निठारी की कोठी नंबर D-5, सामने नाली में बच्चों के कंकाल और खिड़की से झांकती ‘कातिल’ निगाहें, कैसे अदालत में बदल गई तस्वीर

निठारी की कोठी नंबर D-5, सामने नाली में बच्चों के कंकाल और खिड़की से झांकती ‘कातिल’ निगाहें, कैसे अदालत में बदल गई तस्वीर


नोएडा : 29 दिसंबर 2006… दिसंबर की कड़ाके की ठंड थी. लोग अपने घरों में रजाइयों और कंबलों में दुबके हुए थे. पर नोएडा के निठारी में उस दिन जो सामने आया, उसने पूरे देश को झकझोर कर रख दिया. पुलिस और मीडिया की भीड़ अचानक निठारी की कोठी नंबर D-5 के बाहर जमा होने लगी. कोठी के आसपास जांच शुरू हुई तो जो देखने को मिला उसने हर किसी का दिल दहला दिया. नाले से बच्चों के कंकाल और मानव अवशेष मिले. जैसे-जैसे जांच आगे बढ़ी, शक की सुई इसी कोठी की ओर घूमती गई.

यह कोठी कारोबारी मोनिंदर सिंह पंढेर की थी. उसके घरेलू नौकर सुरेंद्र कोली का नाम भी मामले में सामने आया. इसके बाद निठारी कांड की जांच सीबीआई को सौंप दी गई. दोनों के खिलाफ कई मामले चले और लंबे समय तक यह केस देश के सबसे चर्चित आपराधिक मामलों में बना रहा. फिर कहानी ने ऐसा मोड़ लिया, जिसकी शायद किसी ने कल्पना नहीं की थी. एक के बाद एक मामलों में अदालतों के फैसले आए. आखिरकार पंढेर और कोली को अलग-अलग मामलों में बरी किया गया. अदालतों के फैसलों ने इस मामले की पूरी तस्वीर को एक नए मोड़ पर ला खड़ा किया.

दिलचस्प बात यह है कि इस कांड में 2014 की सितंबर में सुरेंद्र कोली को फांसी होने वाली थी, लेकिन रातोंरात मामला पलट गया था. तब तो फांसी के फंदे से बच गया, लेकिन नियति देखो जिस फांसी की सजा से उसे अदालत ने बचा दिया था, उस फंदे पर उसके खुद ही झूलने की खबर आई. अब आइए पूरा मामला बताते हैं.

7 मई को गायब हुई लड़की से सामने आया मामला

मामला तब सुर्खियों में आया जब उत्तराखंड से नौकरी की तलाश में नोएडा आए नंदलाल की बेटी 7 मई 2006 को अपने घर से यह कहकर निठारी आई थी कि उसे कोठी मालिक मोनिंदर सिंह पंढेर ने नौकरी देने की बात कहकर बुलाया है. जब वह वापस घर नहीं लौटी तो नंदलाल उसे ढूंढते हुए कोठी मालिक पंढेर के पास पहुंचे, लेकिन वहां जानकारी होने से इनकार कर दिया गया. इसके बाद नंदलाल पुलिस के पास भी गया लेकिन जब वहां भी सुनवाई नहीं तो उसने कोर्ट का सहारा लिया. कोर्ट के आदेश पर धारा 156/3 के तहत 8 मई 2006 को सेक्टर-20 नोएडा थाने में गुमशुदगी का मामला दर्ज किया गया.

वहीं, निठारी इलाके से और भी बच्चे-महिलाएं गायब होने लगे थे. इन मामलों की जांच करते हुए पुलिस 29 दिसंबर 2006 को सेक्टर-31 स्थित कारोबारी मोनिंदर सिंह पंढेर की कोठी D-5 तक पहुंची. कोठी के पीछे नाले और आसपास से कई मानव खोपड़ियां, हड्डियां, कपड़े और अन्य सामान मिले. इसके बाद पंढेर और उसके घरेलू सहायक सुरेंद्र कोली को गिरफ्तार किया गया. मामले की जांच जनवरी 2007 में CBI को सौंप दी गई थी.

