Bageshwar News : दोपहर बाद जोखिम ज्यादा…पिंडारी ग्लेशियर जाने के लिए भूलकर भी न करें ये गलती

Bageshwar News : दोपहर बाद जोखिम ज्यादा…पिंडारी ग्लेशियर जाने के लिए भूलकर भी न करें ये गलती


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Pindari Glacier Trek : पिंडारी समेत बागेश्वर के सभी ग्लेशियर ट्रेकिंग के लिए खोल दिए गए हैं, लेकिन मौसम खराब होने की वजह से सुंदरढूंगा, पिंडारी और कफनी ग्लेशियर की ओर गए 43 भारतीय और विदेशी ट्रेकरों को जहां थे, वहीं रोक दिया गया. बागेश्वर के पत्रकार रमेश कृषक पांडे लोकल 18 से बताते हैं कि पिंडारी ग्लेशियर का ट्रेक कई दिनों में पूरा होता है. ऐसे में केवल जिस दिन ट्रेक शुरू करना है, उसी दिन का मौसम देखना काफी नहीं है. बिना अनुमति या प्रतिबंधित क्षेत्र में जाने से बचें. ट्रेक के दौरान स्थानीय गाइड या संबंधित कर्मचारियों की सलाह को नजरअंदाज न करें.

बागेश्वर. पिंडारी ग्लेशियर कुमाऊं के प्रमुख और लोकप्रिय ग्लेशियर ट्रेक में शामिल है. हर साल बड़ी संख्या में देश-विदेश से पर्यटक और ट्रेकर यहां पहुंचते हैं. इस साल भी 15 सितंबर से पिंडारी ग्लेशियर समेत जिले के प्रमुख ग्लेशियर ट्रेकिंग के लिए खोल दिए गए हैं. हालांकि मौसम खराब होने पर ट्रेकरों की सुरक्षा को देखते हुए प्रशासन को ट्रेकिंग रोकने का निर्णय भी लेना पड़ रहा है. बीते दिनों लगातार दो दिन बारिश होने से सुंदरढूंगा, पिंडारी और कफनी ग्लेशियर की ओर गए 43 भारतीय और विदेशी ट्रेकरों को सुरक्षा के लिहाज से जहां थे, वहीं रोक दिया गया था. किसी तरह की अप्रिय घटना नहीं हुई. मौसम में सुधार होने के बाद ट्रेकरों को दोबारा आगे बढ़ने की अनुमति दी गई. यह घटनाक्रम बताता है कि उच्च हिमालयी क्षेत्रों में ट्रेकिंग के दौरान मौसम की जानकारी और प्रशासन की गाइडलाइन को नजरअंदाज करना भारी पड़ सकता है.

चार से पांच दिन का ट्रेक

बागेश्वर के वरिष्ठ पत्रकार रमेश कृषक पांडे लोकल 18 से बताते हैं कि पिंडारी ग्लेशियर का ट्रेक सामान्य तौर पर कई दिनों में पूरा होता है. ऐसे में केवल जिस दिन ट्रेक शुरू करना है, उसी दिन का मौसम देखना पर्याप्त नहीं है. ट्रेक पर निकलने से पहले अगले चार से पांच दिनों के मौसम का पूर्वानुमान जरूर देखना चाहिए. मौसम खराब होने, भारी बारिश, बर्फबारी या मार्ग में किसी तरह का अलर्ट जारी होने पर स्थानीय प्रशासन के निर्देश को प्राथमिकता दें. ग्लेशियर क्षेत्र में जाने वाले ट्रेकरों को जिला प्रशासन, वन विभाग और स्थानीय स्तर पर जारी निर्देशों का पालन करना चाहिए. बिना अनुमति या प्रतिबंधित क्षेत्र में जाने से बचें. ट्रेक के दौरान स्थानीय गाइड या संबंधित कर्मचारियों की सलाह को नजरअंदाज न करें. मौसम खराब होने पर अगर प्रशासन ट्रेक रोकता है तो उसे अपनी सुरक्षा के लिए लिया गया निर्णय समझें.

सुबह जल्दी शुरू करें 

उच्च हिमालयी क्षेत्रों में मौसम तेजी से बदल सकता है. ऐसे में कोशिश करें कि सुबह करीब सात बजे से ट्रेक शुरू कर निर्धारित पड़ाव तक दोपहर दो बजे के आसपास पहुंच जाएं. देर शाम या मौसम बिगड़ने के बाद ऊंचाई वाले इलाकों में आगे बढ़ने से बचना चाहिए. रात के लिए पहले से सुरक्षित और निर्धारित स्टे वाली जगह की जानकारी रखें. ग्लेशियर क्षेत्र में तापमान कम होने के साथ तेज धूप, ठंडी हवा और बर्फ से त्वचा प्रभावित हो सकती है. इसलिए गर्म कपड़ों के साथ टोपी, दस्ताने, सनग्लास, सनस्क्रीन और बारिश से बचाव के लिए जरूरी सामान साथ रखना चाहिए. पर्याप्त पानी, जरूरी दवाएं, प्राथमिक उपचार सामग्री, पहचान पत्र, मोबाइल पावर बैंक और आवश्यक खाद्य सामग्री भी ट्रेक के अनुसार रखें.

भटक जाओगे रास्ता

पिंडारी ग्लेशियर जैसे ऊंचाई वाले क्षेत्रों में कोहरा और बारिश रास्ते को मुश्किल बना सकते हैं. दृश्यता कम होने पर रास्ता भटकने का खतरा बढ़ जाता है. इसलिए कोहरे, भारी बारिश या मौसम खराब होने की स्थिति में आगे बढ़ने के बजाय सुरक्षित स्थान पर रुकना बेहतर है. ट्रेकिंग का रोमांच तभी सुरक्षित है, जब मौसम, प्रशासन के निर्देश और अपनी क्षमता को ध्यान में रखकर यात्रा की जाए.



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