पीओके के बाद पाकिस्तान का एक और हिस्सा कट कर अलग होने को तैयार है. बलूचिस्तान में जो बगावत की आग फैली है वो ‘फेल्ड मार्शल’ आसिम मुनीर से संभाले नहीं संभल रही है. पाकिस्तानी आर्मी तो यहां से दुम दबाकर भाग चुकी है. यहां पाकिस्तान का कोई नियम-कानून लागू नहीं होता है. यही वजह है कि हाल ही में वहां से गुजर रहे पाकिस्तानी खिलाड़ी भी बलूच लड़ाकों के निशाने पर आ गए. लड़ाकों ने उनकी बस रोककर एक-एक खिलाड़ी और कोच को नीचे उतारा और लूट लिया. उनके मोबाइल, पर्स और सारा कीमती सामान छीन लिया गया. सबसे हैरानी की बात तो ये है कि ये पूरी वारदात बलूचिस्तान के एक बड़े हाईवे पर सरेआम घटी.
पाकिस्तानी खिलाड़ियों के साथ बलूचिस्तान में क्या हुआ?
कराची से एक बड़े प्रांतीय टूर्नामेंट ‘चीफ मिनिस्टर्स गोल्ड कप’ में हिस्सा लेने क्वेटा जा रही ‘कराची डिस्ट्रिक्ट वेस्ट’ की फुटबॉल टीम के साथ बीच रास्ते में ही बंदूक की नोक पर भारी लूटपाट हुई है. मस्तुंग और सरयाब के बीच सुनसान हाईवे पर करीब 12 नकाबपोश हथियारबंद बदमाशों ने खिलाड़ियों से भरी बस को जबरन रुकवाया और बंदूक तानकर हर एक खिलाड़ी का पर्स, मोबाइल फोन, नकदी और कीमती सामान लूट
बताया जा रहा है कि हमलावरों के पास आधुनिक ऑटोमैटिक हथियार थे, जिन्हें देखकर ड्राइवर को मजबूरी में गाड़ी रोकनी पड़ी. इसके बाद बदमाशों ने जो तांडव मचाया, उसके बाद से खिलाड़ी सदमे में हैं.
- खिलाड़ियों को नीचे उतारा गया: बदमाशों ने पिस्टल और बंदूकों के दम पर खिलाड़ियों, कोचों और पूरे सपोर्ट स्टाफ को एक-एक करके बस से नीचे उतरने का फरमान सुनाया.
- सामान की लूटपाट की गई: बस से नीचे उतारने के बाद अपराधियों ने सभी खिलाड़ियों की तलाशी ली. उन्होंने खिलाड़ियों के मोबाइल फोन, वॉलेट, नकदी, घड़ियां और जो भी कीमती सामान मिला, सब अपने कब्ज में ले लिया.
- बंदूक के कुंदों से वार: लूटपाट के दौरान जब कुछ खिलाड़ियों ने अपने फोन या पैसे देने में थोड़ी भी हिचकिचाहट दिखाई या विरोध किया, तो बदमाशों ने दरिंदगी दिखाते हुए उन पर बंदूकों के कुंदों से हमला कर दिया और उन्हें चोटिल कर दिया.
टीम के मैनेजर जुल्फिकार अली भुट्टो ने इस पूरी घटना का खौफनाक ब्योरा देते हुए बताया, ‘हथियारबंद लोगों ने सभी यात्रियों को बस से नीचे उतरने का आदेश दिया. इसके बाद उन्होंने सबके मोबाइल फोन, पैसे और बाकी सामान लूट लिया. इतना ही नहीं, उन्होंने कुछ यात्रियों पर बंदूकों के कुंदों से हमला भी किया और उनके साथ मारपीट की’.
पाई-पाई को तरसे खिलाड़ी: क्वेटा पहुंचने पर मिली मामूली राहत
खिलाड़ियों को बेबस छोड़कर हमलावर अंधेरे का फायदा उठाते हुए आसानी से मौके से फरार हो गए. इस लूटपाट के बाद खिलाड़ियों की हालत बेहद तरसने वाली हो गई. उनके पास न तो अपने परिवार या पुलिस को फोन करने के लिए मोबाइल बचा था और न ही आगे के सफर या खाने-पीने के लिए एक भी रुपया.
किसी तरह खौफ और मानसिक सदमे के साए में सफर पूरा करके टीम क्वेटा पहुंची. क्वेटा पहुंचने के बाद टीम प्रबंधन ने तुरंत स्थानीय प्रशासनिक अधिकारियों और बलूचिस्तान के खेल मंत्री से संपर्क साधा और अपने साथ हुई इस दर्दनाक आपबीती की जानकारी दी.
