चित्रकूट को क्यों कहते हैं पितरों का स्वर्ग, जहां पिण्डदान से मिलती है मुक्ति?
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Chitrakoot News: कहते हैं कि चित्रकूट की धरती पर पितरों का तर्पण करने से उन्हें तुरंत मुक्ति मिल जाती है. पितृ पक्ष के दौरान श्रद्धालु अपने पितरों की आत्मा की शांति के लिए पिंडदान और तर्पण करते हैं. आइए यहां के महत्व के बारे में जानते हैं.
चित्रकूट: धर्म नगरी चित्रकूट को भगवान श्रीराम की तपोस्थली के रूप में जाना जाता है. मान्यता है कि भगवान श्रीराम ने अपने वनवास काल के करीब साढ़े 11 वर्ष चित्रकूट में बिताए थे. इसी धार्मिक आस्था के चलते पितृ पक्ष शुरू होते ही चित्रकूट में श्रद्धालुओं की संख्या बढ़ने लगी है. देश के अलग-अलग हिस्सों से लोग अपने पितरों की आत्मा की शांति के लिए यहां पहुंच रहे हैं और मंदाकिनी नदी के तट पर तर्पण, पिंडदान और दान-पुण्य कर रहे हैं.
अगर यहां के मान्यता की बात करें तो भगवान श्रीराम के वनवास काल के दौरान उनके पिता राजा दशरथ का देहांत हो गया था. इसके बाद भगवान श्रीराम ने चित्रकूट में ही अपने पिता का पिंडदान और तर्पण किया था. इसी मान्यता के कारण चित्रकूट को पितरों के तर्पण और पिंडदान के लिए महत्वपूर्ण धार्मिक स्थल माना जाता है. पितृ पक्ष के दौरान यहां रामघाट समेत मंदाकिनी नदी के विभिन्न घाटों पर श्रद्धालु पहुंचकर विधि-विधान से अपने पितरों का श्राद्ध कर्म करते दिखाई देते हैं.
पितरों के तर्पण और पिंडदान का विशेष महत्व
वहीं रामघाट पर मौजूद पुरोहित संदीप तिवारी ने लोकल 18 को जानकारी में बताया कि चित्रकूट में पितरों के तर्पण और पिंडदान का विशेष धार्मिक महत्व माना जाता है. यह मान्यता भगवान श्रीराम से जुड़ी हुई है. उनका कहना है कि भगवान श्रीराम ने भी चित्रकूट में अपने पिता राजा दशरथ का पिंडदान किया था. इसी आस्था के चलते पितृ पक्ष में बड़ी संख्या में श्रद्धालु चित्रकूट पहुंच रहे हैं और चित्रकूट में मंदाकिनी नदी के तट पर पिंडदान और तर्पण करने की परंपरा सदियों से चली आ रही है.
पितृ खुश, तो देवी-देवता खुश
उन्होंने बताया कि धार्मिक मान्यता में चित्रकूट के राघव प्रयाग का भी विशेष महत्व है. यहां पैसवनी, मंदाकिनी और गायत्री नदियों के संगम को धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जाता है. उन्होंने आगे की जानकारी में बताया कि जिन लोगों के पितृ किसी कारण से परेशान रहते हैं, वह लोग भी चित्रकूट आकर तर्पण और पिंडदान करते हैं. श्रद्धालु अपने पितरों की आत्मा की शांति और मोक्ष की कामना के लिए यहां पूजा अर्चना करते हैं. जब पितृ रूपी जनार्दन पितृ देवता प्रसन्न होते हैं, तो सारे देवी-देवता प्रसन्न हो जाते हैं. उनका कहना है कि चित्रकूट में पिंडदान करने से व्यक्ति की सारी मनोकामना पूरी होती है और दुख-दर्द दूर हो जाते हैं.
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