकता अभियान चलाए गए, ग्राम स्तर पर संवाद स्थापित किए गए और बाल संरक्षण समिति की बैठकों के माध्यम से बच्चों के अधिकारों का प्रचार-प्रसार किया गया. उन्होंने इसे महज एक घोषणा न मानकर पंचायत की स्थायी प्राथमिकता के रूप में स्थापित किया है.
18 माह में बाल विवाह मुक्त पंचायत का संकल्प
बाल श्रम उन्मूलन की बड़ी सफलता के बाद मुखिया पद्मराज भारद्वाज ने सामाजिक कुरीतियों के खिलाफ अपने अभियान को अगले चरण में पहुंचा दिया है. विशेष ग्राम सभा में ग्रामीणों की सर्वसम्मति से उन्होंने आगामी 18 महीनों के भीतर बघारी पंचायत को पूरी तरह ‘बाल विवाह मुक्त’ बनाने का संकल्प लिया. इस लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए मुखिया ने एक स्पष्ट कार्ययोजना साझा की, जिसके अंतर्गत पंचायत स्तर पर निरंतर जन-जागरूकता, परिवारों के साथ सीधा संवाद और प्रशासनिक दिशा-निर्देशों का सख्ती से पालन कराया जाएगा.
सामुदायिक सहभागिता और विद्यालयों की सक्रिय भूमिका
बाल विवाह की रोकथाम के लिए मुखिया के नेतृत्व में विद्यालयों, शिक्षकों, किशोर-किशोरियों और स्थानीय समुदाय की सक्रिय सहभागिता सुनिश्चित की जाएगी. मुखिया पिंटू ने कहा कि बच्चों के सुरक्षित भविष्य और सर्वांगीण विकास के लिए पंचायत, शिक्षा विभाग और सामाजिक संगठनों के बीच मजबूत समन्वय जरूरी है. बघारी पंचायत का यह सामूहिक प्रयास न केवल सुरसंड प्रखंड बल्कि पूरे सीतामढ़ी जिले के लिए बाल संरक्षण, शिक्षा और सामाजिक चेतना का एक उत्कृष्ट और प्रेरणादायक उदाहरण बन चुका है.