डकैतों के लिए बदनाम चंबल अब बनेगा टूरिज्म डेस्टिनेशन, दुबई की तर्ज पर होगी ‘रैविन सफारी’, बिता सकेंगे रात

डकैतों के लिए बदनाम चंबल अब बनेगा टूरिज्म डेस्टिनेशन, दुबई की तर्ज पर होगी ‘रैविन सफारी’, बिता सकेंगे रात


भोपाल. मध्य प्रदेश में चंबल की पहचान अब सिर्फ बीहड़ और डकैतों के इलाके के तौर पर नहीं, बल्कि एडवेंचर और नेचर टूरिज्म के बड़े केंद्र के रूप में बनाने की तैयारी है. मध्य प्रदेश पर्यटन बोर्ड (MPTB) ग्वालियर, मुरैना, भिंड और श्योपुर में वैली टूरिज्म को बढ़ावा देने की प्लानिंग कर रही है. इसके लिए पर्यटन बोर्ड ने पर्यटन संचालकों, निवेशकों, डेवलपर्स, होटल और हॉस्पिटैलिटी कंपनियों, स्टार्टअप्स और अन्य संस्थाओं से Expression of Interest (EOI) मांगा है. मकसद चंबल को देश ही नहीं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर एडवेंचर, प्रकृति और अनुभव आधारित पर्यटन के लिए पहचान दिलाना है.

टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के मुताबिक, इस योजना का सबसे खास अट्रैक्शन ‘चंबल रैविन सफारी’ हो सकता है. इसे दुबई की डेजर्ट सफारी की तर्ज पर विकसित करने की योजना है. फर्क इतना होगा कि यहां रेगिस्तान के रेत के टीले नहीं, बल्कि चंबल की गहरी और अनोखी बीहड़ घाटियां होंगी. सफारी के दौरान पर्यटक 4 पहिया गाड़ियों से बीहड़ों में घूम सकेंगे. इसके अलावा टेंट या ग्लैम्पिंग यूनिट में रात बिताने, लोकल फूड का स्वाद लेने, लोक कलाकारों की परफॉर्मेंस जैसी चीजों का लुत्फ उठा सकेंगे.

चंबल में टूरिस्ट के लिए होंगी ये एक्टिविटी

चंबल को एक बड़े पर्यटन सर्किट के रूप में विकसित करने के लिए कई गतिविधियों को शामिल करने की योजना है. इनमें ऑफ-रोड सफारी, रैविन बाइकिंग, ट्रेकिंग, जिपलाइनिंग, रोप कोर्स, कयाकिंग और कैनोइंग, बर्डवॉचिंग, नेचर ट्रेल, एडवेंचर कैंपिंग, ग्लैम्पिंग, नदी भ्रमण और सनराइड और सनसेट प्वाइंट जैसी एक्टिविटी होगी. इसके साथ ही टूरिस्ट्स को गांवों की सैर, पारंपरिक भोजन, लोक कला, हस्तशिल्प और ग्रामीण जीवन से भी जोड़ा जाएगा.

13 अक्टूबर तक होंगे आवेदन

पर्यटन बोर्ड की योजना के तहत सोमवार को प्री-बिड मीटिंग भी हुई. ऑनलाइन आवेदन 30 सितंबर 2026 से शुरू होंगे. इच्छुक संस्थाएं मध्य प्रदेश ई-प्रोक्योरमेंट पोर्टल के जरिए 13 अक्टूबर 2026 को दोपहर 3 बजे तक आवेदन जमा कर सकेंगी. ईओआई 14 अक्टूबर 2026 को भोपाल में खोली जाएगी. चयनित एजेंसी चंबल में उपयुक्त स्थानों की पहचान करेगी. इसके बाद मास्टर प्लान तैयार करने, बाजार और तकनीकी संभावनाओं का अध्ययन करने, निवेश और कमाई का मॉडल तैयार करने और योजना को चरणबद्ध तरीके से लागू करने की जिम्मेदारी होगी.

डिजिटल प्लेटफॉर्म और पर्यावरण का ध्यान

चंबल क्षेत्र में पर्यटन विकसित करते समय पर्यावरण संरक्षण पर भी जोर दिया जाएगा. संवेदनशील इलाकों में निर्माण को कम रखने, पर्यटकों की संख्या नियंत्रित करने, कचरा प्रबंधन, जल संरक्षण और प्लास्टिक का इस्तेमाल कम करने जैसे कदम उठाने होंगे. चंबल की नदियां, बीहड़, वन्यजीव, ऐतिहासिक स्थल और स्थानीय संस्कृति इस पूरे पर्यटन मॉडल का हिस्सा होंगे. पर्यटकों की सुविधा के लिए एक इंटीग्रेटेड डिजिटल प्लेटफॉर्म विकसित किया जा सकता है. इसके जरिए ऑनलाइन टिकटिंग, सफारी और अन्य गतिविधियों की बुकिंग, होटल और ग्लैम्पिंग की बुकिंग, भुगतान, मैप, सुरक्षा संबंधी जानकारी और पर्यटकों का फीडबैक उपलब्ध कराया जा सकता है.



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