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मध्य प्रदेश की ‘मुख्यमंत्री लाड़ली बहना योजना’ को बंद करने की मांग को लेकर हाई कोर्ट में जनहित याचिका दायर की गई है. कोर्ट ने राज्य सरकार को नोटिस जारी कर योजना के वित्तीय प्रभाव पर जवाब मांगा है.
ग्वालियर. मध्य प्रदेश सरकार की महत्वाकांक्षी ‘मुख्यमंत्री लाड़ली बहना योजना’ को बंद करने की मांग अब हाई कोर्ट तक पहुंच गई है. ग्वालियर की पूर्व पार्षद सुधा दुबे द्वारा दायर जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए हाई कोर्ट ने राज्य सरकार को नोटिस जारी कर इस मामले पर जवाब तलब किया है. हालांकि, याचिका में महिलाओं को दी जाने वाली आर्थिक सहायता का विरोध नहीं किया गया है, बल्कि योजना के मौजूदा स्वरूप, इससे राज्य खजाने पर पड़ रहे भारी-भरकम वित्तीय बोझ और इसके दीर्घकालिक स्थायी परिणामों पर गंभीर सवाल उठाए गए हैं.
याचिकाकर्ता के वकील एडवोकेट अनिल मिश्रा ने अदालत में पक्ष रखते हुए 2026-27 के बजट में योजना के लिए रखे गए करीब 23,882 करोड़ रुपये के विशाल प्रावधान का हवाला दिया है. कोर्ट के समक्ष सवाल खड़ा किया गया है कि इतनी बड़ी वित्तीय प्रतिबद्धता के मुकाबले क्या सरकार के पास इसके स्थायी परिणामों का कोई स्वतंत्र अध्ययन या परिणाम-आधारित आकलन मौजूद है. याचिका में राज्य सरकार से यह स्पष्ट करने की मांग की गई है कि जून 2023 से योजना पर हजारों करोड़ रुपये खर्च करने के बाद महिलाओं की स्थायी आय, रोजगार, स्वरोजगार, कौशल विकास और आर्थिक आत्मनिर्भरता में वास्तव में कितना सुधार आया है.
याचिका में योजना के तहत सहायता राशि को बिना किसी ठोस वित्तीय आधार के बढ़ाए जाने पर भी आपत्ति जताई गई है. सरकार से पूछा गया है कि मासिक राशि को पहले 1,000 रुपये से बढ़ाकर 1,250 रुपये और फिर 1,500 रुपये करने से पूर्व वित्तीय असर और भविष्य की देनदारी का आकलन किस आधार पर किया गया था. इसके अलावा, जून 2023 से लेकर अब तक योजना पर हुए वर्षवार खर्च, कुल खर्च की गई राशि और पंजीकृत लाभार्थियों की संख्या का पूरा ब्योरा अदालत के समक्ष प्रस्तुत करने की मांग रखी गई है.
हाई कोर्ट में दायर इस याचिका के जरिए राज्य पर लगातार बढ़ते कर्ज और ब्याज देनदारी के बीच इस योजना के भविष्य के वित्तीय बोझ की निष्पक्ष जांच कराने का आग्रह किया गया है. याचिकाकर्ता का तर्क है कि हर महीने केवल नकद सहायता देने के बजाय महिलाओं के स्थायी रोजगार और कौशल विकास पर ध्यान केंद्रित किया जाना चाहिए ताकि राज्य के खजाने पर अनावश्यक दबाव न पड़े. हाई कोर्ट द्वारा सरकार को नोटिस जारी किए जाने के बाद अब इस बहुचर्चित योजना के भविष्य और इसके वित्तीय आधार पर कानूनी बहस तेज हो गई है.