Last Updated:
सुरेंद्र कोली की हरिद्वार में मौत के बाद निठारी कांड फिर चर्चा में है. मोनिंदर सिंह पंढेर के पुराने इंटरव्यू से कोली के घर पहुंचने और सिम कार्ड पर सवाल उठे.
सुरेंद्र कोली की मौत के बाद नोएडा की डी-5 कोठी फिर से चर्चा में (फोटो: AI)
कोली की मौत के बाद पंढेर ने एक टीवी चैनल को दिए इंटरव्यू का वह हिस्सा खास तौर पर चर्चा में है, जिसमें उन्होंने बताया था कि कोली उनके घर तक कैसे पहुंचा था. पंढेर के मुताबिक, कोली उनके गांव का रहने वाला था और उन्होंने उसे नोएडा बुलाने के लिए टैक्सी भेजी थी.
सिम कार्ड का क्या है राज?
सिम कार्ड को लेकर पंढेर ने कहा था कि उनके एक दोस्त का बेटा उनके घर पर रहकर परीक्षा की तैयारी कर रहा था. उसी युवक के नाम का सिम कार्ड कोली ने लिया था. पंढेर ने यह स्पष्ट नहीं किया कि वह सिम किस इस्तेमाल के लिए था और इंटरव्यू में कहा कि जांच में इस सिम का जिक्र सामने आया था. इंटरव्यू में पंढेर से यह भी पूछा गया था कि गिरफ्तारी के समय क्या कोली ने उनके खिलाफ कोई बयान दिया था. इस पर पंढेर ने कहा था कि इसका जवाब कोली ही दे सकता है. उन्होंने दावा किया था कि पुलिस और सीबीआई की कस्टडी के दौरान दोनों को अलग रखा गया था और उन्हें एक-दूसरे से बातचीत की अनुमति नहीं थी.
डी-5 कोठी को लेकर क्या बोला था पंढेर ने…
डी-5 कोठी को लेकर भी पंढेर से कई सवाल पूछे गए थे. उन्होंने कहा था कि उन्हें घर में कोई असामान्य गतिविधि दिखाई नहीं दी. कोली के रात में बाहर जाने के सवाल पर उन्होंने कहा था कि वह देर-सवेर बाहर जाता था लेकिन उन्होंने कभी उससे यह नहीं पूछा कि वह रात में क्यों जा रहा है.पंढेर ने इंटरव्यू में जांच के तरीके और मीडिया कवरेज पर भी सवाल उठाए थे. उन्होंने दावा किया था कि जांच के दौरान पूरा ध्यान उन्हें गिरफ्तार करने और उनके खिलाफ कहानी बनाने पर चला गया. ये पंढेर के अपने दावे हैं जिनकी स्वतंत्र पुष्टि इस इंटरव्यू से नहीं होती. अब जब सुरेंद्र कोली की हरिद्वार में मौत हो गई है, तो उस इंटरव्यू में कही गई ये बातें निठारी कांड की पुरानी कहानी के साथ फिर सामने आ रही हैं. फिलहाल कोली की मौत के मामले में पुलिस जांच और पोस्टमार्टम रिपोर्ट का इंतजार है.
निठारी कांड की पूरी कहानी क्या थी?
निठारी कांड की शुरुआत 2005-06 में नोएडा के निठारी इलाके से बच्चों और महिलाओं के गायब होने की शिकायतों से हुई. मामला तब देशभर में चर्चा में आया जब 29 दिसंबर 2006 को सेक्टर-31 स्थित डी-5 कोठी के पीछे नाले से मानव कंकाल और अवशेष मिले. डी-5 कोठी कारोबारी मोनिंदर सिंह पंढेर की थी और सुरेंद्र कोली वहां घरेलू सहायक के तौर पर काम करता था. इसके बाद पुलिस ने पंढेर और कोली को गिरफ्तार किया. जांच बाद में सीबीआई को सौंप दी गई. सीबीआई ने इस मामले से जुड़े 16 मामलों में चार्जशीट दाखिल की थी. अलग-अलग मामलों में हत्या, बलात्कार, अपहरण और आपराधिक साजिश जैसे आरोप लगाए गए. शुरुआती जांच और ट्रायल के दौरान कोली के खिलाफ कई गंभीर आरोप सामने आए और अलग-अलग मामलों में उसे मौत की सजा भी सुनाई गई.
फिर कहानी कैसे बदली?
निठारी मामले में कानूनी लड़ाई कई साल चली. 2011 में सुप्रीम कोर्ट ने एक मामले में कोली की मौत की सजा बरकरार रखी थी. बाद में 2015 में इलाहाबाद हाई कोर्ट ने उस सजा को उम्रकैद में बदल दिया. इसके बाद दूसरे मामलों में भी कानूनी प्रक्रिया चलती रही. 16 अक्टूबर 2023 को इलाहाबाद हाई कोर्ट ने कोली को 12 मामलों में बरी कर दिया. कोर्ट के फैसलों के खिलाफ राज्य की अपीलों पर सुप्रीम कोर्ट ने 30 जुलाई 2025 को फैसला सुनाते हुए इन बरी किए जाने के फैसलों को बरकरार रखा. इसके बाद कोली के खिलाफ एक मामला बाकी रह गया था रिम्पा हलदर केस. इसी मामले में उसकी दोषसिद्धि और मौत की सजा पहले बरकरार रह चुकी थी लेकिन नवंबर 2025 में सुप्रीम कोर्ट ने उसकी क्यूरेटिव पिटीशन स्वीकार करते हुए उसे इस मामले में भी बरी कर दिया. सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि एक ही तरह के साक्ष्य के आधार पर अलग-अलग मामलों में विरोधाभासी नतीजे कायम नहीं रह सकते और मामले में न्याय के गंभीर सवाल पैदा हुए थे.