यह लगा था आरोप

मामला यहीं नहीं थमा, जैसे-जैसे जांच बढ़ी वैसे-वैसे चौंकाने वाले खुलासे होने लगे. बताया जाता है कि पूरे नरसंहार का मुख्य अपराधी सुरेंद्र कोली था, जो मोनिंदर सिंह पंढेर की कोठी में रसोइया और घरेलू नौकर के रूप में काम करता था. सुरेंद्र कोली आसपास के इलाकों से गुजरने वाले छोटे बच्चों और महिलाओं को चॉकलेट, टॉफी या पैसों का लालच देकर या फिर डरा-धमकाकर पंढेर की कोठी के अंदर लाता था. एक बार उसका शिकार कोठी के अंदर आ जाता तो फिर वह मासूम बच्चियों और महिलाओं के साथ दुष्कर्म की वारदात को अंजाम देता था और फिर उनकी बेरहमी से हत्या कर देता था.

इतना ही नहीं, उसके नरभक्षी होने के बात भी सामने आई थी. जांच में सबसे ज्यादा चौंकाने वाला खुलासा यह हुआ कि कोली ने पुलिस और अदालत के सामने यह स्वीकार किया था कि वह हत्या के बाद शवों के टुकड़े-टुकड़े करता था. वह उनके अंगों को पकाता था और उन्हें खाता भी था. इसके अलावा वह पीड़ितों के कपड़े और अन्य सामानों को बाहर फेंक देता था.

कई साल बाद जेल से आया था बाहर

सुरेंद्र कोली को उसके कबूलनामे और उसकी निशानदेही पर हुई बरामदगी के आधार पर दोषी ठहराया गया था. निठारी के 13 मामलों में उसे मौत की सजा मिली थी. बाद में कोर्ट ने उसके कबूलनामे और बरामदगी पर सवाल उठाए. साल 2023 में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने 12 मामलों में उसे बरी कर दिया था. कोर्ट का कहना था कि करीब 60 दिन की पुलिस हिरासत के बाद दर्ज कबूलनामे को भरोसेमंद नहीं माना जा सकता. 30 जुलाई 2025 को सुप्रीम कोर्ट ने भी इन 12 मामलों में बरी होने का फैसला बरकरार रखा. इसके बाद सिर्फ एक मामला बचा था. 11 नवंबर 2025 को सुप्रीम कोर्ट ने उसमें भी दोषसिद्धि रद्द कर कोली को बरी कर दिया. इसके बाद कई साल जेल में रहने के बाद वह बाहर आया था.

हरिद्वार में करने लगा था काम

आज अचानक खबर आई कि बहुचर्चित निठारी कांड के आरोपी सुरेंद्र कोली ने हरिद्वार में फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली. कोली हरिद्वार शहर कोतवाली के भूपतवाला इलाके में रह रहा था. पिछले कुछ दिनों से वह इसी इलाके में चाय की दुकान चला रहा था. इसी दौरान उसने चाय की दुकान पर फांसी लगाकर जान दे दी. घटना की जानकारी मिलने के बाद पुलिस मौके पर पहुंची और शव को कब्जे में लेकर जांच शुरू कर दी.

सितंबर में ही होनी थी फांसी

2014 में भी सितंबर का ही महीना था, जब उसे फांसी होनी थी. रविवार 7 सितंबर को मेरठ की सेंट्रल जेल से निकली एक खबर मीडिया में छा जाती है कि निठारी कांड के आरोपी सुरेंद्र कोली को सोमवार को फांसी दी जा रही है. एक दिन का ही वक्त बचा था और वह दिन रविवार था. अदालत बंद थी. ऐसे में कैसे अपील की जाए. अंत में नामी वकील इंदिरा जय सिंह ने सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस आरएम लोढ़ा से मिलने का वक्त मांगा था. चीफ जस्टिस वक्त देते हैं और फिर सीनियर जस्टिस एचएल दत्तू के घर पर विशेष अदालत लगती है. अदालत में रात एक बजे के करीब फैसला होता है कि एक सप्ताह का वक्त दिया जाए. इस तरह सुरेंद्र कोली की फांसी तब टल गई थी.



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