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आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) के इस दौर में समय के साथ कई चीजें बहुत आसान होती जा रही हैं. एक तरफ जहां जिले के सरकारी अस्पतालों में कहीं ईलाज नहीं मिलता तो कहीं डॉक्टर नहीं होते वहीं अब एक्स-रे जैसी जांच की सुविधा गांव-गांव तक आसानी से पहुंच रही हैं. एआई से लैस ये मशीनें….
जमुई: बिहार के जमुई जिले में अब एक्स-रे कराने के लिए मरीजों को अस्पताल भी नहीं जाना होगा. जमुई में अब मोबाइल यूनिट के जरिए एक्स-रे जांच की सुविधा गांव-गांव पहुंच रही है. खास बात यह है कि रिपोर्ट के लिए इंतजार भी नहीं करना पड़ता है. हाथों-हाथ लोगों को रिपोर्ट भी मिल जाती है. जिले में स्वास्थ्य विभाग के यक्ष्मा केंद्र के द्वारा पोर्टेबल डिजिटल एक्स-रे मशीन का इस्तेमाल कर गांव-गांव जाकर लोगों की जांच की जा रही है. इसमें आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी एआई आधारित तकनीक भी लगी हुई है.
सुदूरवर्ती इलाकों में पहुंच रही है जांच
राज्य स्वास्थ्य समिति के सहयोग से जिला यक्ष्मा केंद्र को ऐसे पोर्टेबल डिजिटल एक्स-रे मशीन और प्रशिक्षित एक्स-रे तकनीशियन उपलब्ध कराए गए हैं. जमुई जिले के पांच प्रखंडों में मोबाइल यूनिट के जरिए टीबी की जांच के लिए इसका इस्तेमाल किया जा रहा है. यूनिट सुदूरवर्ती गांवों और उन इलाकों तक पहुंच रही है, जहां स्वास्थ्य केंद्र तक पहुंचना कई लोगों के लिए आसान नहीं होता. यहां टीबी के संभावित लक्षण वाले लोगों की मौके पर ही जांच की जा रही है और एक्स-रे के लिए मरीज को अस्पताल भेजने की जरूरत नहीं पड़ती.
नहीं करना पड़ता है लंबा इंतजार
सबसे दिलचस्प बात यह है कि जांच कराने के बाद मरीज को रिपोर्ट के लिए लंबे समय तक इंतजार नहीं करना पड़ता. मौके पर ही डिजिटल एक्स-रे किया जाता है और मशीन में लगी एआई आधारित तकनीक एक्स-रे इमेज का तत्काल विश्लेषण कर टीबी से जुड़े संदिग्ध मामलों की पहचान में स्वास्थ्यकर्मियों की मदद करती है. चिकित्सा पदाधिकारी अखिलेश कुमार ने बताया कि मोबाइल एक्स-रे यूनिट के जरिए स्वास्थ्य विभाग की कोशिश है कि टीबी की जांच को लोगों के घर और गांव के करीब तक पहुंचाया जाए. उन्होंने कहा कि एक्स-रे तस्वीर का विश्लेषण कर संदिग्ध मामलों को चिन्हित करने में मदद करती है, जिसके बाद चिकित्सकीय स्तर पर आगे की जांच और उपचार की प्रक्रिया शुरू की जाती है.
लोग बोले हो रही है बहुत सहूलियत
इसे लेकर चिंहुटिया गांव के ग्रामीण रूपा देवी ने बताया कि मेरे सीने में दर्द की शिकायत थी. अस्पताल बहुत दूर है लेकिन अब गांव में ही जांच हो रही है, तो इससे काफी सहूलियत हो गई है. ग्रामीण दुलारी देवी का भी यही कहना है कि गांव में स्वास्थ्य विभाग की टीम के द्वारा एक्सरे किया जा रहा है. पहले भी इस तरह की टीम आई थी, लेकिन एक्स-रे के लिए अस्पताल ही जाना पड़ता था. वह चीज भी गांव में होने से हमें अस्पताल जाने से बचाना पड़ रहा है.
गांव के ही ग्रामीण नीरज कुमार बताया कि यहां से सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र की दूरी करीब दस किलोमीटर के आसपास है, जहां जाने में काफी फजीहत होती थी. स्वास्थ्य विभाग की टीम यहां आ रही है तो हमारी परेशानियां थोड़ी कम हुई हैं और लोगों को घर पर ही इलाज मिल रहा है.