मामले की गंभीरता को देखते हुए बलूचिस्तान के खेल मंत्री ने तुरंत हस्तक्षेप किया और खिलाड़ियों के क्वेटा में रहने और खाने-पीने की व्यवस्था कराने के लिए आपातकालीन तौर पर दैनिक भत्ते का इंतजाम कराया. हालांकि, प्रशासनिक मदद से खिलाड़ियों को पेट भरने के पैसे तो मिल गए, लेकिन जिस मानसिक खौफ और सदमे से वो गुजरे हैं, उसकी भरपाई कर पाना नामुमकिन है.
सुरक्षा चेतावनियों की अनदेखी: वॉर्निंग के बावजूद क्यों गए खिलाड़ी?
इस वारदात के सामने आने के बाद अब सबसे बड़ा सवाल ये उठ रहा है कि जब बलूचिस्तान के ये रास्ते इतने ज्यादा संवेदनशील और खतरनाक थे तो टीम बस से सफर करने के लिए क्यों निकली?
पाकिस्तान फुटबॉल फेडरेशन (PFF) से जुड़ी संस्था ‘सिंध फुटबॉल एसोसिएशन’ के सचिव मुहम्मद आजम ने इस पूरे मामले पर बड़ा खुलासा किया है. उन्होंने बताया कि क्वेटा जाने वाले सड़क और रेल मार्गों पर सुरक्षा के भारी खतरे को देखते हुए पहले ही आधिकारिक चेतावनी जारी की गई थी.
- आधिकारिक एडवाइजरी: सिंध फुटबॉल एसोसिएशन ने राज्य के सभी फुटबॉल क्लबों को सख्त निर्देश जारी किए थे कि वे सुरक्षा स्थिति को देखते हुए बस या ट्रेन से क्वेटा की यात्रा बिल्कुल न करें.
- बाकी टीमों का इंकार: सुरक्षा के इसी गंभीर खतरे के कारण सिंध की मुख्य टीम, पंजाब फुटबॉल एसोसिएशन और खैबर पख्तूनख्वा (KPK) की टीमों ने टूर्नामेंट में भाग लेने से साफ मना कर दिया था.
- कराची वेस्ट का जोखिम: इन तमाम चेतावनियों के बावजूद कराची वेस्ट की लोकल टीम ने बस से ही क्वेटा जाने का जोखिम उठाया और अंत में वे बदमाशों का शिकार बन गए.
मुहम्मद आजम ने दुख जताते हुए कहा, ‘हमने अपनी आधिकारिक सिंध टीम नहीं भेजी थी और कराची के बाकी सभी क्लबों को भी सलाह दी थी कि वो सुरक्षा हालात को देखते हुए बस या ट्रेन से क्वेटा न जाएं. लेकिन कराची वेस्ट की टीम फिर भी आगे बढ़ी और आखिरकार वही हुआ जिसका हमें सबसे ज्यादा डर था’.
असल में इस जोखिम के पीछे खिलाड़ियों और क्लबों की आर्थिक लाचारी भी एक बड़ी वजह है. पाकिस्तान में निचले स्तर के फुटबॉल क्लबों के पास इतना बजट या फंड नहीं होता कि वो अपने खिलाड़ियों को हवाई जहाज से भेज सकें. ऐसे में खिलाड़ियों को ना चाहते हुए भी जान हथेली पर रखकर बस और ट्रेन से सफर करना पड़ता है.
मस्तुंग-सरयाब हाईवे: बलूचिस्तान का नया ‘डेथ ट्रैप’
जिस मस्तुंग और सरयाब के बीच ये वारदात हुई, वो हाईवे अब यात्रियों और खिलाड़ियों के लिए एक ‘डेथ ट्रैप’ यानी मौत का कुआं बन चुका है. बलूचिस्तान का ये रूट अपराधियों, उग्रवादी गुटों और अवैध वसूली करने वाले गिरोहों के लिए सबसे आसान ठिकाना बन गया है.
बलूचिस्तान में आए दिन आम लोगों, व्यापारियों और सरकारी गाड़ियों को निशाना बनाना बेहद कॉमन बात हो चुकी है. ये कोई पहली घटना नहीं है; अभी कुछ ही दिनों पहले डेरा बुगती इलाके से दो स्थानीय क्रिकेटरों का अपहरण कर लिया गया था, जिनका अब तक कोई सुराग नहीं मिल सका है. हाईवे पर पुलिस चौकियों का न होना और गश्त की ढिलाई के कारण हथियारबंद अपराधी बेखौफ घूम रहे हैं और राहगीरों को अपनी बर्बरता का शिकार बना रहे हैं.